
पंजाब और हरियाणा राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) -7 और एनएच -5 के बीच जंक्शन से जुड़ा एक प्रमुख बाईपास सड़क नेटवर्क है। इसे “जीरकपुर बाईपास” कहा जाता है, जो कुल 19.2 किलोमीटर लंबा और 6 लेन वाला होगा। इस परियोजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में यातायात को सुविधाजनक और सुगम बनाना है। यह परियोजना मुख्य रूप से हाइब्रिड एनीटी मोड (Hybrid Annuity Model, HAM) पर आधारित है, जो एक वित्तीय मॉडल है जहां निर्माण लागत का एक हिस्सा सरकार देती है और शेष हिस्सा एक निजी कंपनी द्वारा प्रदान किया जाता है। इस मॉडल में, सड़क निर्माण के बाद उस पर ट्रैफिक की वजह से होने वाली आय का एक हिस्सा निजी कंपनी को दिया जाता है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ होता है।
मुख्य उद्देश्य:
- भीड़भाड़ कम करना: यह परियोजना जीरकपुर, पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक की भीड़ को कम करेगी। क्योंकि, वर्तमान में इन क्षेत्रों में भारी ट्रैफिक की समस्या है, खासकर उन वाहनों का जो पटियाला, दिल्ली, मोहाली एरोसिटी और हिमाचल प्रदेश की तरफ जाते हैं।
- सड़क कनेक्टिविटी में सुधार: परियोजना के तहत जीरकपुर से परवाणू तक के मार्ग को बेहतर कनेक्टिविटी देने का उद्देश्य है, जिससे यात्री और मालवाहन बिना रुके और समय की बचत के साथ यात्रा कर सकें।
- हिमाचल प्रदेश को सीधी कनेक्टिविटी: इससे हिमाचल प्रदेश की ओर यात्रा करने वाले लोगों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच यातायात सुगम होगा।
परियोजना का लाभ:
- यातायात की गति बढ़ेगी: इस बाईपास के निर्माण से, वाहनों को सीधे और बेहतर मार्ग पर यात्रा करने का अवसर मिलेगा, जिससे समय की बचत होगी और यात्रा की गति में सुधार होगा।
- वाणिज्यिक लाभ: इससे जीरकपुर, पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी क्योंकि बेहतर सड़क नेटवर्क से मालवाहन और व्यापारिक यातायात में वृद्धि होगी।
- पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव: ट्रैफिक की भीड़ घटने से प्रदूषण में भी कमी आएगी, क्योंकि वाहनों के रुकने और धीमी गति से चलने के कारण उत्सर्जन में कमी आएगी।
- क्षेत्रीय विकास: यह परियोजना क्षेत्रीय विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न केवल यातायात में सुधार होगा, बल्कि नए व्यापारिक अवसरों और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
परियोजना की विशेषताएँ:
- 19.2 किलोमीटर लंबा: परियोजना का निर्माण 6 लेन की सड़क पर किया जाएगा, जिससे यातायात की गति बढ़ेगी।
- हाइब्रिड एनीटी मोड (HAM): यह वित्तीय मॉडल सरकार और निजी कंपनियों के बीच साझेदारी को दर्शाता है, जो निर्माण और रखरखाव के समय दोनों को लाभ पहुँचाता है।
- सभी मौसम में यातायात की सुविधा: इस बाईपास को इस प्रकार डिज़ाइन किया जाएगा कि यह सभी मौसमों में सुरक्षित और प्रभावी यातायात के लिए उपयुक्त रहे।
इस परियोजना का क्रियान्वयन स्थानीय स्तर पर सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के सुधार में भी मदद करेगा।



