
तालाब बना मौत का जाल: कानपुर देहात हादसे में चार की मौत, खुले शीशे से बचीं छह जिंदगियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में शुक्रवार देर शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। जिम्मेदार विभागों की लापरवाही एक बार फिर भारी पड़ी और एक ही परिवार के चार लोगों की जिंदगी पल भर में खत्म हो गई। शोक सभा से लौट रहे परिवार की वैन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे तालाब में जा गिरी। कार में फंसे लोग मदद के लिए चीखते रहे, लेकिन जब तक उन्हें बाहर निकाला जाता, चार सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं।

यह हादसा शिवली–कल्याणपुर मार्ग पर बैरी सवाई स्थित सांचुला माता मंदिर के पास हुआ, जहां सड़क किनारे गहरा तालाब है लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई बाउंड्री या जाली नहीं लगाई गई थी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन से यहां सुरक्षा इंतजाम कराने की मांग कर चुके थे, लेकिन हर बार उनकी आवाज अनसुनी कर दी गई। इसी अनदेखी ने शुक्रवार को एक परिवार को उजाड़ दिया।
शोक से लौटते वक्त हुआ हादसा
मृतक परिवार कानपुर के आवास विकास कल्याणपुर-3 का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि सभी लोग त्रियोदशी संस्कार में शामिल होकर लौट रहे थे। देर शाम उनकी वैन बैरी सवाई के पास पहुंची ही थी कि अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया और सीधे तालाब में जा गिरा। हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
तालाब में गिरते ही वैन पानी में डूबने लगी और अंदर बैठे लोग मदद के लिए चीखने लगे। आसपास के ग्रामीणों ने आवाज सुनी तो वे तुरंत मौके की ओर दौड़े। अंधेरा होने और प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण राहत कार्य में काफी मुश्किलें आईं, फिर भी ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी।
चार लोगों की दर्दनाक मौत
इस भीषण हादसे में राजकिशोर अग्निहोत्री, उनकी पत्नी स्नेहलता, बेटी राखी उर्फ हिमांशू अग्निहोत्री और दो वर्षीय नाती शिव की डूबने से मौत हो गई। जब तक ग्रामीण और अन्य लोग कार तक पहुंचे, तब तक ये चारों जिंदगी की जंग हार चुके थे।
घटना के बाद जब परिजनों ने अपनों के शव देखे तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे इलाके में मातम पसर गया और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
ग्रामीणों की बहादुरी से बचीं छह जिंदगियां
हादसे के वक्त वैन में कुल दस लोग सवार थे। ग्रामीणों की तत्परता और बहादुरी के चलते छह लोगों की जान बच गई। इनमें राजकिशोर की नातिन वानी, रिश्तेदार कृतिका, सुधा, उनके बेटे कान्हा (4) और सुधांशु (24) शामिल हैं।
ग्रामीणों ने किसी तरह तालाब में उतरकर कार के खुले शीशे के सहारे अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला और तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवली पहुंचाया। डॉक्टरों ने समय रहते इलाज शुरू किया, जिससे उनकी जान बच सकी।
खुले शीशे बने जीवनदान
परिजनों के मुताबिक, कार चालक की साइड के शीशे खुले थे। जब वाहन तालाब में गिरा तो चालक बाहर निकलकर भाग गया। इसी दौरान कार के खुले शीशों से बाहर की ओर झांक रहे लोगों को ग्रामीणों ने पकड़कर बाहर निकाल लिया।
जो लोग कार के अंदर की ओर फंसे हुए थे, उन्हें निकालने में देर हो गई और उनकी डूबने से मौत हो गई। अगर शीशे बंद होते तो शायद मृतकों की संख्या और भी ज्यादा हो सकती थी। इस बात ने पूरे हादसे को और भी दर्दनाक बना दिया।
सुरक्षा जाली होती तो टल सकता था हादसा
स्थानीय लोगों का कहना है कि सांचुला माता मंदिर के पास बना यह तालाब पहले भी खतरा बन चुका है। कई बार प्रशासन को लिखित और मौखिक शिकायत दी गई कि यहां बाउंड्री या सुरक्षा जाली लगाई जाए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि तालाब के किनारे मजबूत बैरियर या जाली लगी होती तो वैन सीधे पानी में नहीं गिरती और चार लोगों की जान बच सकती थी। लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है।
लगातार हो रहे ऐसे हादसे
यह पहली घटना नहीं है जब सड़क किनारे सुरक्षा इंतजाम न होने से लोगों की जान गई हो। इससे पहले नोएडा में निर्माणाधीन साइट पर खोदे गए गड्ढे में कार गिरने से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी।
वहीं औरैया के अछल्दा थाना क्षेत्र के तुरुकपुर गांव के पास भी नहर किनारे सुरक्षा और रोशनी की कमी के कारण भरथना इटावा के कारोबारी राजीव कुमार उर्फ कल्लन, उनकी पत्नी मधु गुप्ता और बेटे शिवम की जान चली गई थी। इन घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस सबक नहीं लिया।
अंधेरा बना राहत कार्य में बाधा
शुक्रवार के हादसे में एक और बड़ी समस्या सामने आई—तालाब के पास पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं थी। अंधेरे के कारण ग्रामीणों को डूबते लोगों को ढूंढने और बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर मौके पर स्ट्रीट लाइट होती तो राहत कार्य और तेजी से हो सकता था और शायद कुछ और जानें बचाई जा सकती थीं।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
घटना की सूचना मिलते ही मृतकों के परिजन और रिश्तेदार अस्पताल और घटना स्थल पर पहुंच गए। अपनों को खोने का गम इतना गहरा था कि कई लोग बदहवास होकर रोते-बिलखते नजर आए।
राजकिशोर के भतीजे राजन अग्निहोत्री ने बताया कि हादसे के करीब 25 मिनट बाद सभी लोगों को तालाब से बाहर निकाला जा सका। तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य मार्गों के पास मौजूद नहरों, तालाबों और गड्ढों के किनारे सुरक्षा इंतजाम न होना लगातार जानलेवा साबित हो रहा है।
स्थानीय लोग अब मांग कर रहे हैं कि ऐसे खतरनाक स्थानों की तुरंत पहचान कर वहां मजबूत बैरियर, जाली और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन चार जिंदगियों की कीमत पर उठे ये सवाल प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।



