उत्तर प्रदेश

टूटी दोस्ती का खौफनाक अंजाम: गाजियाबाद में अवैध संबंधों के शक में पति बना कातिल, पत्नी और दोस्त की ली जान

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी इलाके में सामने आया डबल मर्डर केस केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि रिश्तों के बिखरने, शक की आग और गुस्से के विस्फोट की भयावह कहानी है। इस वारदात ने यह साबित कर दिया कि जब भरोसा टूटता है, तो उसका अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है।

बुध बाजार कॉलोनी में रहने वाले राशिद ने अपनी पत्नी शबनम और अपने ही दोस्त फहीम की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना सोमवार देर रात उस समय हुई, जब पूरा इलाका नींद में था, लेकिन एक घर के अंदर रिश्तों का खून हो रहा था। इस घटना ने आसपास के लोगों को भी हिला कर रख दिया।

पुलिस जांच में सामने आया है कि राशिद और फहीम की दोस्ती करीब दो दशकों पुरानी थी। दोनों ने साथ में कारोबार शुरू किया था और धीरे-धीरे उनका रिश्ता परिवार जैसा हो गया था। फहीम का घर में आना-जाना इतना सामान्य था कि किसी को भी शक नहीं होता था। लेकिन इसी नजदीकी ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसने तीन जिंदगियों को खत्म कर दिया।

बताया जा रहा है कि फहीम और शबनम के बीच पिछले कुछ समय से नजदीकियां बढ़ रही थीं। यह संबंध धीरे-धीरे इतना गहरा हो गया कि दोनों ने एक साथ रहने और शादी करने का फैसला तक कर लिया था। यह बात जब राशिद को पता चली, तो उसके मन में गुस्सा और बदले की भावना पनपने लगी।

घटना से पहले घर का माहौल काफी तनावपूर्ण रहने लगा था। बच्चों ने भी कई बार माता-पिता के बीच झगड़े देखे थे। शबनम अपने पति से नाराज रहती थी और अक्सर घर छोड़ने की बात करती थी। वहीं राशिद इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर पा रहा था। उसे यह डर भी सताने लगा था कि अगर शबनम घर छोड़कर चली गई, तो उसके बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

सोमवार की रात राशिद ने एक खतरनाक योजना बनाई। उसने अपने दोस्त फहीम को घर बुलाया और पत्नी शबनम को भी उसी कमरे में बैठा लिया। उसने अपने सभी बच्चों को किसी न किसी बहाने से बाहर भेज दिया, ताकि कोई इस बातचीत का गवाह न बन सके। उस समय उसका बड़ा बेटा घर पर नहीं था, जिससे उसे अपनी योजना को अंजाम देने में आसानी हुई।

कमरे के अंदर तीनों के बीच बातचीत शुरू हुई, लेकिन जल्द ही यह बहस में बदल गई। गुस्से में आकर राशिद ने अपना आपा खो दिया और उसने तमंचा निकाल लिया। उसने सबसे पहले फहीम के सिर में गोली मारी और फिर शबनम को भी निशाना बनाया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

इस पूरी घटना का एक मासूम बच्चा गवाह बन गया, जिसने पुलिस को बताया कि “पापा ने मम्मी और अंकल को गोली मार दी।” यह बयान सुनकर हर कोई सन्न रह गया। एक बच्चे के लिए इस तरह की घटना देखना जीवन भर का आघात बन सकता है।

घटना के बाद राशिद मौके से फरार हो गया। पुलिस ने तुरंत इलाके की घेराबंदी की और आरोपी की तलाश शुरू कर दी। फॉरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए हैं और मामले की जांच जारी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह हत्या पूरी तरह से सुनियोजित थी। जिस तरह से राशिद ने दोनों को एक कमरे में बुलाया और बच्चों को बाहर भेजा, उससे साफ है कि उसने पहले से ही इस वारदात की योजना बना रखी थी।

इस मामले में फहीम का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। वह पहले भी कई मामलों में जेल जा चुका था और उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज थे। वहीं राशिद भी कानून से अंजान नहीं था और पहले चोरी के मामले में जेल जा चुका है।

इस घटना ने सबसे ज्यादा असर उन सात मासूम बच्चों पर डाला है, जिन्होंने एक ही रात में अपनी मां को खो दिया और पिता को अपराधी बनते देखा। उनका भविष्य अब अनिश्चितता के साए में है। समाज और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि इन बच्चों को सही दिशा और सहारा मिले।

पड़ोसियों के अनुसार, घटना से पहले बच्चों का व्यवहार भी कुछ असामान्य लग रहा था। वे डर के कारण पड़ोस में चले गए थे, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि घर के अंदर माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था।

यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। रिश्तों में बढ़ती दूरी, संवाद की कमी और गुस्से पर नियंत्रण न होना, ऐसी घटनाओं को जन्म देता है। अगर समय रहते समस्याओं का समाधान किया जाए, तो शायद ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सकता है।

अंत में, यह डबल मर्डर केस केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक टूटते परिवार की कहानी है, जिसमें हर किरदार कहीं न कहीं पीड़ित है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन में किसी भी परिस्थिति में हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती। रिश्तों को बचाने के लिए समझदारी, धैर्य और संवाद ही सबसे जरूरी हथियार हैं।

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