छुट्टी मांगने पर विवाद, महिला कॉन्स्टेबल ने कोतवाल पर लगाए गंभीर आरोप
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला से पुलिस विभाग को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां सदर कोतवाली में तैनात एक महिला कॉन्स्टेबल ने अपने ही कोतवाल पर गाली-गलौज और मारपीट की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कोतवाल को पद से हटा दिया है। मामले की जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।

छुट्टी मांगना बना विवाद की वजह
बताया जा रहा है कि 2019 बैच की कॉन्स्टेबल मेनका चौहान इन दिनों बस्ती की सदर कोतवाली में तैनात हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को दी गई अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनकी मां की तबीयत अचानक काफी खराब हो गई थी। मां के इलाज के लिए उन्हें तत्काल छुट्टी की जरूरत थी।
मेनका के अनुसार, मंगलवार को वह छुट्टी मांगने के लिए कोतवाल दिनेश चंद्र चौधरी के पास पहुंचीं। उन्होंने विनम्रता से अपनी पारिवारिक स्थिति बताकर अवकाश की मांग की। लेकिन उनका आरोप है कि उनकी बात सुनते ही कोतवाल नाराज हो गए और उन्हें डांटना शुरू कर दिया।
गाली-गलौज और मारने की कोशिश का आरोप
महिला कॉन्स्टेबल का कहना है कि जब उन्होंने अपनी मजबूरी दोबारा बताई तो कोतवाल ने कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज की। मेनका चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि कोतवाल ने उन्हें मारने के लिए दौड़ने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ती देख वह तुरंत उनके केबिन से बाहर निकल आईं।
मेनका के मुताबिक, इस दौरान कोतवाल ने तंज कसते हुए कहा, “मैं सबको छुट्टी देने के लिए बैठा हूं।” इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में उन्हें ड्यूटी से गैरहाजिर भी दर्ज कर दिया गया।
डीआईजी कार्यालय पहुंची कॉन्स्टेबल
घटना से आहत मेनका चौहान ने अगले दिन बुधवार को उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाने का फैसला किया। वह अपनी पांच साल की बेटी के साथ बस्ती रेंज के डीआईजी संजय त्यागी के कार्यालय पहुंचीं।
डीआईजी से मुलाकात कर उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और लिखित शिकायत सौंपी। बताया जा रहा है कि जब वह डीआईजी कार्यालय से बाहर निकलीं तो वह बेहद भावुक हो गईं और फफक-फफक कर रोने लगीं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें मजबूरी में छुट्टी चाहिए थी, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
पुलिस अधीक्षक ने की तत्काल कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्ती के पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह ने त्वरित कदम उठाया। बुधवार देर रात उन्होंने कोतवाल दिनेश चंद्र चौधरी को उनके पद से हटा दिया और पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित
इस पूरे मामले पर एडिशनल एसपी श्यामकांत ने बताया कि एसपी के निर्देश पर दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में स्वयं एडिशनल एसपी श्यामकांत और सीओ हरैया स्वर्णिमा सिंह को शामिल किया गया है।
जांच कमेटी को पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद दोष तय किए जाएंगे और उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
कौन हैं मेनका चौहान
मेनका चौहान वर्ष 2019 बैच की कॉन्स्टेबल हैं और मूल रूप से बड़हलगंज की रहने वाली हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती बस्ती की सदर कोतवाली में है। उनके पति भी पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल हैं और उनकी पोस्टिंग पुरानी बस्ती थाने में बताई जा रही है। परिवार में उनकी बीमार मां और दो बेटियां हैं।
मेनका ने अपनी शिकायत में कहा है कि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें छुट्टी की सख्त जरूरत थी, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया।
विभाग में मचा हड़कंप
महिला कॉन्स्टेबल द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। इस मामले को लेकर पुलिस महकमे के भीतर भी चर्चा का माहौल है। कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
आगे क्या?
फिलहाल कोतवाल को हटाकर जांच शुरू कर दी गई है। अब सबकी नजर जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है, वहीं अगर आरोप निराधार साबित होते हैं तो स्थिति अलग हो सकती है।
यह मामला पुलिस विभाग के भीतर कार्यस्थल व्यवहार, संवेदनशीलता और अनुशासन जैसे मुद्दों को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस पर क्या अंतिम कदम उठाता है।



