
चार महीने लेट हुआ चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन प्रोजेक्ट, अब अगस्त में होगा तैयार
पंचकूला। आधुनिक सुविधाओं से लैस बनने जा रहा चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन फिलहाल तय समयसीमा से पीछे चल रहा है। रेलवे प्रशासन की ओर से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 30 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे पूरा होने में और समय लगेगा। ताजा जानकारी के अनुसार, यह वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन अब अगस्त महीने तक ही पूरी तरह तैयार हो पाएगा।

करीब 462 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा यह स्टेशन देश के सबसे आधुनिक रेलवे स्टेशनों में शामिल होने जा रहा है। इस परियोजना को रेलवे लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) के तहत लगभग तीन साल पहले शुरू किया गया था। शुरुआत में कार्य की गति तेज थी और उम्मीद थी कि इसे तय समय में पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन विभिन्न कारणों के चलते काम में देरी हो गई।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, देरी की सबसे बड़ी वजह स्टेशन पर लगातार जारी ट्रेनों का संचालन और यात्रियों की आवाजाही है। चूंकि यह स्टेशन एक व्यस्त रूट पर स्थित है, इसलिए इसे पूरी तरह बंद करके निर्माण कार्य करना संभव नहीं था। ऐसे में निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से किया गया, जिससे समय ज्यादा लग गया। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए काम को धीमी गति से आगे बढ़ाना पड़ा।
इस परियोजना की एक बड़ी खासियत इसका अनोखा डिजाइन और लोकेशन है। चंडीगढ़ और पंचकूला के बीच स्थित इस स्टेशन की एंट्री दोनों शहरों की ओर से है। यानी यात्री किसी भी ओर से आएं, उन्हें समान रूप से आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। यह डिजाइन इसे देश के अन्य रेलवे स्टेशनों से अलग बनाता है और इसे एक विशेष पहचान देता है।
इस स्टेशन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से उनका पुराना जुड़ाव रहा है, इसलिए इस प्रोजेक्ट को विशेष महत्व दिया जा रहा है। संभावना है कि स्टेशन के पूरी तरह तैयार होने के बाद इसका उद्घाटन भी प्रधानमंत्री के हाथों ही किया जाएगा।
यदि सुविधाओं की बात करें तो यह स्टेशन आधुनिक तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण के साथ तैयार किया जा रहा है। इसे ग्रीन बिल्डिंग के प्लेटिनम मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। स्टेशन परिसर में 1,350 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया जा रहा है, जिससे यहां की बिजली की जरूरतों को हरित ऊर्जा के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
इस रेलवे स्टेशन को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। अनुमान है कि यह स्टेशन रोजाना करीब 90 हजार यात्रियों की आवाजाही को आसानी से संभाल सकेगा। इसके साथ ही, अगले 30 वर्षों तक बढ़ती जनसंख्या और यातायात की मांग को भी ध्यान में रखा गया है। इसमें बेहतर वेटिंग एरिया, आधुनिक टिकटिंग सिस्टम, एस्केलेटर, लिफ्ट और डिजिटल सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
रेलवे विभाग के अनुसार, परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। अधिकांश सिविल वर्क पूरा हो चुका है और अब फिनिशिंग व तकनीकी कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जुलाई तक प्रमुख कार्य पूरे कर लिए जाएंगे और अगस्त तक स्टेशन पूरी तरह तैयार होकर उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएगा।
चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर बलबीर सिंह ने बताया कि परियोजना में देरी जरूर हुई है, लेकिन काम की गुणवत्ता पर पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें और स्टेशन हर दृष्टि से आधुनिक बने। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अब कार्य तेजी से किया जा रहा है और निर्धारित नई समयसीमा के भीतर इसे पूरा कर लिया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन न सिर्फ यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनेगा, बल्कि यह शहर की आधुनिक पहचान का प्रतीक भी होगा। यह स्टेशन न केवल परिवहन का केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा।
कुल मिलाकर, भले ही यह प्रोजेक्ट अपने निर्धारित समय से पीछे चल रहा है, लेकिन इसके पूरा होने के बाद यह देश के बेहतरीन रेलवे स्टेशनों में शामिल हो सकता है। अब यात्रियों और स्थानीय लोगों की नजरें अगस्त महीने पर टिकी हैं, जब यह बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट पूरी तरह से साकार होगा और आधुनिक भारत की तस्वीर को और मजबूत करेगा।



