
खौफनाक रात का सच: पंजाब में सोते हुए मजदूर को चूहों ने नोचा, आंखें और चेहरा कुतर डाला — सुबह मिली लाश से दहला शहर
पंजाब के बठिंडा शहर से सामने आई एक दर्दनाक और विचलित कर देने वाली घटना ने इंसानियत, शहरी व्यवस्था और गरीबों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पट्टा मार्किट इलाके में रात के अंधेरे में सो रहे एक बेसहारा मजदूर की मौत ऐसे हालात में हुई, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। बताया जा रहा है कि व्यक्ति रात को खुले में सो रहा था और उसी दौरान चूहों ने उसके शरीर को बुरी तरह नोच डाला। सुबह जब लोग वहां पहुंचे तो जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी को भीतर तक हिला दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मृतक कई दिनों से उसी मार्किट क्षेत्र में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करता था। उसका कोई स्थायी घर नहीं था और वह अक्सर दुकानों के सामने या फुटपाथ पर रात गुजारता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले दो दिनों से वह बीमार लग रहा था और बेहद कमजोर भी दिखाई दे रहा था। आशंका जताई जा रही है कि बीमारी और कमजोरी के कारण वह गहरी नींद या अचेत अवस्था में रहा होगा, जिसके चलते उसे खतरे का अंदेशा तक नहीं हुआ।
सुबह जब आसपास के दुकानदार पहुंचे तो उन्होंने देखा कि व्यक्ति जमीन पर निर्जीव पड़ा है। पहले लोगों को लगा कि वह ठंड या बीमारी से मर गया होगा, लेकिन जैसे ही पास जाकर देखा गया, तो उसके चेहरे और आंखों की हालत देखकर लोग दहशत में आ गए। उसके चेहरे पर गहरे घाव थे, आंखों के आसपास का हिस्सा बुरी तरह कुतरा हुआ था और शरीर के कई हिस्सों पर भी चूहों के काटने के निशान मौजूद थे। यह दृश्य इतना भयावह था कि कुछ लोगों ने तुरंत नजरें फेर लीं।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय समाजसेवी संस्था के वालंटियर मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी और शव को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की। पुलिस टीम के आने तक लोगों की भीड़ जमा हो चुकी थी और इलाके में चर्चा का माहौल था कि आखिर शहर के बीचोंबीच कोई व्यक्ति इतनी बदहाली में कैसे मर सकता है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्राथमिक जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन उसकी उम्र लगभग 30 वर्ष बताई जा रही है। आसपास के लोगों का कहना है कि वह पिछले कई महीनों से इसी इलाके में काम कर रहा था और यहीं सोता था। कुछ लोग उसे नाम से नहीं जानते थे, लेकिन चेहरा पहचानते थे।
शव को पहचान के लिए सिविल अस्पताल बठिंडा के शवगृह में रखा गया है, ताकि परिवार या परिचित आगे आकर उसकी पहचान कर सकें। पुलिस ने आसपास के इलाकों में पूछताछ शुरू कर दी है और लापता व्यक्तियों की सूची से मिलान किया जा रहा है।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि शहरी गरीबी, प्रशासनिक लापरवाही और स्वास्थ्य सुरक्षा की विफलता की कहानी भी बयां करती है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि मार्किट इलाके में चूहों का इतना आतंक है कि वे किसी इंसान को नोच डालें, तो यह नगर निगम और सफाई व्यवस्था की बड़ी विफलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चूहों की बढ़ती संख्या आमतौर पर गंदगी, कचरे के ढेर और नालियों की सफाई न होने से होती है। बाजारों में खुले में फेंका गया खाना और कूड़ा इन जीवों को पनपने का अवसर देता है। यदि समय रहते सफाई और नियंत्रण नहीं किया जाए, तो वे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। कई मामलों में चूहे संक्रमण और बीमारियों के वाहक भी होते हैं।
समाजसेवियों का कहना है कि शहरों में बेसहारा लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए सुरक्षित रात्रि आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यदि मृतक को रहने की सुरक्षित जगह मिल जाती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। उनका मानना है कि नगर प्रशासन को रैन बसेरों की संख्या बढ़ानी चाहिए और खुले में सोने वालों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजना चाहिए।
इस घटना ने बाजार के व्यापारियों को भी चिंतित कर दिया है। उनका कहना है कि यदि चूहों की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो यह न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। खाद्य सामग्री की दुकानों में चूहों का आना बीमारी फैलने का कारण बन सकता है।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी। यह भी जांच की जा रही है कि क्या व्यक्ति की मौत पहले बीमारी से हुई और बाद में चूहों ने शरीर को नुकसान पहुंचाया, या फिर चूहों के हमले ने ही उसकी जान ली। दोनों संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच जारी है।
इस भयावह घटना ने शहर में संवेदनशीलता की बहस भी छेड़ दी है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या हम इतने असंवेदनशील हो चुके हैं कि फुटपाथ पर सो रहे इंसान की हालत देखने वाला कोई नहीं? क्या शहरों की चमक-दमक के पीछे ऐसी दर्दनाक सच्चाइयां छिपी हैं जिन्हें हम नजरअंदाज करते रहते हैं?
फिलहाल पुलिस पहचान की कोशिश में जुटी है और प्रशासन से सफाई व चूहा नियंत्रण अभियान तेज करने की मांग उठ रही है। इस दर्दनाक मौत ने एक बार फिर याद दिलाया है कि शहर की असली तस्वीर केवल रोशनी और बाजारों से नहीं, बल्कि उन लोगों से भी बनती है जो फुटपाथ पर रात बिताते हैं।



