
खुले सीवरेज टैंक ने ली मासूम की जान, फगवाड़ा में दर्दनाक हादसा
पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा शहर में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। घर के बाहर खेल रहे 11 वर्षीय बच्चे की खुले पड़े सीवरेज टैंक में गिरने से मौत हो गई। यह हादसा इतना अचानक और भयावह था कि देखते ही देखते खुशियों से भरा मोहल्ला मातम में बदल गया। मृतक बच्चे की पहचान अथर्व (11) पुत्र अरविंद, निवासी गांव मेहली के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना फगवाड़ा के खोथडां रोड स्थित एक खाली प्लॉट में हुई। शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे मोहल्ले के कई बच्चे रोज़ की तरह अपने घरों के बाहर खेल रहे थे। खेल-खेल में कुछ बच्चे पास ही स्थित एक खाली पड़े प्लॉट की ओर चले गए। इसी प्लॉट में एक सीवरेज टैंक बना हुआ था, जो खुला पड़ा था। बताया जा रहा है कि टैंक पर न तो कोई ढक्कन लगा था और न ही वहां किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खेलते समय अचानक अथर्व का पैर फिसल गया और वह सीधे खुले सीवरेज टैंक में जा गिरा। घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद बच्चे और लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर मोहल्ले के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। जब लोगों ने देखा कि एक बच्चा सीवरेज टैंक में गिर गया है तो अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों ने बिना देर किए तुरंत राहत कार्य शुरू किया। किसी ने रस्सी का इंतजाम किया तो किसी ने टैंक के अंदर उतरकर बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद अथर्व को टैंक से बाहर निकाला गया। उस समय तक वह बेसुध अवस्था में था। परिजन और पड़ोसी उसे तुरंत फगवाड़ा के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे।
अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्चे की हालत की जांच की, लेकिन अफसोस कि उसे मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों के इस बयान के बाद परिवार पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मां-बाप और परिजन अपने लाड़ले को खोने के गम में बदहवास नजर आए। पूरे गांव और मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।
मृतक के पड़ोस में रहने वाली महिला रेखा ने इस घटना को लेकर प्लॉट मालिक की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि जिस प्लॉट में यह हादसा हुआ, वहां लंबे समय से सीवरेज टैंक खुला पड़ा था। न तो उस पर ढक्कन लगाया गया था और न ही प्लॉट के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाई गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार इस संबंध में चिंता जताई गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
रेखा का कहना है कि यदि प्लॉट को सुरक्षित किया गया होता या टैंक को ढक दिया गया होता तो शायद आज एक मासूम की जान न जाती। मोहल्ले के अन्य लोगों ने भी प्रशासन से ऐसे खुले गड्ढों और टैंकों को तुरंत बंद कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस चौकी मेहली की टीम भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने हालात का जायजा लिया और परिजनों से बातचीत की। इस संबंध में पुलिस अधिकारी जसकरण सिंह ने बताया कि फिलहाल परिवार की ओर से किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की मांग नहीं की गई है। परिवार ने मामले में आगे कोई कार्रवाई न करने की बात कही है। हालांकि पुलिस ने सामान्य प्रक्रिया के तहत जानकारी दर्ज कर ली है।
यह हादसा एक बार फिर शहरी इलाकों में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल खड़े करता है। अक्सर देखा जाता है कि खाली प्लॉटों में निर्माणाधीन या अधूरे ढांचे बिना सुरक्षा के छोड़ दिए जाते हैं। खुले सीवरेज टैंक, बिना ढक्कन के मैनहोल और अधूरी बाउंड्री वॉल जैसे खतरे छोटे बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। खासकर उन इलाकों में जहां बच्चे रोजाना खेलते हैं, वहां ऐसी लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को समय-समय पर ऐसे स्थानों का निरीक्षण करना चाहिए और जहां भी खुले टैंक या खतरनाक ढांचे हों, उन्हें तुरंत सुरक्षित कराया जाना चाहिए। साथ ही प्लॉट मालिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और अपने परिसर को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
अथर्व की असमय मौत ने न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। जो बच्चा कुछ देर पहले अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, वह पलक झपकते ही जिंदगी की जंग हार गया। मासूम की मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि छोटी-सी लापरवाही किस तरह किसी परिवार की दुनिया उजाड़ सकती है। जरूरत है कि ऐसे हादसों से सबक लेते हुए सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में कोई और बच्चा इस तरह की त्रासदी का शिकार न बने।


