
एनआरआई संपत्ति विवाद: सेक्टर-17 में कब्जे का आरोप, केस दर्ज
चंडीगढ़ में एनआरआई संपत्ति को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। सेक्टर-17 थाना क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया निवासी दिवंगत व्यक्ति की संपत्ति पर जबरन कब्जा करने और तोड़फोड़ करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला शहर के व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण चर्चा में बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ताओं धर्मेंद्र कश्यप और शैलेंद्र कश्यप ने पुलिस को बताया कि वे ऑस्ट्रेलिया निवासी स्वर्गीय मनमोहन कश्यप के कानूनी वारिस हैं। उनके अनुसार, सेक्टर-17बी स्थित एक एससीओ (शॉप-कम-ऑफिस) की चौथी मंजिल पर उनका वैधानिक हिस्सा है। आरोप है कि सेक्टर-37 निवासी विक्रम सिंह और कुछ अन्य लोगों ने 5 मई 2024 को इस हिस्से पर जबरन कब्जा कर लिया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत में कहा गया है कि संबंधित एससीओ की चौथी मंजिल पर परिवार का वैध स्वामित्व है, लेकिन आरोपितों ने कथित तौर पर बिना अनुमति वहां प्रवेश किया। पीड़ितों का दावा है कि मौके पर तोड़फोड़ की गई, सामान को नुकसान पहुंचाया गया और कब्जा जमाने की कोशिश की गई।
धर्मेंद्र और शैलेंद्र कश्यप का कहना है कि वे लंबे समय से संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और अधिकारों को लेकर कानूनी प्रक्रिया में थे। उनका आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति और एनआरआई स्थिति का फायदा उठाकर आरोपितों ने मौके का लाभ लिया।
प्रशासन तक पहुंची शिकायत
सूत्रों के मुताबिक, पीड़ितों ने इस मामले को लेकर चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से भी शिकायत की थी। प्रशासनिक स्तर पर शिकायत के संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने प्राथमिक जांच की और तत्पश्चात मामला दर्ज किया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तथ्यों की गहन जांच की जा रही है। संबंधित दस्तावेजों, स्वामित्व के कागजात और घटनास्थल की स्थिति की पड़ताल की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सेक्टर-17: व्यावसायिक दृष्टि से अहम क्षेत्र
चंडीगढ़ का सेक्टर-17 शहर का प्रमुख व्यावसायिक और प्रशासनिक केंद्र माना जाता है। यहां स्थित एससीओ भवनों की बाजार कीमत काफी अधिक है। ऐसे में संपत्ति विवाद अक्सर कानूनी जटिलताओं का रूप ले लेते हैं, खासकर तब जब मालिक या वारिस एनआरआई हों।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एनआरआई संपत्तियां अक्सर कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के मामलों में निशाना बनती हैं। कई बार लंबे समय तक विदेश में रहने के कारण मालिक नियमित निगरानी नहीं कर पाते, जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठा लेते हैं।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने बताया कि घटना 5 मई 2024 की बताई जा रही है। फिलहाल घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके अलावा दोनों पक्षों से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह मामला संपत्ति स्वामित्व और कथित अवैध कब्जे से जुड़ा है, इसलिए सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जबरन कब्जा और तोड़फोड़ की पुष्टि होती है, तो भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए जाएंगे।
एनआरआई संपत्तियों पर बढ़ते विवाद
पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में एनआरआई संपत्तियों पर कब्जे के मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को अपडेट रखना, स्थानीय प्रतिनिधि नियुक्त करना और समय-समय पर निरीक्षण कराना जरूरी है।
धर्मेंद्र और शैलेंद्र कश्यप ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि वे कानून पर भरोसा रखते हैं और उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
आगे की राह
फिलहाल यह मामला जांच के चरण में है। पुलिस ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है।
यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल एक संपत्ति विवाद रहेगा, बल्कि एनआरआई अधिकारों की सुरक्षा को लेकर भी अहम उदाहरण बन सकता है।
कुल मिलाकर, यह घटना बताती है कि संपत्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और कानूनी सतर्कता कितनी आवश्यक है। पुलिस जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। तब तक यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।



