हरियाणा

इलाज का झांसा, भरोसे से खिलवाड़: अंबाला में महिला से छेड़छाड़ का आरोप, आरोपी फरार

हरियाणा के अंबाला जिले से सामने आई एक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के समय में इलाज के नाम पर भी लोग सुरक्षित हैं। पंजोखरा थाना क्षेत्र के कलरेहड़ी गांव में एक विवाहिता महिला ने आरोप लगाया है कि साइटिका के इलाज के बहाने खुद को डॉक्टर बताने वाले एक व्यक्ति ने उसके साथ छेड़छाड़ की। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन आरोपी अभी तक गिरफ्त से बाहर है।

पीड़िता के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से साइटिका की समस्या से जूझ रही थी। लगातार दर्द और परेशानी के चलते वह इलाज की तलाश में थी। इसी दौरान उसे जानकारी मिली कि कलरेहड़ी गांव में एक व्यक्ति नसों के इलाज का काम करता है और कई लोगों को राहत भी मिली है। इसी भरोसे के साथ वह 15 अप्रैल को उस व्यक्ति के पास पहुंची, जिसे लोग “डॉक्टर मान” के नाम से जानते हैं।

महिला ने बताया कि शुरुआत में आरोपी ने सामान्य तरीके से जांच की और उसकी नसों को दबाकर इलाज करने का नाटक किया। इससे उसे लगा कि वह वास्तव में कोई चिकित्सक है। इसके बाद आरोपी ने उसे दवा देने के बहाने एक कमरे में जाने के लिए कहा। महिला को यह प्रक्रिया इलाज का हिस्सा लगी, इसलिए वह उसके साथ कमरे में चली गई।

लेकिन कमरे में पहुंचते ही स्थिति अचानक बदल गई। महिला का आरोप है कि आरोपी ने अनुचित हरकतें शुरू कर दीं और कथित तौर पर अपने कपड़े उतारने लगा। यह देखकर महिला घबरा गई और उसने तुरंत वहां से निकलने की कोशिश की। किसी तरह उसने खुद को बचाया और कमरे से बाहर निकलकर वहां से भागने में सफल रही।

घटना के बाद महिला मानसिक रूप से काफी आहत हो गई। उसने तुरंत अपने परिजनों को पूरी जानकारी दी, जिसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की तहरीर के आधार पर पंजोखरा थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। आरोपी की पहचान हो चुकी है, लेकिन वह फिलहाल फरार है। उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। थाना प्रभारी जय सिंह ने बताया कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जांच के तहत पुलिस पीड़िता को साथ लेकर आरोपी के घर भी गई, जहां घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की गई। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी साक्ष्य एकत्र किए जाएं, ताकि आरोपी के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया जा सके।

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहां लोग अक्सर बिना प्रमाणिक योग्यता वाले लोगों के पास इलाज के लिए चले जाते हैं। ऐसे तथाकथित “झोलाछाप डॉक्टर” न केवल लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हैं, बल्कि कई बार इस तरह के गंभीर अपराधों में भी शामिल पाए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को इलाज के लिए हमेशा प्रमाणित और पंजीकृत डॉक्टरों के पास ही जाना चाहिए। इसके अलावा, महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब किसी अनजान व्यक्ति के साथ अकेले किसी कमरे में जाना हो।

इस घटना ने महिला सुरक्षा के मुद्दे को भी फिर से उजागर किया है। समाज में इस तरह की घटनाएं महिलाओं के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। जरूरी है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई और इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

पीड़िता और उसका परिवार इस समय सदमे में है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल इलाज के लिए भरोसा किया था, लेकिन उन्हें इस तरह की घटना का सामना करना पड़ा। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए।

पुलिस की कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हालांकि एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी अब सबसे बड़ी प्राथमिकता है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।

यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि भरोसा और सुरक्षा आज के समय में कितने संवेदनशील मुद्दे बन चुके हैं। जहां एक ओर लोग अपनी सेहत के लिए दूसरों पर निर्भर होते हैं, वहीं कुछ लोग इस भरोसे का गलत फायदा उठाकर अपराध करते हैं।

आगे बढ़ते हुए प्रशासन को ऐसे फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाने की जरूरत है। उनकी पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाना जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और उम्मीद की जा रही है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन यह घटना एक सबक भी है—कि किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।

समाज, प्रशासन और नागरिकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। जागरूकता, सतर्कता और सख्त कानून—इन्हीं तीनों के सहारे ही हम एक सुरक्षित समाज की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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