
अलीगढ़: फर्जी आधार से डीएल बनवाने की कोशिश नाकाम, कश्मीरी युवक जेल भेजा; एजेंट फरार
अलीगढ़ में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अलीगढ़ के पते पर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने आरटीओ कार्यालय पहुंचे एक कश्मीरी युवक को दस्तावेजों में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जांच में सामने आया कि युवक के आधार कार्ड में स्थानीय एजेंट ने गलत तरीके से पता बदल दिया था। पूरी पड़ताल के बाद युवक को जेल भेज दिया गया है, जबकि फर्जीवाड़ा कराने वाला एजेंट अभी फरार है।

डीजी लॉकर जांच ने खोली साजिश
यह मामला शुक्रवार का है, जब जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के मट्टन थाना क्षेत्र के अकड़शील गांव का रहने वाला जुनैद वानी, अपने साथी फरहद नबी के साथ अलीगढ़ आरटीओ पहुंचा। जुनैद ने पहले से एजेंट के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया हुआ था और दस्तावेज सत्यापन के लिए उसे कार्यालय बुलाया गया था।
आरटीओ में तैनात कर्मचारी ने जब आधार कार्ड को डीजी लॉकर से सत्यापित किया, तो बड़ा अंतर सामने आया। कागजी आधार कार्ड में अलीगढ़ का पता दर्ज था, जबकि डिजिटल रिकॉर्ड में कश्मीर का स्थायी पता मौजूद था। इस विरोधाभास ने अधिकारियों को सतर्क कर दिया।
पुलिस और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई
मामले की सूचना मिलते ही बन्नादेवी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों युवकों को थाने ले जाया गया, जहां खुफिया एजेंसियों और एटीएस ने भी उनसे पूछताछ की। पूरी रात चली जांच के बाद फरहद नबी को छोड़ दिया गया, जबकि दस्तावेजों में छेड़छाड़ के आरोप में जुनैद वानी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
8 हजार रुपये में बदला गया पहचान का पता
पूछताछ में जुनैद ने बताया कि वह अपने साथी के साथ करीब तीन महीने से अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में शॉल बेचने का काम कर रहा था। इसी दौरान उसने जमालपुर क्षेत्र के एक एजेंट से संपर्क किया। आरोप है कि एजेंट ने आधार कार्ड में डिजिटल एडिटिंग कर अलीगढ़ का पता जोड़ दिया और पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाया। बाद में स्थायी डीएल के लिए उसे आरटीओ बुलाया गया। इस पूरे काम के बदले एजेंट ने आठ हजार रुपये लिए।
कश्मीर तक कराई गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने युवक की पृष्ठभूमि की तस्दीक कश्मीर से भी कराई। जहां वह अलीगढ़ में ठहरा था, वहां से भी उसके साथियों और गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई। जांच में यह साफ हुआ कि युवक ने केवल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए फर्जीवाड़ा किया था। किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं।
फर्जी दस्तावेजों पर प्रशासन सख्त
अधिकारियों के मुताबिक, आरटीओ में दस्तावेज सत्यापन के दौरान सतर्कता के कारण यह फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ में आ गया। फिलहाल पुलिस की टीमें स्थानीय एजेंट की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
अलीगढ़ में इससे पहले भी आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों में फर्जीवाड़े के कई मामले उजागर हो चुके हैं। कुछ समय पहले एसटीएफ ने जनसेवा केंद्र संचालकों को गिरफ्तार किया था, जो बाहरी लोगों के दस्तावेजों में हेरफेर कर रहे थे। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों पर अब और सख्ती की जाएगी।
सार:
डिजिटल सत्यापन प्रणाली की वजह से एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। हालांकि युवक को जेल भेज दिया गया है, लेकिन असली चुनौती ऐसे एजेंटों और गिरोहों पर शिकंजा कसने की है, जो पहचान से जुड़े दस्तावेजों से खिलवाड़ कर रहे हैं



