अंबेडकरनगर में झोलाछाप इलाज का घातक सच: बिना डिग्री ऑपरेशन से प्रसूता की मौत, अवैध अस्पताल पर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर बिना पंजीकरण और बिना योग्य डॉक्टरों के ऑपरेशन किए जा रहे थे। इसी लापरवाही का शिकार एक प्रसूता महिला बनी, जिसकी सर्जरी के बाद मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गए हैं और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

बताया गया है कि बसखारी क्षेत्र में संचालित नवजीवन हॉस्पिटल नामक संस्था बिना वैध अनुमति के चल रही थी। यहां चिकित्सा सुविधाओं का दावा तो किया जा रहा था, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि अस्पताल में न तो पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ था और न ही योग्य सर्जन।
मामले में सामने आया कि 32 वर्षीय योगेश, जो केवल स्नातक (बीए) पास है, और 19 वर्षीय इंटर का छात्र शुभम विश्वकर्मा ने मिलकर महिला प्रियंका का ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में योगेश ने बताया कि उसके पिता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वार्ड बॉय थे और उन्हीं के साथ रहते हुए उसने इलाज से जुड़े काम देखे थे। इसी अनुभव के आधार पर वह खुद को इलाज करने योग्य समझने लगा और धीरे-धीरे मरीजों पर हाथ आजमाने लगा।
जांच में यह भी सामने आया कि योगेश अलग-अलग छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होम में जाकर ऑपरेशन करने का दावा करता था। वहीं शुभम, जो अभी पढ़ाई कर रहा है, योगेश के संपर्क में रहकर उसके साथ सर्जरी में सहयोग करता था। यह खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी चौंक गया है कि किस तरह बिना डिग्री और बिना प्रशिक्षण के लोग मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे।
अस्पताल संचालिका रूबी, जिस पर बिना पंजीकरण अस्पताल चलाने का आरोप है, फिलहाल फरार बताई जा रही है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के लाइसेंस, डॉक्टरों की योग्यता और उपकरणों की वैधता की पूरी जांच की जा रही है।
घटना के बाद प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट और स्थानीय अधिकारियों की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी व्यक्ति की डिग्री या पंजीकरण संदिग्ध पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में चल रहे अवैध अस्पतालों की हकीकत उजागर कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोग ऐसे अस्पतालों का सहारा लेते हैं, जहां सस्ते इलाज का लालच देकर गंभीर जोखिम उठाया जाता है। अक्सर मरीजों को यह पता ही नहीं होता कि उनका इलाज करने वाला व्यक्ति प्रशिक्षित डॉक्टर है या नहीं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी सर्जरी के लिए न केवल प्रशिक्षित सर्जन बल्कि एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ, आपातकालीन उपकरण और स्वच्छ ऑपरेशन थिएटर जरूरी होते हैं। यदि इनमें से किसी भी तत्व की कमी हो, तो मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है।
इस मामले में भी आशंका जताई जा रही है कि ऑपरेशन के दौरान आवश्यक सावधानियां नहीं बरती गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच के बाद ही मौत का सटीक कारण स्पष्ट होगा, लेकिन प्रथम दृष्टया लापरवाही की आशंका से इंकार नहीं किया जा रहा।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई ऐसे निजी अस्पताल चल रहे हैं जिनकी नियमित जांच नहीं होती। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि अस्पताल में पहले भी इस तरह के ऑपरेशन किए गए थे या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अस्पताल में इलाज कराने से पहले डॉक्टर की योग्यता, पंजीकरण और अस्पताल की मान्यता की जानकारी जरूर लें। साथ ही संदेह होने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों का संकेत भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी मजबूत की जाए, नियमित निरीक्षण हो और लोगों में जागरूकता बढ़े, तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और फरार अस्पताल संचालिका की तलाश तेज कर दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं, जिससे क्षेत्र में अवैध चिकित्सा नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।



