
अंबाला में पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू, गांव-गांव पहुंच रहीं टीमें
अंबाला जिले में पशुधन को संक्रामक और खतरनाक बीमारियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से एक बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से चलाया जा रहा है, जिसके तहत जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पशुओं को मुफ्त टीके लगाए जा रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लंपी स्किन डिजीज, मुंह-खुर रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों के खतरे को कम करना है, जो पिछले कुछ समय में पशुपालकों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी रही हैं।

अभियान का शुभारंभ जिले के एक पशु चिकित्सा केंद्र से किया गया, जहां बड़ी संख्या में पशुपालक अपने पशुओं को लेकर पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान पशु चिकित्सकों और अधिकारियों ने पशुपालकों को टीकाकरण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव, खासकर बढ़ती गर्मी और नमी के कारण पशुओं में बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि पशुओं को संक्रमण से बचाया जा सके।
पशुपालन विभाग ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। जिले के विभिन्न इलाकों में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं। इसके साथ ही मोबाइल वैन की व्यवस्था भी की गई है, ताकि दूरदराज के इलाकों तक भी आसानी से पहुंचा जा सके। विभाग का लक्ष्य है कि इस अभियान के तहत अधिक से अधिक पशुओं को कवर किया जाए और किसी भी पशु को टीकाकरण से वंचित न रहने दिया जाए।
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के दौरान केवल टीकाकरण ही नहीं, बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य की जांच भी की जा रही है। अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं, तो मौके पर ही उसका उपचार शुरू किया जा रहा है या उसे नजदीकी पशु अस्पताल में भेजा जा रहा है। इस तरह यह अभियान पशुपालकों के लिए एक संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा के रूप में काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीमार पशु न केवल किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनते हैं, बल्कि इससे दूध उत्पादन पर भी सीधा असर पड़ता है। कई बार संक्रामक रोग तेजी से फैलते हैं, जिससे पूरे गांव या इलाके के पशु प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में टीकाकरण को सबसे कारगर और सुरक्षित उपाय माना जाता है, जो बीमारियों को फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पिछले वर्षों में लंपी स्किन डिजीज जैसी बीमारियों ने कई राज्यों में भारी तबाही मचाई थी। बड़ी संख्या में पशु इस बीमारी की चपेट में आए थे, जिससे पशुपालकों को आर्थिक रूप से काफी नुकसान उठाना पड़ा था। दूध उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे डेयरी व्यवसाय प्रभावित हुआ था। इन अनुभवों को ध्यान में रखते हुए सरकार और पशुपालन विभाग ने समय-समय पर ऐसे टीकाकरण अभियानों को चलाने का निर्णय लिया है।
अभियान के दौरान पशुपालकों को जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। विभाग की टीमें गांवों में जाकर लोगों को पशुओं की देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे रही हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि पशुओं के रहने के स्थान को साफ-सुथरा रखना, उन्हें संतुलित आहार देना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, अगर कोई पशु बीमार हो जाता है, तो उसे अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई पशुपालकों ने इसे एक सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि गांवों में अक्सर जानकारी और सुविधाओं की कमी के कारण पशुओं का समय पर इलाज नहीं हो पाता। ऐसे में जब विभाग की टीमें खुद गांवों तक पहुंचकर टीकाकरण और जांच कर रही हैं, तो इससे काफी राहत मिल रही है।
पशुपालन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे पशुओं को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और अपने सभी पशुओं को टीका जरूर लगवाएं। विशेष रूप से डेयरी व्यवसाय से जुड़े लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि उनके लिए पशुओं का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी होता है।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग लिया जा रहा है। गांवों में पहले से मुनादी करवाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग अपने पशुओं को टीकाकरण केंद्र तक ला सकें। कुछ क्षेत्रों में घर-घर जाकर भी पशुओं को टीके लगाए जा रहे हैं, जिससे अभियान की पहुंच और बढ़ाई जा सके।
इसके अलावा, जिले के कई पशु चिकित्सालयों में हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं, जहां पशुपालकों को आवश्यक जानकारी और सलाह दी जा रही है। अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे तेज बुखार, शरीर पर गांठें, मुंह से लार निकलना या खाना छोड़ देना, तो तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल से संपर्क करने की सलाह दी गई है। समय पर उपचार मिलने से बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह पशुओं पर निर्भर करती है। ऐसे में पशुओं का स्वस्थ रहना सीधे तौर पर किसानों की आय से जुड़ा होता है। सरकार भी इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है और यह टीकाकरण अभियान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे हर गांव तक पहुंचें और तय लक्ष्य को पूरा करें। इसके साथ ही अभियान की नियमित निगरानी भी की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी पशुओं को समय पर टीका लगाया जा रहा है।
पशुपालकों को उम्मीद है कि इस अभियान से पशुओं में फैलने वाली बीमारियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। वहीं विभाग का मानना है कि यदि सभी पशुओं का समय पर टीकाकरण हो जाए, तो भविष्य में किसी भी बड़े संक्रमण के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।
इस पहल के माध्यम से प्रशासन और पशुपालन विभाग ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पशुधन की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी मानव स्वास्थ्य की। समय पर जागरूकता और सही कदम उठाकर ही पशुओं को बीमारियों से बचाया जा सकता है और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया जा सकता है।



