
सोशल मीडिया पर ‘लड़की’ बनकर रचते थे जाल, कॉल पर बदल लेते थे आवाज—पांच शातिर ठग गिरफ्तार
फरीदाबाद में साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने यह साफ कर दिया है कि ठग अब लोगों को फंसाने के लिए कितने नए और खतरनाक तरीके अपना रहे हैं। यहां एक गिरोह सोशल मीडिया पर खुद को लड़की बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था और फिर उन्हें ब्लैकमेल कर पैसे वसूलता था। पुलिस ने इस संगठित सेक्सटॉर्शन रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब ओल्ड फरीदाबाद के एक निवासी ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे एक दिन अचानक एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उसके खिलाफ अश्लील चैट और धोखाधड़ी से जुड़ा केस दर्ज होने वाला है। इस बात से पीड़ित घबरा गया।
फोन करने वाले ने पीड़ित को यह भी कहा कि अगर वह इस मामले को शांत करना चाहता है तो उसे कुछ पैसे देने होंगे। डर और बदनामी के भय में आकर पीड़ित ने आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में करीब 45 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उसे महसूस हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो उसने पुलिस की मदद ली।
शिकायत मिलते ही साइबर थाना सेंट्रल की टीम हरकत में आई और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई। पुलिस ने तकनीकी माध्यमों और बैंकिंग डिटेल्स के जरिए आरोपियों का पता लगाने की कोशिश की। जांच के दौरान कई अहम सुराग मिले, जिनके आधार पर पुलिस टीम राजस्थान के जयपुर पहुंची।
8 मई को पुलिस ने जयपुर के जगतपुरा स्थित एक सोसाइटी में छापा मारा, जहां से पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान भगवान सिंह, देवा गुर्जर, बिजेंद्र, धीरज और मनीष के रूप में हुई है। ये सभी राजस्थान के करौली जिले के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस की पूछताछ में जो जानकारी सामने आई, वह काफी चौंकाने वाली थी। गिरोह का सरगना भगवान सिंह इस पूरे नेटवर्क को संचालित करता था। वह न केवल लोगों को फंसाने की रणनीति बनाता था, बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद लड़की की आवाज निकालकर पीड़ितों से बात भी करता था। उसकी आवाज इतनी विश्वसनीय होती थी कि सामने वाला व्यक्ति आसानी से उसके झांसे में आ जाता था।
गिरोह के सदस्य इंस्टाग्राम और टिंडर जैसे प्लेटफॉर्म पर नकली प्रोफाइल बनाते थे। इन प्रोफाइल्स में आकर्षक लड़कियों की तस्वीरें लगाई जाती थीं, ताकि लोग जल्दी आकर्षित हों। इसके बाद वे लोगों से दोस्ती करते और धीरे-धीरे बातचीत शुरू करते थे।
शुरुआत में सामान्य बातचीत होती थी, लेकिन कुछ समय बाद बातचीत को अश्लील दिशा में ले जाया जाता था। जैसे ही पीड़ित इसमें उलझता, उसे वीडियो कॉल या वॉयस कॉल के जरिए और ज्यादा फंसाया जाता था। इस दौरान आरोपी स्क्रीन रिकॉर्डिंग या अन्य तरीकों से सामग्री इकट्ठा कर लेते थे।
इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल। पीड़ित को धमकी दी जाती थी कि उसकी अश्लील चैट या वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा या उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी जाएगी। इस डर के कारण ज्यादातर लोग बिना विरोध किए पैसे दे देते थे।
इस गिरोह में हर सदस्य की एक खास भूमिका थी। देवा गुर्जर, बिजेंद्र और धीरज का काम था लोगों से चैटिंग करना और उन्हें फंसाना। वहीं मनीष बैंक खातों का इंतजाम करता था, जिनमें ठगी की रकम जमा करवाई जाती थी। इस तरह पूरा गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था।
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और अब तक कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है। फिलहाल पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल डाटा की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने कुल कितने लोगों को ठगा और कितनी रकम वसूली।
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। इस दौरान पुलिस उनसे गहन पूछताछ कर रही है और उम्मीद है कि इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
पुलिस प्रवक्ता ने इस मामले में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बातचीत करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। किसी भी व्यक्ति की पहचान पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए, खासकर तब जब वह आपसे निजी या संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए कहे।
इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो तुरंत उसकी सूचना संबंधित पुलिस थाने को देनी चाहिए। पुलिस कभी भी फोन पर इस तरह से पैसे की मांग नहीं करती।
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता कितनी जरूरी है। आज के समय में साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।
फरीदाबाद का यह मामला यह भी दिखाता है कि पुलिस अब साइबर अपराधों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रही है और ऐसे गिरोहों को पकड़ने में लगातार सफलता हासिल कर रही है। उम्मीद है कि इस कार्रवाई से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगेगा और लोग भी भविष्य में अधिक सतर्क रहेंगे।

