
शादी की रौशनी बुझी, तालाब में मिली मासूम की लाश: रात 10 बजे घर लौटा था शुएब, कपड़े बदले और फिर कभी वापस नहीं आया
नरखेड़ा गांव में रविवार रात शादी की रौनक थी। डीजे की तेज आवाज, रोशनियां और खुशियों के बीच किसी ने नहीं सोचा था कि यही रात एक परिवार के लिए जिंदगी भर का सबसे बड़ा सदमा बन जाएगी। कक्षा सात में पढ़ने वाला 14 वर्षीय शुएब, जो अपनों के साथ शादी समारोह में शामिल हुआ था, उसी रात बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। गला दबाकर हत्या करने के बाद उसका शव गांव के तालाब में फेंक दिया गया।

सोमवार सुबह जब तालाब में उसका शव उतराता मिला, तो पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। जिस बच्चे को लोग रात भर ढूंढते रहे, वह मौत की नींद सो चुका था।
खुशियों भरी शाम, अनहोनी की शुरुआत
शुएब के पिता मुस्तकीम खेती-किसानी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। रविवार को गांव में एक वैवाहिक कार्यक्रम था, जिसमें पूरा परिवार शामिल हुआ। शुएब भी अपने माता-पिता और रिश्तेदारों के साथ वहां गया था। वह खुश था, डीजे पर नाच रहा था, दोस्तों के साथ हंसी-मजाक कर रहा था।
रात करीब 10 बजे शुएब घर लौटा। उसके कपड़ों पर खाना गिर गया था। उसने मां से कहा कि वह कपड़े बदलकर थोड़ी देर के लिए फिर शादी में जाएगा और जल्द लौट आएगा। मां ने उसे जाने दिया। यही आखिरी बार था, जब शुएब जिंदा घर से बाहर निकला।
देर रात बढ़ती बेचैनी
घंटे बीतते गए, लेकिन शुएब वापस नहीं आया। रात करीब डेढ़ बजे मां की नींद खुली। बेटे को न देखकर उसका दिल बैठ गया। घरवालों ने उसे ढूंढना शुरू किया। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और शादी वाले घर तक पूछताछ की गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
रात दो बजे गांव की मस्जिद में एलान कराया गया कि शुएब लापता है। लोग टॉर्च और मोबाइल की रोशनी लेकर गांव की गलियों, खेतों और रास्तों पर तलाश करते रहे, लेकिन अंधेरी रात ने कोई जवाब नहीं दिया।
सुबह तालाब ने उगला सच
सोमवार सुबह कुछ किशोर तालाब की ओर गए। वहां आम के पेड़ के नीचे पड़ी चप्पलों ने उनका ध्यान खींचा। जैसे ही वे पास पहुंचे, उनकी सांसें थम गईं। तालाब में एक किशोर का आधा शरीर पानी में उतराता दिख रहा था, जबकि पैर बाहर की ओर थे।
शोर मचाया गया। देखते ही देखते ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। शव को बाहर निकाला गया तो पहचान शुएब के रूप में हुई। खबर मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और चीख-पुकार मच गई। मां बेटे की लाश से लिपटकर बेसुध हो गई।
गले पर निशान, हत्या की आशंका
शव देखते ही परिजनों ने गले और गर्दन पर चोट के निशान दिखाए और हत्या का आरोप लगाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने हालात संभालने की कोशिश की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
देर शाम आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस आशंका को सच में बदल दिया। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि शुएब की मौत गला दबाने से हुई है। यानी उसकी हत्या की गई और सबूत छिपाने के लिए शव तालाब में फेंका गया।
पुलिस जांच, हर एंगल खंगालने का दावा
एएसपी अनुराग सिंह ने बताया कि मामला गंभीर है और पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। शादी समारोह में मौजूद लोगों, आसपास के ग्रामीणों और देर रात गांव में दिखे संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है।
शहजादनगर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश की आशंका सामने आ रही है। हालांकि अभी परिजनों की ओर से लिखित तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलते ही मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मां का टूटता हुआ दिल
शुएब की मां का दर्द गांव वालों की आंखें नम कर रहा है। वह बार-बार यही कह रही है—
“अगर उस रात उसे वापस जाने से रोक देती, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता।”
मां को यह गिल्ट जिंदगी भर कचोटता रहेगा कि वह बेटे को रोक नहीं सकी। तीन बेटों में सबसे छोटा शुएब घर का दुलारा था। उसकी मौत ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़ दिया है।
गांव में डर और गुस्सा
इस घटना के बाद नरखेड़ा गांव में मातम पसरा है। लोग डरे हुए भी हैं और नाराज भी। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक नाबालिग बच्चे की इतनी बेरहमी से हत्या कैसे हो गई। शादी जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम से लौटते वक्त भी अगर बच्चा सुरक्षित नहीं है, तो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करे और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस जांच जारी है। कॉल डिटेल, आसपास के रास्तों और तालाब के इलाके की गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जल्द ही इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया जाएगा।
लेकिन तब तक एक मां की गोद सूनी है, एक घर का चिराग बुझ चुका है और एक गांव सवालों के साए में जी रहा है।



