
ऑपरेशन टेबल पर जागता रहा मरीज, मां की किडनी से मिली नई जिंदगी
नई दिल्ली। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में एक ऐसा ऑपरेशन हुआ जिसने चिकित्सा जगत के साथ-साथ मानवता की भावना को भी नई ऊंचाई दी। यहां पहली बार अवेक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें मरीज सर्जरी के दौरान पूरी तरह होश में रहा। ऑपरेशन थिएटर में वह डॉक्टरों से बात करता रहा और बार-बार अपनी मां का हाल पूछता रहा — वही मां जिसने अपनी किडनी दान कर बेटे को जीवनदान दिया।

डॉ. अभियुत्थान सिंह ने बताया कि इस सर्जरी में पारंपरिक जनरल एनेस्थीसिया का प्रयोग नहीं किया गया। इसके बजाय एपिड्यूरल एनेस्थीसिया दिया गया, जिससे मरीज के शरीर का निचला हिस्सा सुन्न कर दिया गया, लेकिन चेतना बरकरार रही। इस प्रक्रिया में रीढ़ की हड्डी के पास पतली ट्यूब के माध्यम से दवा दी जाती है। एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. गौरव सिंधवानी और उनकी टीम ने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
मां से किडनी निकालने में लगभग ढाई घंटे का समय लगा। इसके बाद करीब तीन घंटे तक प्रत्यारोपण की प्रक्रिया चली। ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति स्थिर रही। डॉक्टरों के अनुसार, यह तकनीक उन मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जिन्हें जनरल एनेस्थीसिया से जोखिम हो सकता है।
सबसे उल्लेखनीय क्षण तब आया जब सर्जरी के बीच मरीज ने अपनी मां की स्थिति के बारे में पूछा। डॉक्टरों ने उसे आश्वस्त किया कि उसकी मां सुरक्षित है। ट्रांसप्लांट के बाद किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया। मरीज ने स्वयं बताया कि उसे यूरिन आ रहा है — जो एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। अगले दिन से उसने सामान्य आहार लेना और चलना-फिरना शुरू कर दिया।
चिकित्सकों का कहना है कि अवेक ट्रांसप्लांट से ऑपरेशन के बाद की जटिलताएं कम होती हैं और मरीज की रिकवरी तेज होती है। यह तकनीक भारत में धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है और आईएलबीएस की यह सफलता भविष्य में अन्य संस्थानों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकती है।
इसी बीच, एम्स ने भी स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल के सर्जिकल विभाग ने एक वर्ष में दस हजार सर्जरी पूरी करने का रिकॉर्ड बनाया है। इसमें पारंपरिक ओपन सर्जरी से लेकर आधुनिक लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी तक शामिल हैं। इससे पहले एम्स 13 महीनों में एक हजार रोबोटिक सर्जरी का आंकड़ा पार कर चुका है।
ये उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि भारत का चिकित्सा क्षेत्र तेजी से आधुनिक तकनीक और नवाचार की ओर बढ़ रहा है। आईएलबीएस और एम्स जैसी संस्थाओं की पहल न केवल मरीजों को बेहतर उपचार दे रही है, बल्कि देश को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर मजबूत पहचान भी दिला रही है।



