
मेरठ महिला अस्पताल में कूड़े से मिली नवजात बच्ची की लाश, CCTV खंगाल रही पुलिस
मेरठ के जिला महिला चिकित्सालय परिसर में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब अस्पताल के रैन बसेरे के पास रखे कूड़ेदान में एक नवजात बच्ची का शव मिला। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

बताया गया कि सुबह करीब 7 बजे रैन बसेरे में ठहरी एक महिला कूड़ा डालने के लिए बाहर आई। जैसे ही उसने कूड़ेदान का ढक्कन उठाया, अंदर नवजात बच्ची का शव पड़ा देख वह सन्न रह गई। उसने तुरंत आसपास मौजूद लोगों को बुलाया। कुछ ही देर में वहां भीड़ इकट्ठा हो गई और अस्पताल प्रशासन को सूचना दी गई।
देहली गेट थाना पुलिस को खबर दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया आशंका है कि बच्ची का शव रात के अंधेरे में कूड़े में फेंका गया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बच्ची का जन्म अस्पताल में हुआ था या कहीं और।
पुलिस ने अस्पताल प्रशासन से बीती रात हुई सभी डिलीवरी का रिकॉर्ड मांगा है। यह भी जांच की जा रही है कि किसी नवजात को लेकर कोई संदिग्ध गतिविधि तो नहीं हुई। अस्पताल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्ची को वहां कौन और किस समय छोड़कर गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात के खिलाफ भ्रूण हत्या सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ होगा कि बच्ची जीवित पैदा हुई थी या पहले से मृत थी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
घटना ने एक बार फिर अस्पताल परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटना होना चिंताजनक माना जा रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि वे जांच में पुलिस को पूरा सहयोग दे रहे हैं।
मेरठ में इससे पहले भी कई बार नवजात बच्चों के शव मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
नवंबर 2025 में न्यू शिवलोक कॉलोनी में नवजात का शव बरामद हुआ था।
सितंबर 2025 में सिविल लाइन क्षेत्र के मेघदूत पुलिया के पास कचरे में बच्ची का शव मिला था।
नवंबर 2024 में शिव शक्ति नगर में एक नवजात जीवित हालत में मिला था, जिसे लोगों ने समय रहते बचा लिया।
मई 2024 में लिसाड़ी गेट इलाके के नाले में नवजात का शव पाया गया था।
अप्रैल 2023 में जिला अस्पताल के टॉयलेट में मृत नवजात मिला था।
2022 में भी शहर के अलग-अलग इलाकों से नवजात और भ्रूण मिलने की घटनाएं सामने आई थीं।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने सामाजिक सोच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अवांछित गर्भ, सामाजिक दबाव, आर्थिक परेशानियां या बेटियों के प्रति नकारात्मक मानसिकता जैसी वजहें ऐसी घटनाओं के पीछे हो सकती हैं। हालांकि हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन नवजात को कूड़े में फेंकना मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य है।
समाजसेवी संस्थाओं का कहना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने, परामर्श सेवाओं को मजबूत करने और सुरक्षित गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने की जरूरत है। कई स्थानों पर ‘पालना गृह’ या सुरक्षित स्थान की व्यवस्था होती है, जहां अनचाहे शिशु को सुरक्षित रूप से छोड़ा जा सकता है, ताकि उसकी जान बच सके।
फिलहाल पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। अस्पताल में भर्ती महिलाओं, स्टाफ और आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर सुराग तलाशे जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए गंभीर चेतावनी है कि संवेदनशीलता और जागरूकता की कितनी आवश्यकता है। एक मासूम की जिंदगी इस तरह खत्म होना हर किसी को सोचने पर मजबूर करता है।



