
भारत बना एआई महाशक्ति: अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा एंटरप्राइज यूज़र, लेकिन सुरक्षा पर बढ़े सवाल
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। एंटरप्राइज एआई और मशीन लर्निंग (एमएल) अपनाने के मामले में भारत अब अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। क्लाउड सुरक्षा कंपनी जेडस्केलर की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 के बीच भारतीय कंपनियों ने 82.3 अरब एआई/एमएल लेनदेन दर्ज किए। यह आंकड़ा एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कुल एआई गतिविधियों का 46.2 प्रतिशत है, जो भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाता है।

रिपोर्ट बताती है कि यह तेजी सरकार की डिजिटल नीतियों, क्लाउड-फर्स्ट रणनीति और एआई कौशल विकास में निवेश का परिणाम है। बड़े उद्यमों के साथ-साथ मध्यम और स्टार्टअप कंपनियां भी एआई को अपने संचालन, ग्राहक सेवा और डेटा विश्लेषण में शामिल कर रही हैं।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रौद्योगिकी और संचार सेक्टर 31.3 अरब लेनदेन के साथ शीर्ष पर हैं। विनिर्माण (15.7 अरब), सेवा क्षेत्र (12.6 अरब) और वित्त-बीमा (12.2 अरब) भी तेजी से एआई को अपना रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट सुरक्षा जोखिमों को लेकर चेतावनी भी देती है। कई संगठनों के पास अपने सक्रिय एआई मॉडलों और संवेदनशील डेटा के उपयोग का स्पष्ट आकलन नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि नवाचार की इस दौड़ में साइबर सुरक्षा और डेटा गवर्नेंस को समान प्राथमिकता देना जरूरी है।
दिल्ली में होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 से पहले आई यह रिपोर्ट संकेत देती है कि भारत वैश्विक एआई परिदृश्य में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुका है, लेकिन स्थायी प्रगति के लिए सुरक्षित और जिम्मेदार एआई ढांचा विकसित करना अनिवार्य होगा।
