
पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह और बेटे रणिंदर को ईडी का नोटिस, फेमा उल्लंघन मामले में पूछताछ
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके पुत्र रणिंदर सिंह एक बार फिर जांच एजेंसियों के दायरे में आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) से जुड़े एक प्रकरण में दोनों को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। एजेंसी ने अमरिंदर सिंह को जालंधर स्थित अपने कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है, जबकि उनके बेटे को अगले दिन उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह मामला विदेशी बैंक खातों और संपत्तियों से संबंधित है। जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ विदेशी परिसंपत्तियों में अमरिंदर सिंह और उनके पुत्र लाभार्थी के रूप में जुड़े हो सकते हैं। इनमें स्विट्जरलैंड के एक बैंक खाते का जिक्र किया जा रहा है। इसके साथ ही दुबई में कथित संपत्ति और कुछ विदेशी कंपनियों के माध्यम से निवेश के पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2011 से जुड़ी है, जब फ्रांस सरकार की ओर से भारत को कुछ सूचनाएं साझा की गई थीं। इन सूचनाओं में कथित रूप से विदेशी कंपनियों के जरिए संचालित बैंक खातों और संपत्तियों का उल्लेख था। इसी आधार पर भारतीय एजेंसियों ने जांच की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में आयकर विभाग ने वर्ष 2016 में लुधियाना की एक अदालत में इस मामले से संबंधित अभियोजन शिकायत दर्ज की थी।
मामला आगे चलकर अदालतों तक पहुंचा। सितंबर 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें अमरिंदर सिंह और रणिंदर सिंह ने आयकर विभाग की ओर से दाखिल आरोप पत्र से जुड़े दस्तावेजों के निरीक्षण पर रोक लगाने की मांग की थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद जांच एजेंसियों को अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का रास्ता साफ मिला।
अब ईडी ने फेमा के तहत पूछताछ के लिए समन जारी किया है। फेमा कानून विदेशी मुद्रा लेन-देन, विदेशों में संपत्ति खरीदने और विदेशी निवेश से जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है। यदि किसी व्यक्ति पर नियमों के उल्लंघन का आरोप साबित होता है, तो उसके खिलाफ आर्थिक दंड सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस बीच जानकारी सामने आई है कि अमरिंदर सिंह हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से मोहाली के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए हैं। ऐसे में संभव है कि उनकी पेशी की तारीख में बदलाव किया जाए। हालांकि इस संबंध में एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रणिंदर सिंह को जारी समन के अनुसार निर्धारित तिथि पर उपस्थित होना होगा।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर इसे कानून के तहत सामान्य जांच प्रक्रिया बताया जा रहा है, वहीं समर्थकों का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। फिलहाल ईडी ने यह स्पष्ट किया है कि कार्रवाई पूर्व में उपलब्ध सूचनाओं और दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि फेमा मामलों में जांच आमतौर पर दस्तावेजी साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं पर आधारित होती है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति से स्पष्टीकरण लिया जाता है और उसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
अब यह देखना अहम होगा कि पूछताछ के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री और उनके पुत्र को ईडी के समन ने एक बार फिर इस पुराने मामले को सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।


