
‘प्रैंक’ के नाम पर अपहरण का ड्रामा, मां से मांगी फिरौती
कानपुर के गुजैनी इलाके में बुधवार शाम एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने कुछ समय के लिए एक परिवार की दुनिया हिला दी। 10 साल के बच्चे ने अपनी मां को फोन कर कहा कि उसका अपहरण हो गया है और उसे छुड़ाने के लिए दो लाख रुपये की व्यवस्था करनी होगी। बेटे की कांपती आवाज सुनकर मां सन्न रह गईं। परिवार में चीख-पुकार मच गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। हालांकि कुछ देर बाद पता चला कि यह पूरी घटना एक कथित ‘प्रैंक’ थी, जिसे दो किशोर अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बर्रा आठ निवासी अमित शुक्ला एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उनके परिवार में पत्नी निधि, बड़ा बेटा हर्षल (10) और छोटा बेटा यशू है। हर्षल मेहरबान सिंह का पुरवा स्थित एक स्कूल में कक्षा चार का छात्र है। बुधवार शाम करीब साढ़े सात बजे वह घर से पास की सब्जी मंडी में सब्जी लेने गया था। सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद एक फोन कॉल ने परिवार की नींद उड़ा दी।
करीब 7:55 बजे निधि के मोबाइल पर बेटे का कॉल आया। घबराई आवाज में हर्षल ने कहा कि दो लोग उसे पकड़कर ले गए हैं और उसे छोड़ने के लिए दो लाख रुपये चाहिए। उसने यह भी कहा कि रविवार तक पैसे का इंतजाम कर लिया जाए। कॉल अचानक कट गया। निधि की हालत बिगड़ गई। उन्होंने तुरंत पति को फोन किया। कुछ ही देर में पूरा परिवार बच्चे की तलाश में जुट गया और पुलिस के पास पहुंचा।
बच्चे ने बाद में बताया कि रास्ते में 14-15 साल के दो लड़कों ने उसे बातचीत में उलझाया और बहाने से केडीएमए स्कूल के पास सुनसान जगह पर ले गए। वहां उन्होंने उसे एक मोबाइल फोन थमाया और मां को कॉल करने को कहा। उन्हीं के कहने पर उसने अपहरण और फिरौती की बात कही। बच्चा खुद भी डरा हुआ था और समझ नहीं पा रहा था कि वह किस मुसीबत में फंस गया है।
इधर परिवार पुलिस के साथ संभावित स्थानों पर तलाश में जुटा था। मां बार-बार बेटे की आवाज को याद कर सिहर उठ रही थीं। हर मिनट बेचैनी बढ़ रही थी। तभी करीब 25 मिनट बाद एक नए नंबर से दोबारा कॉल आया। इस बार कॉल करने वालों ने कहा कि किदवईनगर स्थित एक स्कूल के पास रविवार को पांच हजार रुपये लेकर पहुंचना। लेकिन कुछ ही देर में उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया कि यह सब मजाक था। उन्होंने खुद को यू-ट्यूबर बताते हुए कहा कि वे ‘प्रैंक वीडियो’ बना रहे थे।
यह सुनकर परिवार को राहत जरूर मिली कि बच्चा सुरक्षित है, लेकिन गुस्सा और चिंता भी उतनी ही गहरी थी। अमित शुक्ला ने कहा कि ऐसे मजाक किसी परिवार के लिए जानलेवा तनाव बन सकते हैं। एक मां के लिए यह सुनना कि उसका बेटा अगवा हो गया है, किसी बुरे सपने से कम नहीं।
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध किशोरों की पहचान की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने की तैयारी तो नहीं थी।
सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने की होड़ में कुछ युवा सीमा लांघते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘प्रैंक’ के नाम पर किसी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना या झूठा अपराध रचना कानूनन गंभीर मामला है। अपहरण का झूठा नाटक कर फिरौती मांगना भले बाद में मजाक बताया जाए, लेकिन यह अपराध की श्रेणी में आता है।
इस घटना ने अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। बच्चों को अजनबियों से सावधान रहने और किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत मदद मांगने की सीख देना जरूरी हो गया है। साथ ही किशोरों को यह समझाना भी उतना ही जरूरी है कि सोशल मीडिया की चकाचौंध के लिए कानून और संवेदनशीलता से खिलवाड़ करना भारी पड़ सकता है।
फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। परिवार अपने बेटे की सुरक्षित वापसी से राहत महसूस कर रहा है, लेकिन यह ‘मजाक’ उनके लिए लंबे समय तक एक डरावनी याद बनकर रहेगा।



