
खूंखार आवारा कुत्ते का कहर: 3 साल की मासूम पर हमला, सिर-चेहरा नोचा; 35 टांके, जिंदगी की जंग जारी
पंजाब के लुधियाना में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि अब मासूम बच्चों की जान तक खतरे में पड़ गई है। गोविंदगढ़ जुगियाना इलाके में घर के बाहर खेल रही तीन साल की बच्ची चांदनी पर एक आवारा कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले की बर्बरता इतनी भयावह थी कि बच्ची के सिर और चेहरे से मांस तक अलग हो गया और पूरा इलाका दहशत में आ गया।

घटना रविवार की बताई जा रही है। चांदनी अन्य बच्चों के साथ गली में खेल रही थी। तभी अचानक एक आक्रामक कुत्ता वहां पहुंचा और बिना किसी उकसावे के बच्ची पर टूट पड़ा। देखते ही देखते उसने बच्ची को जमीन पर गिरा दिया और सिर, चेहरे और बालों को नोचने लगा। बच्ची की दर्दनाक चीखें पूरे इलाके में गूंज उठीं। आसपास मौजूद लोगों ने जब शोर सुना तो दौड़कर पहुंचे और कुत्ते को किसी तरह भगाया, लेकिन तब तक मासूम बुरी तरह घायल हो चुकी थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बच्ची खून से लथपथ हालत में जमीन पर पड़ी थी और उसके सिर के बाल तक उखड़ चुके थे। लोगों ने तुरंत परिजनों को बुलाया और बच्ची को अस्पताल पहुंचाया। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम जैसा माहौल बन गया। हर कोई इस दर्दनाक मंजर को देखकर सिहर उठा।
बच्ची के पिता चंदन ने बताया कि वह काम पर गए हुए थे, तभी उनकी पत्नी का घबराया हुआ फोन आया। पत्नी रोते हुए बस इतना कह पाई कि “जल्दी आओ, चांदनी को कुत्ते ने काट लिया।” यह सुनते ही चंदन के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह तुरंत घर पहुंचे और बच्ची को अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी। हमले के दौरान कुत्ते ने सिर और चेहरे पर इतने गहरे घाव कर दिए थे कि कई जगहों से मांस लटक रहा था। मेडिकल टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्ची को स्थिर करना और खून बहना रोकना था। डॉक्टरों ने कई घंटों की मेहनत के बाद बच्ची के सिर और चेहरे पर करीब 35 टांके लगाए। फिलहाल बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है और वह सदमे में है।
डॉक्टरों का कहना है कि शारीरिक घाव भरने में समय लगेगा, लेकिन मानसिक आघात ज्यादा गंभीर हो सकता है। इतनी कम उम्र में इस तरह की घटना बच्चे के मन पर गहरा असर छोड़ सकती है। इसलिए बच्ची को मेडिकल इलाज के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता की भी जरूरत होगी।
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि अगर समय रहते आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता, तो आज मासूम बच्ची इस हालत में नहीं होती। लोगों ने मांग की है कि इलाके में घूम रहे सभी खतरनाक कुत्तों को तुरंत पकड़ा जाए और उन्हें शहर के शेल्टर होम में भेजा जाए।
इलाके की महिलाओं का कहना है कि अब वे अपने बच्चों को बाहर खेलने भेजने से डरती हैं। बच्चों के बाहर निकलते ही हर पल डर बना रहता है कि कहीं कोई कुत्ता हमला न कर दे। यह घटना उनके डर को और गहरा कर गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में तेजी से बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या अब सार्वजनिक सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। यदि समय रहते नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण अभियान नहीं चलाए गए, तो ऐसे हमले बढ़ सकते हैं। प्रशासन को तुरंत सर्वे कर खतरनाक कुत्तों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजना चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शहरों में आवारा पशुओं की जिम्मेदारी किसकी है। जब तक नगर निगम, प्रशासन और समाज मिलकर समाधान नहीं निकालेंगे, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।
फिलहाल मासूम चांदनी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। परिवार दहशत में है और हर कोई उसकी सलामती की दुआ कर रहा है। पूरे इलाके की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस दर्दनाक घटना के बाद शायद सिस्टम जागे और भविष्य में किसी और बच्चे को इस तरह की दरिंदगी का सामना न करना पड़े।


