
कानपुर किडनी कांड: फरार आरोपितों की तलाश तेज, इनामी अली और डॉ. अफजाल के नेटवर्क पर पुलिस की सख्त निगरानी
कानपुर में उजागर हुए किडनी रैकेट मामले ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। अवैध रूप से किडनी की खरीद-फरोख्त और ट्रांसप्लांट करने वाले इस संगठित गिरोह के तार अब कई शहरों तक फैलते नजर आ रहे हैं। पुलिस इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपितों के करीबियों पर शिकंजा कस रही है और उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

इस मामले में 25 हजार रुपये के इनामी ओटी मैनेजर मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ अली और डॉक्टर अफजाल अहमद अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। हालांकि, उनके ठिकानों और संपर्कों को लेकर पुलिस ने घेरा और मजबूत कर लिया है। दोनों के करीबी लोगों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर डाल दिए गए हैं, ताकि उनकी हर बातचीत और लोकेशन पर नजर रखी जा सके।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस को शक है कि ये फरार आरोपित जल्द ही अपने परिचितों से संपर्क करेंगे। ऐसे में पुलिस उनके कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रैक कर उन्हें दबोचने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं, अली के पकड़े जाने की चर्चा भी सामने आई है, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के संचालन में कई लोग अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल थे। खास तौर पर हरदोई निवासी शिवम यादव का नाम सामने आया है, जो गिरोह के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट का काम करता था। वह आरोपितों के लिए गाड़ियों की व्यवस्था करता था और जरूरत पड़ने पर फ्लाइट टिकट भी बुक कराता था। इससे गिरोह के सदस्य बिना किसी संदेह के एक शहर से दूसरे शहर तक आवाजाही कर पाते थे।
अब तक पुलिस इस मामले में गिरोह के सरगना रोहित तिवारी, डॉक्टर दंपती और अन्य आरोपितों सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इसके अलावा आठ और आरोपितों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से कुछ लखनऊ के बताए जा रहे हैं। पुलिस लगातार इनकी तलाश में दबिश दे रही है।
इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड रोहित तिवारी को माना जा रहा है, जो मूल रूप से हरदोई जिले के बिलग्राम का रहने वाला है और वर्तमान में गाजियाबाद में रह रहा था। हैरानी की बात यह है कि वह केवल 12वीं पास है, लेकिन उसने इतने बड़े स्तर पर इस अवैध नेटवर्क को खड़ा कर दिया। पुलिस की पूछताछ में उससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिससे इस गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा हुआ है।
बताया जा रहा है कि यह गिरोह जरूरतमंद और गरीब लोगों को लालच देकर उनसे किडनी खरीदता था और फिर उसे मोटी रकम में जरूरतमंद मरीजों को बेच देता था। इस प्रक्रिया में कई बार नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया और अवैध तरीके से ट्रांसप्लांट किए गए।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस गिरोह का नेटवर्क कानपुर से बाहर भी फैला हुआ था। दिल्ली और नोएडा के कुछ बड़े अस्पतालों से इसके कनेक्शन होने की आशंका जताई जा रही है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा क्षेत्र में भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि, इस दिशा में पुलिस अभी खुलकर कुछ नहीं कह रही है और जांच को सीमित दायरे में आगे बढ़ा रही है।
पुलिस ने अली और डॉ. अफजाल के परिवार वालों और करीबी लोगों से पूछताछ की है। उनके फोन नंबरों को निगरानी में रखा गया है और उनसे जुड़े हर संपर्क की जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इनकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे रैकेट से जुड़े कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने कहा है कि फरार आरोपितों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस इस मामले में हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस कांड से जुड़े कई चौंकाने वाले मामले भी सामने आए हैं। नवंबर 2023 में एक महिला का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। उसे दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां भी प्रक्रिया में कई अनियमितताएं सामने आईं। इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई थी।
इसी तरह नेपाल के एक व्यक्ति का भी किडनी ट्रांसप्लांट इस गिरोह द्वारा किया गया था। बाद में उसकी भी मौत हो गई। जांच में सामने आया कि उसे कोलकाता के एक व्यक्ति ने किडनी दी थी। पुलिस ने उस व्यक्ति के परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उससे जुड़ा फोन बंद मिला।
हाल ही में एक और मामला सामने आया, जिसमें मुजफ्फरनगर की रहने वाली पारुल का केशवपुरम स्थित एक अस्पताल में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। जांच में पता चला कि पारुल को बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष ने किडनी बेची थी। यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी।
कानपुर का यह किडनी रैकेट मामला अब एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का रूप लेता जा रहा है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान फरार आरोपितों की गिरफ्तारी पर है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपितों को पकड़ लिया जाएगा और इस पूरे रैकेट का पूरी तरह पर्दाफाश किया जाएगा।



