
एनसीआर में 250 कारें उड़ाने वाला गिरोह बेनकाब, सरगना समेत दो गिरफ्तार
मोदीनगर में पुलिस ने एक बड़े वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच और मोदीनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एनसीआर में सक्रिय उस गैंग का खुलासा हुआ है, जो पिछले एक दशक में करीब 250 कारों पर हाथ साफ कर चुका था। गिरफ्तार आरोपितों के कब्जे से चोरी की कई गाड़ियां, फर्जी नंबर प्लेटें, रिमोट चाबियां, ईसीएम और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है।

संयुक्त कार्रवाई में मिली बड़ी सफलता
एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा के अनुसार, रविवार को चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस टीम ने गिरोह के सरगना हरेंद्र उर्फ हन्नी गुर्जर और उसके साथी अमित चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों शातिर अपराधी लंबे समय से एनसीआर में वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे।
हरेंद्र मूल रूप से मेरठ जिले के रोहटा थाना क्षेत्र के गांव किनोनी का निवासी है, जबकि वर्तमान में वह दिल्ली के खजूरी खास इलाके में रह रहा था। अमित चौधरी मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र की ड्रीम सिटी का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, हरेंद्र पर दिल्ली, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मेरठ और हापुड़ में कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं, जो उसके आपराधिक इतिहास को दर्शाते हैं।
गिरोह में 12 सदस्य, चार राज्यों में नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गैंग में कुल 12 सदस्य सक्रिय थे। सभी के बीच काम का स्पष्ट बंटवारा था—कोई रेकी करता था, कोई कार चोरी करता था, तो कोई नंबर प्लेट और ईसीएम बदलता था, जबकि कुछ सदस्य चोरी की गाड़ियों की डिलीवरी और बिक्री संभालते थे।
गिरोह ने पिछले दस वर्षों में करीब 250 कारें चोरी कर राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में औने-पौने दामों में बेच दीं। हाल ही में मोदीनगर से चोरी हुई स्कॉर्पियो एन भी आरोपितों ने राजस्थान में बेच दी थी, हालांकि वह वाहन अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लग सका है।
बरामद हुई चोरी की गाड़ियां और उपकरण
गिरफ्तार आरोपितों के पास से पुलिस ने स्कॉर्पियो एन, आई-20 और ब्रेजा कार बरामद की है। जांच में पता चला कि बरामद ब्रेजा कार भी चोरी की ही है, जिसका इस्तेमाल गिरोह रेकी के लिए करता था। इसके अलावा पांच फर्जी नंबर प्लेट, रिमोट चाबी, ईसीएम और कई अन्य उपकरण भी बरामद किए गए हैं, जिनकी मदद से गिरोह मिनटों में कार का सिस्टम बदल देता था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपितों से बरामद ईसीएम एक थार कार का भी है, जिसे दिल्ली के मयूर विहार इलाके से चोरी किया गया था।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
गाजियाबाद स्वाट टीम के प्रभारी अनिल राजपूत ने बताया कि गिरोह बेहद शातिर तरीके से कार चोरी करता था। सबसे पहले सदस्य ब्रेजा कार से इलाके की रेकी करते थे और टारगेट वाहन को चिन्हित करते थे।
इसके बाद आरोपी कार का शीशा तोड़कर बोनट खोलते और तुरंत ईसीएम तथा लॉक बदल देते थे। इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगता था। कुछ ही मिनटों में वे कार को अपने कंट्रोल में लेकर मौके से फरार हो जाते थे। चोरी के बाद गाड़ियों के नंबर प्लेट और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बदल दिए जाते थे, जिससे वाहन को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था।
सस्ती कीमत में होती थी डील
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि इन दिनों बाजार में फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो की मांग काफी ज्यादा है। इसी वजह से उनका फोकस इन गाड़ियों की चोरी पर रहता था। गिरोह चोरी की फॉर्च्यूनर को करीब चार लाख रुपये में और स्कॉर्पियो को लगभग तीन लाख रुपये में बेच देता था। इसके बाद पूरी रकम गैंग के सदस्यों में बांट ली जाती थी।
पुलिस का मानना है कि कम कीमत होने के कारण चोरी की गाड़ियां आसानी से दूसरे राज्यों में खप जाती थीं और खरीदार भी ज्यादा सवाल नहीं करते थे।
हर सदस्य की तय थी जिम्मेदारी
गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम करता था। अमित चौधरी का मुख्य काम चोरी की कारों की डिलीवरी कराना था। पुलिस के अनुसार, उसने पिछले पांच वर्षों में करीब 50 कारों की डिलीवरी कराई है। जिन वाहनों की वह डिलीवरी करता था, उनमें पहले से ईसीएम और नंबर प्लेट बदले जा चुके होते थे।
इस तरह गैंग का पूरा नेटवर्क एक चेन की तरह काम करता था, जिससे पुलिस के लिए लंबे समय तक उन्हें पकड़ना चुनौती बना रहा।
सोतीगंज से सीखी थी ‘मास्टरी’
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गैंग का सरगना हरेंद्र उर्फ हन्नी 2014 से वाहन चोरी में सक्रिय है। शुरुआत में वह ठग-ठग गिरोह के साथ मिलकर गाजियाबाद में कारों से मोबाइल चोरी करता था। उस दौरान वह जेल भी गया।
जमानत पर छूटने के बाद वह मेरठ के कुख्यात सोतीगंज इलाके में गोल्डी सरदार के संपर्क में आया। वहीं उसने जीतू, उमरदराज और मेहराज के साथ मिलकर संगठित गिरोह तैयार किया और कार चोरी का धंधा शुरू कर दिया।
सोतीगंज में ही उसने कार के पुर्जे बदलना, ईसीएम रिप्लेस करना और चोरी के वाहन बेचने की पूरी तकनीक सीखी। वर्ष 2021 में परतापुर पुलिस ने चारों को जेल भेजा था, लेकिन जमानत पर छूटते ही हरेंद्र फिर सक्रिय हो गया।
जेल से छूटते ही फिर शुरू की वारदात
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 2025 में हरेंद्र फॉर्च्यूनर चोरी के मामले में फिर जेल गया था। हाल ही में जमानत पर बाहर आने के बाद उसने मोदीनगर से स्कॉर्पियो एन चोरी कर गिरोह को दोबारा सक्रिय कर दिया।
आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपितों को जेल भेज दिया है। स्वाट टीम और क्राइम ब्रांच गिरोह के बाकी फरार सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।
इस बड़े खुलासे के बाद एनसीआर में वाहन चोरी की कई घटनाओं का राज खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस अब बरामद मोबाइल, ईसीएम और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के पुराने मामलों की भी पड़ताल कर रही है।
