
हाईवे पर मौत का जाल! दो डंपरों के बीच पिसी कार, मासूम की चीखें भी न बचा सकीं जान, एक घंटे चले रेस्क्यू के बाद निकले शव और घायल
रामपुर हाईवे पर सोमवार सुबह जो मंजर सामने आया, उसने हर राहगीर की सांसें रोक दीं। तेज रफ्तार भारी वाहनों के बीच एक कार ऐसी फंसी कि वह पल भर में मौत का पिंजरा बन गई। दो डंपरों के बीच बुरी तरह पिसी कार में सवार लोगों की चीखें देर तक गूंजती रहीं, लेकिन मदद पहुंचने से पहले ही एक मासूम बच्चे समेत दो जिंदगियां हमेशा के लिए बुझ गईं। यह हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोग भी सहम गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोमवार सुबह हाईवे पर सामान्य यातायात चल रहा था। तभी अचानक कार दो डंपरों के बीच आ गई। इससे पहले कि चालक कुछ समझ पाता, भारी भरकम डंपरों ने कार को आगे और पीछे से जकड़ लिया। तेज धमाके की आवाज के साथ कार लोहे के डिब्बे की तरह सिकुड़ गई। कुछ ही सेकेंड में कार के शीशे टूट गए, दरवाजे चिपक गए और अंदर बैठे लोग बुरी तरह फंस गए।
हादसे के तुरंत बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी गाड़ियां छोड़कर दौड़ पड़े। कार के अंदर से दर्दनाक चीखें सुनाई दे रही थीं। एक बच्चे की कराहती आवाज सुनकर कई लोगों की आंखें भर आईं। किसी ने पुलिस को फोन किया तो किसी ने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की। लेकिन कार की हालत देखकर हर कोई बेबस नजर आया।
सूचना मिलते ही थाना सिविल लाइंस पुलिस मौके पर पहुंची। हालात की गंभीरता को देखते हुए फायर ब्रिगेड की टीम को भी बुलाया गया। कार इतनी बुरी तरह दोनों डंपरों के बीच फंसी थी कि सामान्य तरीके से दरवाजा खोलना नामुमकिन था। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने गैस कटर और अन्य उपकरणों की मदद से कार को काटना शुरू किया। यह रेस्क्यू ऑपरेशन करीब एक घंटे तक चला।
इस दौरान हाईवे पर लंबा जाम लग गया। चारों तरफ सायरन की आवाजें, पुलिस की गाड़ियां और एंबुलेंस खड़ी रहीं। रेस्क्यू के दौरान जब पहला घायल बाहर निकाला गया, तो उसकी हालत देखकर लोग सन्न रह गए। कुछ लोग मौके पर ही फूट-फूट कर रो पड़े।
अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि कार में कुल पांच लोग सवार थे। हादसे में मुरादाबाद की सम्राट कॉलोनी निवासी ऋतिक अरोड़ा (45) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, एक मासूम बच्चे ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। परिजनों की चीखें हर किसी का दिल चीर देने वाली थीं।
हादसे में गंभीर रूप से घायल रुद्रपुर की दक्ष कॉलोनी निवासी नूतन (56) पत्नी समरजीत, सूर्य प्रताप (30) पुत्र समरजीत और गिरीश कुमारी पत्नी रविंद्र सिंह को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दो बुजुर्ग महिलाओं की हालत नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर लगातार निगरानी में इलाज कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर डंपरों की तेज रफ्तार और लापरवाही आए दिन हादसों को जन्म दे रही है। इस हादसे में भी कार चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। भारी वाहनों के बीच कार पूरी तरह फंस गई और कुछ ही पलों में सब कुछ खत्म हो गया।
पुलिस ने दोनों डंपरों को कब्जे में ले लिया है और उनके चालकों से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही और तेज रफ्तार को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतकों के शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हाईवे पर चल रहे हर इंसान के लिए खौफनाक चेतावनी है। भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी कब किसी की जिंदगी छीन ले, कोई नहीं जानता। सोमवार सुबह रामपुर हाईवे पर जो हुआ, वह दो परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे गया और समाज से एक मासूम मुस्कान भी छीन ले गया।
हाईवे पर पसरा खून, टूटी कार और रोते-बिलखते परिजन यही याद दिलाते हैं कि कुछ सेकेंड की लापरवाही कई जिंदगियों को निगल सकती है। सवाल यह है—क्या ऐसे हादसों के बाद भी रफ्तार का यह तांडव यूं ही चलता रहेगा?



