
हरियाणा में गेहूं खरीद ने बनाया नया इतिहास, सीएम सैनी बोले— विपक्ष फैला रहा भ्रम, व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी
चंडीगढ़: हरियाणा में इस बार रबी सीजन के दौरान गेहूं की खरीद ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य की मंडियों में गेहूं की आवक ने पिछले चार वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू की गई पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्थाओं के चलते खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार मंडियों में गेहूं की आवक बेहद संतोषजनक रही है। अब तक 81 लाख टन से अधिक गेहूं मंडियों में पहुंच चुका है, जिनमें से 70 लाख टन से ज्यादा की खरीद की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है और इससे यह साफ होता है कि किसानों का भरोसा सरकार की खरीद प्रणाली पर लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि खरीदे गए गेहूं में से 59 लाख 77 हजार मीट्रिक टन की खरीद का सत्यापन भी हो चुका है। वहीं 34 लाख 56 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उठान भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है। सैनी ने यह भी जानकारी दी कि 11 अप्रैल को एक ही दिन में 7 लाख टन से अधिक गेहूं मंडियों में पहुंचा था, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार इस सीजन में अब तक लगभग 5.80 लाख किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी हो रही है। किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सैनी ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी व्यवस्था किसानों के हित में शुरू की गई है, ताकि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी न हो। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से फर्जीवाड़े पर रोक लगी है और असली किसानों को ही इसका लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य समय पर दिलाना है। इसके लिए भुगतान प्रणाली को भी मजबूत किया गया है, जिससे किसानों को बिना देरी के सीधे उनके खातों में पैसा मिल सके। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से न केवल खरीद प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि इसमें पारदर्शिता भी बढ़ी है।
डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देते हुए सैनी ने बताया कि इस सीजन में अब तक 13.47 लाख डिजिटल गेट पास जारी किए जा चुके हैं। इससे किसानों को मंडियों में लंबी कतारों से राहत मिली है और उनकी समय की बचत भी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी डिजिटल सिस्टम को और मजबूत करेगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले सप्ताह से किसानों को व्हाट्सएप के माध्यम से क्यूआर कोड आधारित जे-फॉर्म भेजे जाएंगे। इस सुविधा के जरिए किसान आसानी से अपने दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे और उन्हें बैंक से ऋण लेने में भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आने वाले समय में किसानों के लिए “ई-खरीद” एप भी शुरू किया जाएगा। इस एप के माध्यम से किसानों को एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सुविधाएं मिलेंगी। इसमें जे-फॉर्म, भुगतान की स्थिति, बुआई का रिकॉर्ड, भूमि सत्यापन और गेट पास से जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध होंगी। इससे किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की भलाई के लिए लगातार नई योजनाएं और सुधार लागू कर रही है। खेती को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे नई तकनीकों को अपनाएं और सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं।
अंत में सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी किसानों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस बार की रिकॉर्ड तोड़ गेहूं आवक और सफल खरीद प्रक्रिया इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में किए गए प्रयास हमेशा सकारात्मक परिणाम देते हैं।

