
सोशल मीडिया की नाराज़गी बनी वजह, इंस्टाग्राम को लेकर टोके जाने पर लापता हुई आठवीं की छात्रा
शामली जिले में सोशल मीडिया से जुड़ा एक गंभीर और सोचने पर मजबूर कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली 15 वर्षीय छात्रा अपनी मां की डांट से नाराज होकर घर से चली गई। मामला इंस्टाग्राम चलाने को लेकर हुए विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। छात्रा के लापता होने से परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

जानकारी के मुताबिक, कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली महिला ने थाने में गुमशुदगी की तहरीर दी है। महिला का कहना है कि उसकी नाबालिग बेटी काफी समय से इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कर रही थी। पढ़ाई पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए मां ने कई बार उसे समझाया, लेकिन बात नहीं बनी। एक फरवरी को मां ने सख्त लहजे में बेटी को इंस्टाग्राम चलाने से मना कर दिया और इस बात को लेकर उसे डांट भी लगाई।
मां की डांट से छात्रा मानसिक रूप से आहत हो गई। परिजनों का कहना है कि इसके बाद उसका व्यवहार बदला-बदला सा रहने लगा। वह कम बोलने लगी और अक्सर गुमसुम रहती थी। अगले दिन यानी दो फरवरी को वह अपने दादा के साथ स्कूल गई। छुट्टी के बाद घर लौटते समय रास्ते में शहर के सिटी ग्रीन इलाके के पास छात्रा ने दादा से कहा कि वह अपनी एक सहेली के घर जाना चाहती है।
दादा ने बिना किसी संदेह के उसे जाने की अनुमति दे दी। लेकिन काफी देर बीत जाने के बाद भी जब छात्रा घर नहीं पहुंची, तो परिजन चिंतित हो उठे। पहले उन्होंने आसपास और रिश्तेदारों के यहां खोजबीन की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार परिजन थाने पहुंचे और पुलिस को पूरी घटना से अवगत कराते हुए गुमशुदगी दर्ज कराई।
पुलिस ने मामला दर्ज कर छात्रा की तलाश शुरू कर दी है। थाना प्रभारी सचिन शर्मा ने बताया कि किशोरी की खोज के लिए पुलिस टीमें सक्रिय हैं। आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही छात्रा की सहेलियों, स्कूल से जुड़े लोगों और परिचितों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि हर संभावित पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।
यह घटना केवल एक छात्रा के लापता होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज के समय में बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के गहरे असर को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोर अवस्था में बच्चे भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील होते हैं। इस उम्र में वे अपनी पहचान और स्वतंत्रता को लेकर ज्यादा सजग रहते हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले लाइक, कमेंट और फॉलोअर्स बच्चों के दिमाग में खुशी का एहसास पैदा करते हैं। यह एहसास धीरे-धीरे आदत में बदल सकता है। जब अभिभावक अचानक इस पर रोक लगाते हैं या सख्ती दिखाते हैं, तो बच्चों को लगता है कि उनकी आज़ादी छीनी जा रही है। यही भावना कई बार उन्हें गलत या जोखिम भरे कदम उठाने की ओर ले जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों पर सीधा प्रतिबंध लगाने के बजाय उनसे बातचीत करना ज्यादा जरूरी है। उन्हें यह समझाना चाहिए कि सोशल मीडिया का सही और सीमित उपयोग कैसे किया जाए। साथ ही बच्चों को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि माता-पिता उनके हित में ही फैसले लेते हैं।
फिलहाल, लापता छात्रा की तलाश जारी है और परिवार को उसकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद है। यह घटना अभिभावकों के लिए एक चेतावनी भी है कि डिजिटल दौर में बच्चों की परवरिश के तरीके में संतुलन और संवाद बेहद जरूरी हो गया



