
सीतापुर में भीषण आग से तबाही: ककरहिया और लोनियनपुरवा में कई घर जले, शादी वाले परिवारों पर टूटा दुख का पहाड़
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में मंगलवार का दिन कई परिवारों के लिए भारी त्रासदी बनकर आया। तेज गर्मी और लू के बीच लगी आग ने अलग-अलग गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया। ककरहिया, लोनियनपुरवा और एक ईंट-भट्ठे पर हुई आगजनी की घटनाओं ने न केवल लोगों की संपत्ति को राख कर दिया, बल्कि कई परिवारों की खुशियों को भी मातम में बदल दिया। इस आग में कई घर जल गए, लोग झुलस गए और लाखों रुपये का नुकसान हुआ।

सबसे पहले बात करें ककरहिया गांव की, जहां मंगलवार दोपहर अचानक आग लग गई। शुरुआती तौर पर यह आग एक घर से शुरू हुई, लेकिन तेज लू और हवा के कारण कुछ ही समय में यह विकराल रूप ले बैठी। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते छह घर इसकी चपेट में आ गए। घरों में रखा सारा सामान, कपड़े, अनाज और जरूरी दस्तावेज जलकर राख हो गए।
इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिन घरों में आग लगी, उनमें से एक घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। महेश के बेटे हरिश्चंद्र की 25 अप्रैल को शादी होनी थी। घर में मेहमान आए हुए थे और पकवान बन रहे थे। खुशियों से भरा माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया, जब आग ने घर को अपनी चपेट में ले लिया। शादी के लिए जुटाया गया सारा सामान जलकर खाक हो गया।
आग की लपटें इतनी तेज थीं कि ग्रामीणों के प्रयास भी बेकार साबित हो गए। लोग बाल्टियों में पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन लू की वजह से आग लगातार फैलती रही। धीरे-धीरे यह आग आसपास के घरों तक पहुंच गई और श्यामू, दयाल, इंद्रपाल, विपिन समेत अन्य लोगों के घर भी जल गए।
आखिरकार, सूचना मिलने पर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के जवानों ने कड़ी मेहनत के बाद करीब आधे घंटे में आग पर काबू पाया। अगर दमकल की टीम समय पर नहीं पहुंचती, तो यह आग और भी बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले सकती थी।
इस दौरान आग बुझाने की कोशिश में पांच लोग झुलस गए। महेश, कालीचरण, रामभरोसे, किरन और दयाल को हल्की से मध्यम चोटें आईं। सभी को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महोली ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। राहत की बात यह रही कि सभी की हालत स्थिर है और उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
इस आगजनी में पशुधन को भी नुकसान हुआ। एक बकरी और एक भैंस झुलस गईं, जिससे प्रभावित परिवारों की आर्थिक परेशानी और बढ़ गई। प्रशासन के अनुसार, इस घटना में करीब आठ लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
तहसीलदार अंकुर यादव ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का सर्वे किया है और जल्द ही पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दी जाएगी।
ककरहिया की घटना के अलावा लोनियनपुरवा गांव में भी आग ने भारी तबाही मचाई। यहां रामसागर के घर में दोपहर करीब साढ़े 12 बजे आग लगी, जिसने तेजी से आसपास के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते 12 घर जलकर राख हो गए।
इन घरों में रहने वाले शिवकली, अनिल, तौले, हरिद्वार, फूल सिंह, कपिल, मनोरमा, केशव, मदनलाल, सुशील और मलिखे जैसे कई परिवारों की पूरी गृहस्थी जल गई। लोग बेबस होकर अपनी आंखों के सामने अपने घरों को जलते हुए देखते रहे।
यहां भी दमकल विभाग ने पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। नायब तहसीलदार दीनानाथ यादव ने बताया कि इस घटना में हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और जल्द ही प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।
इसी दिन पूर्णागिरि ब्रिक फील्ड में भी आग लगने की घटना सामने आई। भट्ठे में रखे जलावन में अचानक आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। फायर ब्रिगेड की टीम ने समय रहते पहुंचकर आग पर काबू पाया।
भट्ठा संचालक वीरेंद्र मिश्र ने बताया कि इस आग में करीब पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है। थाना प्रभारी मानपाल सिंह ने भी कहा कि अगर दमकल टीम समय पर नहीं पहुंचती, तो नुकसान और भी ज्यादा हो सकता था।
इन सभी घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि गर्मी और लू के मौसम में आग लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस मौसम में सावधानी बरतें, खासकर खाना बनाते समय और ज्वलनशील वस्तुओं के पास। साथ ही गांवों में अग्निशमन के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
फिलहाल, प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने जीवन को फिर से सामान्य बनाना है। जिन लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी इस आग में खो दी, उनके लिए यह नुकसान बहुत बड़ा है।
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि हमें प्राकृतिक परिस्थितियों और सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रशासन की मदद के बावजूद, इन परिवारों के लिए इस नुकसान की भरपाई आसान नहीं होगी।



