
शादी के खर्च का दबाव बना कातिल: एटा में एक ही घर में चार हत्याओं से कांपा इलाका
एटा जिले के शिकोहाबाद मार्ग पर बसे नगला प्रेमी गांव में सोमवार दोपहर जो मंजर सामने आया, उसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। जिस घर में रोजमर्रा की बातें, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य के सपने पल रहे थे, वहीं कुछ ही घंटों में चार लोगों की जिंदगियां खत्म हो गईं। बेटी की शादी के लिए पैसों की चिंता और उससे उपजे घरेलू विवाद ने परिवार के मुखिया कमल सिंह को ऐसा वहशी बना दिया कि उसने अपनी पत्नी, बेटी, मां और पिता—किसी को भी नहीं बख्शा।

ग्रामीणों के मुताबिक, कमल सिंह के घर में काफी समय से तनाव का माहौल था। आर्थिक हालत ठीक नहीं थी और बेटी की शादी सिर पर थी। खर्च को लेकर आए दिन बहस होती रहती थी। सोमवार को भी इसी मुद्दे पर घर में कहासुनी हुई, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह विवाद खून-खराबे में बदल जाएगा।

दोपहर के वक्त कमल सिंह घर पहुंचा। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह बाइक से उतरा और एक पॉलीथिन लेकर घर के अंदर गया। इसी दौरान घर में पत्नी और अन्य परिजनों से उसकी बहस बढ़ गई। गुस्से और मानसिक तनाव में उसने छत से एक भारी सीमेंटेड ईंट उठाई और एक-एक कर चारों पर जानलेवा हमला कर दिया। पत्नी के बाद उसने बेटी, फिर अपनी मां और बुजुर्ग पिता को बेरहमी से कुचल डाला।
घर के अंदर खौफनाक सन्नाटा

घटना के बाद घर के भीतर ऐसा सन्नाटा पसरा था, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। चारों लोग लहूलुहान हालत में पड़े थे। सिर और चेहरे पर इतने गहरे घाव थे कि पहचान करना तक मुश्किल हो गया। बाद में जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो पूरा घर मौत की गवाही दे रहा था।
पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए तीन डॉक्टरों की टीम बनाई गई और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उजागर की दरिंदगी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी कि हत्या बेहद नृशंस तरीके से की गई थी। डॉक्टरों के अनुसार, चारों मृतकों के सिर और चेहरे पर भारी वस्तु से कई वार किए गए थे। दिमाग की नसें फट चुकी थीं, चेहरे और गर्दन की कई हड्डियां टूट गई थीं।

श्यामा देवी, रत्ना देवी और ज्योति के शवों का पोस्टमार्टम डॉ. राजीव किशोर और डॉ. श्वेता राजपूत ने किया, जबकि बुजुर्ग गंगा सिंह के शव का पोस्टमार्टम डॉ. उत्सव जैन और डॉ. राजीव जैन की टीम ने किया। पोस्टमार्टम देर रात शुरू होकर सुबह तक चला, जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि चोटें कितनी गंभीर थीं।
जांच के घेरे में आया कमल सिंह
शुरुआत में मामला उलझा हुआ लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई, शक की सुई कमल सिंह पर टिकने लगी। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पहले वह गोलमोल जवाब देता रहा और खुद को निर्दोष बताने की कोशिश करता रहा।
इसी दौरान पुलिस ने उसके गर्दन के पास और हथेलियों पर कुछ ताजे निशान देखे। मेडिकल परीक्षण कराया गया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में कमल सिंह का संदिग्ध समय पर घर में आना-जाना साफ दिखाई दिया। सबूतों के सामने आने के बाद वह टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
कबूलनामे के बाद फूट पड़ा

हत्या की बात स्वीकार करने के बाद कोतवाली नगर परिसर में कमल सिंह खुद पर काबू नहीं रख पाया। वह जोर-जोर से रोने लगा और बार-बार कहता रहा कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई। पुलिस के अनुसार, उसने यह भी कहा कि चार लोगों की हत्या करने के बाद उसका मन पूरी तरह टूट चुका था और उसे खुद की जिंदगी भी बेकार लगने लगी थी।
हालांकि, पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में सख्त धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
बिसरा सुरक्षित, हर पहलू की जांच
पुलिस ने मृतकों का बिसरा सुरक्षित रख लिया है। इसकी जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं घटना से पहले किसी तरह का नशीला पदार्थ तो इस्तेमाल नहीं किया गया था। अधिकारी बताते हैं कि फिलहाल सभी एंगल से जांच की जा रही है, ताकि किसी भी तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए।
सीसीटीवी से सामने आई टाइमलाइन
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स के आधार पर पूरे घटनाक्रम की एक टाइमलाइन भी सामने आई है।
दोपहर करीब 12:40 बजे कमल सिंह बाइक से घर पहुंचा और पॉलीथिन लेकर अंदर गया।
1:10 बजे एक रिश्तेदार ने ज्योति को फोन कर पिता के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि वह खाना खाने आए हैं।
1:55 बजे कमल सिंह घर से बाहर निकलकर दुकान की ओर जाता दिखाई दिया।
2:17 बजे देवांश स्कूल से लौटकर घर के अंदर गया।
2:18 बजे वह घबराहट में बाहर निकला और गली में खड़ी एक महिला को साथ लेकर दोबारा घर में गया।
2:20 बजे महिला और देवांश घर से बाहर निकलते दिखाई दिए।
गांव में शोक और सन्नाटा
इस सामूहिक हत्याकांड के बाद नगला प्रेमी गांव में मातम पसरा हुआ है। हर कोई हैरान है कि आर्थिक तंगी और पारिवारिक तनाव किसी इंसान को इस हद तक निर्दयी बना सकता है। लोग दबी जुबान में यही कहते नजर आ रहे हैं कि समय रहते अगर विवाद सुलझा लिया जाता, तो शायद चार जिंदगियां बच सकती थीं।
पुलिस का कहना है कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के खात्मे की कहानी है, बल्कि समाज के लिए एक कड़वी सीख भी है कि गुस्सा, तनाव और संवाद की कमी किस तरह भयानक त्रासदी में बदल सकती है।



