
लग्जरी गाड़ी चोरी का इंटरनेशनल रैकेट बेनकाब, दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा मास्टरमाइंड
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने महंगी और लग्जरी गाड़ियों की चोरी से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा करते हुए इसके मुख्य सरगना जुम्मा खान को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर में वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम देकर न केवल देश के अलग-अलग हिस्सों में बल्कि विदेशों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था। पुलिस की इस कार्रवाई को वाहन चोरी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है।

अपराध शाखा की टीम ने मणिपुर के थोबल जिले में छापेमारी कर जुम्मा खान को दबोचा। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और कई मामलों में घोषित अपराधी भी रह चुका है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जुम्मा खान बेहद शातिर किस्म का अपराधी है, जो कानून की पकड़ से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद वाहन चोरी से जुड़े इस संगठित नेटवर्क की कई परतें खुलनी शुरू हो गई हैं।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खास तौर पर दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र से हाई-एंड और लग्जरी कारों को निशाना बनाता था। चोरी के बाद इन वाहनों को तुरंत उत्तर-पूर्वी राज्यों में भेज दिया जाता था। वहां आरटीओ से जुड़े कुछ लोगों की मदद से इन गाड़ियों का फर्जी रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। नए कागजात और नंबर प्लेट मिलने के बाद ये वाहन पूरी तरह वैध नजर आने लगते थे, जिससे इन्हें पहचान पाना बेहद मुश्किल हो जाता था।
दिल्ली पुलिस के उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि इस केस की जांच के दौरान टीम ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग का बेहतर तालमेल किया। सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच, मोबाइल और डिजिटल तकनीकी निगरानी, साथ ही स्थानीय मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस इस गिरोह तक पहुंच पाई। कई महीनों की मेहनत के बाद आखिरकार पुलिस को यह सुराग मिला कि गिरोह का संचालन मणिपुर से किया जा रहा है।
पूछताछ में जुम्मा खान ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने स्वीकार किया कि वह अब तक एक हजार से अधिक चोरी की गई गाड़ियों को बेच चुका है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह चोरी की गई लग्जरी कारों को बेहद कम कीमत पर आगे बेच देता था। जहां एक लग्जरी कार की बाजार कीमत 20 से 30 लाख रुपये या उससे भी अधिक होती है, वहीं गिरोह उसे मात्र पांच से छह लाख रुपये में बेच देता था। सस्ते दाम के लालच में कई खरीदार बिना ज्यादा जांच-पड़ताल के इन गाड़ियों को खरीद लेते थे।
जांच के दौरान यह भी पता चला है कि इस पूरे नेटवर्क को सरिक उर्फ साटा और उसका भतीजा आमिर पाशा मिलकर चला रहे थे। सरिक भारत में रहकर चोरी और गाड़ियों की सप्लाई का काम संभालता था, जबकि आमिर पाशा दुबई में बैठकर पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल करता था। आमिर विदेश से खरीदारों से संपर्क करता, पैसों का लेन-देन तय करता और गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को मजबूत बनाता था। पुलिस को शक है कि दुबई के अलावा अन्य देशों में भी इस गिरोह के तार जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह सिर्फ वाहन चोरी तक सीमित नहीं था। इसके तार फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों, सीमा पार तस्करी और हवाला नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से अब इस मामले की जांच को और व्यापक स्तर पर ले जाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने उत्तर-पूर्वी राज्यों के कई आरटीओ कार्यालयों की जानकारी भी खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी रजिस्ट्रेशन किन लोगों की मिलीभगत से किए गए।
इस कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस ने आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति बेहद कम कीमत पर लग्जरी या महंगी गाड़ी बेचने का प्रस्ताव दे, तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। वाहन खरीदने से पहले उसके रजिस्ट्रेशन, चेसिस नंबर, इंजन नंबर और आरटीओ रिकॉर्ड की पूरी जांच जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी कानूनी परेशानी का कारण बन सकती है।
फिलहाल जुम्मा खान को दिल्ली लाकर रिमांड पर लिया गया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से इस पूरे अंतरराष्ट्रीय वाहन चोरी गिरोह की कड़ियां जुड़ेंगी और कई अन्य बड़े नाम भी सामने आएंगे। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
दिल्ली पुलिस की इस सफलता को संगठित अपराध के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराध चाहे कितना भी संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला क्यों न हो, कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधियों को देर-सबेर न्याय के कटघरे में खड़ा होना ही पड़ता है।



