हरियाणा

लक्ष्मी नगर में बंद गोदाम में लगी आग से मचा हड़कंप, समय रहते काबू न पाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था — अंबाला

हरियाणा के अंबाला शहर के लक्ष्मी नगर इलाके में बुधवार रात अचानक उस समय दहशत का माहौल बन गया, जब एक बंद पड़े गोदाम से उठता धुआं और आग की लपटें लोगों की नजर में आईं। रात करीब 10 बजे स्थानीय निवासियों ने पहले हल्का धुआं देखा, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग ने तेज रूप ले लिया। गोदाम बंद होने के कारण अंदर क्या रखा है, इसका अंदाजा नहीं था, जिससे आसपास के लोगों में भय और चिंता दोनों फैल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोदाम लंबे समय से बंद पड़ा था और वहां कोई नियमित आवाजाही नहीं होती थी। जब अचानक धुआं निकलता दिखा तो लोगों ने पहले सोचा कि शायद किसी ने कचरा जलाया होगा, लेकिन जैसे ही लपटें तेज हुईं, स्थिति की गंभीरता समझ में आई। इसके बाद तुरंत गोदाम मालिक को सूचना दी गई और दमकल विभाग को भी फोन कर बुलाया गया।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की एक टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। हालांकि जिस गली में गोदाम स्थित है, वह काफी संकरी है, जिससे दमकल वाहन को अंदर तक पहुंचने में मुश्किल आई। इसके बावजूद दमकल कर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने दूर से ही पाइपलाइन बिछाकर आग बुझाने का काम शुरू किया। आग लगातार फैल रही थी और धुआं पूरे क्षेत्र में भर गया था, जिससे आसपास के लोगों को अपने घरों से बाहर निकलना पड़ा।

दमकल कर्मियों ने लगभग एक घंटे तक लगातार प्रयास किए। कई बार ऐसा लगा कि आग काबू से बाहर जा सकती है, लेकिन टीम की सतर्कता और अनुभव के चलते आखिरकार आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। अगर आग कुछ देर और जलती रहती, तो पास के मकानों और दुकानों तक फैलने का खतरा था, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था।

घटना के बाद जब गोदाम का शटर खोला गया तो अंदर का दृश्य बेहद नुकसानदायक था। गोदाम के भीतर रखे विज्ञान उपकरण, मशीनों के पार्ट्स, केमिकल से जुड़े सामान और अन्य कच्चा माल पूरी तरह जल चुके थे। कई धातु उपकरण पिघल चुके थे और लकड़ी या प्लास्टिक से बने सामान पूरी तरह राख में बदल गए थे।

गोदाम मालिक गुलशन ने बताया कि यह गोदाम पिछले पांच साल से बंद था, लेकिन अंदर काफी महंगे उपकरण और माल रखा हुआ था। उन्होंने कहा कि वे समय-समय पर गोदाम की जांच तो करते थे, लेकिन बिजली कनेक्शन सक्रिय था। संभव है कि किसी तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी हो। उन्होंने यह भी बताया कि नुकसान का सही आंकलन अभी नहीं हो पाया है, परंतु प्रारंभिक अनुमान के अनुसार हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये का सामान नष्ट हो सकता है।

दमकल विभाग के अधिकारियों ने शुरुआती जांच में बताया कि आग लगने की सबसे संभावित वजह शॉर्ट सर्किट लग रही है। पुराने भवनों में जर्जर वायरिंग और लंबे समय तक बिजली कनेक्शन चालू रहने से ऐसे हादसे अक्सर होते हैं। हालांकि अंतिम कारण की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही की जाएगी।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं गोदाम में किसी प्रकार की ज्वलनशील सामग्री तो नहीं रखी गई थी, या फिर किसी बाहरी कारण से आग लगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और अधिकारियों ने गोदाम मालिक से भी आवश्यक दस्तावेज मांगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई पुराने गोदाम और बंद मकान हैं, जिनमें बिजली कनेक्शन चालू रहते हैं। यह स्थिति भविष्य में बड़े हादसों को जन्म दे सकती है। निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे बंद भवनों की जांच कराई जाए और यदि जरूरत न हो तो बिजली कनेक्शन हटाए जाएं।

इस घटना ने एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं और अग्नि सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद भवनों में रखे बिजली कनेक्शन, जर्जर वायरिंग और ज्वलनशील सामग्री बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं। समय-समय पर निरीक्षण और सुरक्षा उपाय अपनाकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

फिलहाल राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। केवल आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसे बीमा और प्रशासनिक मदद से कुछ हद तक संभाला जा सकता है। लेकिन यदि आग फैल जाती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों, दुकानों और गोदामों में बिजली व्यवस्था की नियमित जांच कराएं और किसी भी तरह की तकनीकी खराबी को नजरअंदाज न करें। साथ ही, पुराने भवनों को लंबे समय तक बंद रखने की स्थिति में सुरक्षा उपाय जरूर अपनाएं।

यह घटना एक चेतावनी की तरह है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। समय रहते सतर्कता बरतना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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