
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका, तेलूराम जांगड़ा ने छोड़ी पार्टी
हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और हरियाणा ओबीसी कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तेलूराम जांगड़ा ने कांग्रेस से इस्तीफा देने का एलान कर दिया है। उन्होंने ओबीसी वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पार्टी से दूरी बनाने का फैसला लिया है। इस संबंध में उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को भेज दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे और अब समाज सेवा के कार्यों पर ही ध्यान देंगे।

तेलूराम जांगड़ा लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए थे और उन्हें पार्टी के पुराने और सक्रिय नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने करीब तीन दशक तक कांग्रेस के साथ रहकर संगठन में काम किया और विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। लेकिन हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के टिकट वितरण से नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। इन सीटों के लिए राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। कांग्रेस की ओर से भी उम्मीदवारों के चयन को लेकर काफी चर्चा चल रही थी। इसी दौरान पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए एससी वर्ग से जुड़े नेता कर्मवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया। इसी निर्णय के बाद से ओबीसी वर्ग से जुड़े कुछ नेताओं में नाराजगी देखने को मिल रही थी।
तेलूराम जांगड़ा का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि कांग्रेस इस बार ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में ओबीसी समाज की संख्या काफी अधिक है और लंबे समय से यह वर्ग पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी ओबीसी वर्ग से किसी योग्य नेता को मौका देगी। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें काफी निराशा हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लगातार ओबीसी वर्ग की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि संगठन में भी इस वर्ग के नेताओं को उतनी प्राथमिकता नहीं दी जाती, जितनी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार इस मुद्दे को पार्टी के सामने उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
तेलूराम जांगड़ा ने बताया कि इसी कारण उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए थे और पार्टी के लिए लगातार काम करते रहे। लेकिन अब उन्हें लगता है कि उनकी और उनके समाज की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि तेलूराम जांगड़ा करीब 30 वर्षों से कांग्रेस के साथ जुड़े रहे हैं। इस दौरान उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। कांग्रेस सरकार के समय वर्ष 2011 में उन्हें हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य भी नियुक्त किया गया था। इस पद पर उन्होंने लगभग छह वर्षों तक काम किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पिछड़ा वर्ग से जुड़े कई मुद्दों को उठाया और उनके समाधान के लिए प्रयास किए।
पिछड़ा वर्ग आयोग में कार्यकाल पूरा होने के बाद भी वह कांग्रेस में सक्रिय रहे और संगठन के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते रहे। बाद में उन्हें हरियाणा ओबीसी कांग्रेस का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने प्रदेश में ओबीसी समाज के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए।
लेकिन राज्यसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय ले लिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद लिया है। उनका कहना है कि वह अब इस तरह की अनदेखी को और सहन नहीं कर सकते थे।
तेलूराम जांगड़ा ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य राजनीति के माध्यम से समाज की सेवा करना था और आगे भी वह समाज सेवा के कार्यों में लगे रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह ओबीसी समाज और अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए काम करते रहेंगे।
उनके इस फैसले के बाद हरियाणा की राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का पार्टी छोड़ना संगठन के लिए एक झटका माना जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर, कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि हरियाणा की राजनीति में जातीय समीकरणों का हमेशा से महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। ऐसे में ओबीसी वर्ग से जुड़े एक प्रमुख नेता के इस्तीफे को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
फिलहाल तेलूराम जांगड़ा ने कांग्रेस से अपना रिश्ता समाप्त कर लिया है और उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वह किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे। उनका कहना है कि वह आगे समाज सेवा के माध्यम से लोगों के बीच काम करेंगे और समाज के हित में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
राज्यसभा चुनाव के बीच सामने आए इस घटनाक्रम ने हरियाणा की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले का राजनीतिक स्तर पर क्या असर पड़ता है और कांग्रेस इस स्थिति को किस तरह संभालती है।

