
रजिस्ट्री से दूर किसान बढ़ा रहे चिंता: यूपी में MSP पर गेहूं बिक्री और योजनाओं का लाभ खतरे में
उत्तर प्रदेश में किसानों को लेकर एक बड़ी प्रशासनिक और आर्थिक चुनौती सामने आ रही है। राज्य में लाखों किसान अब तक फार्मर रजिस्ट्री प्रक्रिया से बाहर हैं, जिसके कारण उनके सामने अपनी फसल बेचने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खासतौर पर गेहूं खरीद के मौजूदा सीजन में यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बेचने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी गई है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में करीब 82 लाख किसानों ने अभी तक अपनी फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है। यह संख्या कुल किसानों का एक बड़ा हिस्सा है, जो सीधे तौर पर सरकारी व्यवस्थाओं से कटे हुए हैं। राज्य में कुल 2 करोड़ 88 लाख से अधिक किसानों की रजिस्ट्री होनी है, जिनमें से लगभग 2 करोड़ 6 लाख किसानों का ही पंजीकरण पूरा हो पाया है। यानी अभी भी बड़ी संख्या में किसान इस प्रक्रिया से दूर हैं।
यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना फार्मर आईडी के किसानों को न तो एमएसपी का लाभ मिलेगा और न ही अन्य योजनाओं का फायदा। इसका मतलब है कि जिन किसानों ने अभी तक रजिस्ट्री नहीं कराई है, उन्हें अपनी फसल बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ सकती है, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा।
राजधानी लखनऊ की स्थिति भी इस मामले में बहुत बेहतर नहीं है। यहां हजारों किसान अभी भी रजिस्ट्री से वंचित हैं। जिले में कुल किसानों की संख्या के मुकाबले लगभग एक चौथाई किसान अब तक पंजीकरण नहीं करा पाए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इस योजना की पहुंच पूरी तरह से नहीं बन पाई है।
हालांकि, राज्य के कुछ जिलों ने इस दिशा में बेहतर प्रदर्शन किया है। रामपुर जैसे जिलों में लगभग सभी किसानों ने अपनी रजिस्ट्री पूरी कर ली है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, एटा और कासगंज जैसे जिलों ने भी उच्च प्रतिशत के साथ इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक लागू किया है। इसके विपरीत, सुल्तानपुर, कानपुर देहात, देवरिया, गोरखपुर और कौशांबी जैसे जिले अभी भी पिछड़े हुए हैं, जहां बड़ी संख्या में किसान रजिस्ट्री से बाहर हैं।
सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए फार्मर आईडी को सभी कृषि और संबद्ध योजनाओं के लिए अनिवार्य बना दिया है। इसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उर्वरक वितरण, बीज और कीटनाशक सब्सिडी, पशुपालन और मत्स्य पालन योजनाएं शामिल हैं। यानी अब किसान की पहचान और उसकी पात्रता का आधार यही फार्मर आईडी होगी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचे। इसके माध्यम से सरकार किसानों का एक सटीक डिजिटल डाटाबेस तैयार करना चाहती है, जिससे भविष्य में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन किया जा सके।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी कई किसान इस प्रक्रिया से अनजान हैं या तकनीकी कारणों से इसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी, डिजिटल साक्षरता का अभाव और दस्तावेजों की समस्या इस प्रक्रिया में बाधा बन रही है। कई किसानों को यह भी नहीं पता कि रजिस्ट्री न कराने के क्या परिणाम हो सकते हैं।
इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके तहत 15 अप्रैल तक अधिक से अधिक किसानों की रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में कृषि विभाग के कर्मचारी, लेखपाल और अन्य अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं और उनकी रजिस्ट्री कराने में मदद कर रहे हैं।
रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई विकल्प भी दिए गए हैं। किसान अपने आधार कार्ड, खतौनी और आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के साथ नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर पंजीकरण करा सकते हैं। इसके अलावा वे ऑनलाइन माध्यम से भी खुद रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें अपने खेतों और जमीन से संबंधित सभी विवरण सही तरीके से भरने होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मर रजिस्ट्री योजना लंबे समय में किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे सरकार को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस क्षेत्र में किस प्रकार की फसल उगाई जा रही है और वहां किस तरह की सहायता की आवश्यकता है। इससे योजनाओं को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाया जा सकेगा।
फिर भी, यह जरूरी है कि इस योजना को लागू करते समय किसानों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज न किया जाए। अगर किसी किसान के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं या वह डिजिटल प्रक्रिया को समझने में असमर्थ है, तो उसे उचित सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गेहूं खरीद का समय चल रहा है और लाखों किसान अभी भी रजिस्ट्री से बाहर हैं। अगर उन्होंने जल्द ही पंजीकरण नहीं कराया, तो उन्हें एमएसपी का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें अपनी फसल कम कीमत पर बेचनी पड़ेगी। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि फार्मर रजिस्ट्री योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। सरकार को चाहिए कि वह इस प्रक्रिया को और सरल बनाए और किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए अधिक प्रयास करे।
किसानों के लिए यह समय जागरूक होने और तुरंत कदम उठाने का है। अगर वे समय रहते अपनी रजिस्ट्री पूरी कर लेते हैं, तो वे न केवल अपनी फसल का उचित मूल्य पा सकेंगे, बल्कि विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से उठा पाएंगे। अन्यथा, उन्हें आने वाले समय में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।



