
मौत के बाद मचा बवाल: छत से गिरा मासूम नहीं बच सका, अस्पताल में हंगामा और सड़क जाम से दहला शहर
हरियाणा के पानीपत में एक दर्दनाक हादसे ने बुधवार शाम पूरे शहर को बेचैन कर दिया। सात साल के एक बच्चे की छत से गिरने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन इसके बाद अस्पताल में जो दृश्य सामने आए, उन्होंने मामले को और संवेदनशील बना दिया। गुस्साए परिजन सड़क पर उतर आए, अस्पताल में हंगामा हुआ और मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया। घटना ने एक परिवार का चिराग बुझाने के साथ-साथ स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार महावीर कॉलोनी निवासी सात वर्षीय असरफ खेलते समय घर की छत से नीचे गिर गया। गिरने की आवाज सुनकर परिवार के लोग घबरा गए और उसे तुरंत उठाकर पास के अस्पताल ले गए। बच्चे को गंभीर हालत में जाटल रोड स्थित आईबीएम अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया। परिजन उम्मीद लगाए बैठे थे कि बच्चा बच जाएगा, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
डॉक्टरों ने कई घंटे तक प्रयास किए, लेकिन शाम करीब सात बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया। जैसे ही यह खबर परिवार को मिली, अस्पताल परिसर में मातम और आक्रोश का माहौल बन गया। बच्चे की मां और परिजन बेसुध होकर रोने लगे, जबकि कुछ लोग अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और पैसों की मांग के आरोप लगाने लगे।
परिजनों का कहना था कि उन्होंने इलाज शुरू होते ही 25 हजार रुपये जमा करा दिए थे। उनका आरोप है कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल कर्मियों ने शव सौंपने से पहले और पैसों की मांग की। इसी आरोप ने माहौल को और भड़का दिया। देखते ही देखते परिजन और उनके समर्थक अस्पताल के बाहर जमा हो गए और विरोध शुरू कर दिया।
कुछ ही देर में भीड़ ने सड़क पर उतरकर जाम लगा दिया। जाटल रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। लोग इस अचानक हुए विरोध से हैरान थे, वहीं आसपास के दुकानदारों ने भी तनाव का माहौल महसूस किया।
दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना था कि बच्चे की मौत दुर्घटनावश हुई है, इसलिए कानूनन पोस्टमार्टम जरूरी है। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार उन्होंने केवल पुलिस को सूचना दी थी ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। उनका दावा है कि किसी अतिरिक्त पैसे की मांग नहीं की गई, बल्कि परिजन ही बिना पोस्टमार्टम के शव ले जाना चाहते थे।
जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, पुलिस को सूचना दी गई। थोड़ी ही देर में डीएसपी मुख्यालय के नेतृत्व में तीन थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने पहले लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन जब जाम नहीं खुला तो हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया गया। करीब एक घंटे बाद सड़क पर यातायात सामान्य हो सका।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बच्चे की मौत असामान्य परिस्थितियों में हुई है, इसलिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी है। शव को कब्जे में लेकर सुरक्षित रखवा दिया गया है और मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया जाएगा, ताकि मौत के कारणों पर कोई विवाद न रहे। पुलिस का कहना है कि यदि किसी भी पक्ष की शिकायत मिलती है तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद महावीर कॉलोनी में गहरा शोक है। पड़ोसियों के अनुसार असरफ बेहद मासूम और हंसमुख बच्चा था। उसकी अचानक मौत ने पूरे मोहल्ले को स्तब्ध कर दिया है। परिवार की हालत इतनी खराब है कि घर में मातम का माहौल बना हुआ है और लोग उन्हें सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि दुर्घटनाओं के बाद अस्पताल और परिजनों के बीच संवाद कितना जरूरी होता है। अक्सर भावनात्मक स्थिति में लोग कानूनी प्रक्रिया को समझ नहीं पाते, वहीं अस्पतालों के लिए नियमों का पालन करना जरूरी होता है। ऐसे में छोटी सी गलतफहमी भी बड़ा विवाद बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटनावश हुई मौतों में पोस्टमार्टम इसलिए जरूरी होता है ताकि भविष्य में किसी भी तरह का संदेह या कानूनी विवाद न रहे। हालांकि, संवेदनशील हालात में प्रशासन और अस्पताल कर्मियों को परिजनों से सहानुभूति के साथ बात करनी चाहिए, जिससे विवाद टल सके।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चे की मौत केवल गिरने से लगी चोटों के कारण हुई या इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही का भी पहलू जुड़ा है।
इस दर्दनाक घटना ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि यह भी याद दिला दिया कि हादसे के बाद व्यवस्था और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन कितना जरूरी है। अब पूरे इलाके की नजर इस मामले की जांच और रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे सच सामने आ सके और परिवार को न्याय मिल सके।

