
मेरठ में पुलिस मुख्यालय पर बवाल: पेट्रोल की बोतल लेकर पहुंचीं महिलाएं, आत्मदाह की चेतावनी से मचा हड़कंप
मेरठ में गुरुवार को पुलिस प्रशासन उस समय सकते में आ गया, जब कुछ महिलाएं और ग्रामीण अचानक पेट्रोल की बोतल लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गए और आत्मदाह करने की धमकी देने लगे। इस अप्रत्याशित घटना से पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए महिलाओं को ऐसा कदम उठाने से रोका और उनके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली। इस दौरान काफी देर तक पुलिस और महिलाओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। हंगामे के बीच एक महिला की गोद में मौजूद छोटा बच्चा भी जमीन पर गिर गया, जिसे तुरंत एक महिला पुलिसकर्मी ने उठाकर सुरक्षित किया।

यह विवाद भावनपुर थाना क्षेत्र के राली चौहान गांव में होली के दौरान हुए झगड़े और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सामने आया है। एक पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने मामले में निष्पक्षता नहीं बरती और केवल उनके लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर दी।
होली के दिन हुआ था विवाद
ग्रामीणों के अनुसार चार मार्च को होली के दिन गांव में दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया था। बताया गया कि गांव के रविंद्र और मोनू एक शोक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गए थे। कार्यक्रम से लौटते समय जब वे एक गली से गुजर रहे थे, तभी दूसरे पक्ष के कुछ लोगों ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी।
इस बात पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर राजपाल पक्ष के कुछ लोगों ने मोनू और रविंद्र पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि मोनू की नाक में गंभीर चोट आई है, जबकि रविंद्र की तीन पसलियां टूट गई हैं। इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया।
शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ मुकदमा
घटना के कुछ दिन बाद यानी सात मार्च को मोनू की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। प्राथमिकी में गांव के विकास, रोहित, विक्रांत, सौरभ और शनि सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया।
मोनू का कहना था कि इन लोगों ने मिलकर उन पर हमला किया और जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी, लेकिन इसके बावजूद गांव में तनाव बना रहा।
फायरिंग की घटना से बढ़ी चिंता
मोनू पक्ष के ग्रामीणों का आरोप है कि 11 मार्च की रात को राजपाल पक्ष के कुछ लोगों ने उनकी गली में आकर फायरिंग की। इससे पूरे गांव में दहशत फैल गई।
ग्रामीणों का कहना है कि फायरिंग के बाद दूसरे पक्ष ने ही पुलिस को गलत सूचना दे दी कि मोनू पक्ष ने उन पर गोली चलाई है। इसी आधार पर पुलिस ने मोनू पक्ष के कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
इस कार्रवाई से नाराज होकर ग्रामीणों ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया।
एसएसपी कार्यालय पहुंचा ग्रामीणों का समूह
पुलिस की कार्रवाई से नाराज होकर मोनू पक्ष के कई लोग गुरुवार को एसएसपी कार्यालय पहुंच गए। इनमें बहादुर प्रताप सिंह, अंशुल, आंचल, सविता, सावित्री और सरोज सहित कई महिलाएं और पुरुष शामिल थे।
ग्रामीण अपने साथ छोटे-छोटे बच्चों को भी लेकर आए थे। उन्होंने कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
ग्रामीणों का कहना था कि उनके साथ अन्याय हुआ है और जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, वे विरोध जारी रखेंगे।
पेट्रोल निकालते ही बढ़ गया तनाव
विरोध प्रदर्शन के दौरान अचानक कुछ महिलाओं ने अपने बैग से पेट्रोल की बोतल निकाल ली और आत्मदाह करने की धमकी देने लगीं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के बीच हड़कंप मच गया।
पुलिस ने तुरंत महिलाओं को पकड़कर उनके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली। इस दौरान काफी देर तक छीना-झपटी चलती रही और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
अफरा-तफरी में गिरा मासूम
पुलिस और महिलाओं के बीच हो रही छीना-झपटी के दौरान एक महिला की गोद में मौजूद बच्चा अचानक जमीन पर गिर गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बच्चे को उठाया और उसे सुरक्षित किया।
मौके पर मौजूद एक महिला पुलिसकर्मी ने बच्चे को संभाला और उसे उसकी मां को सौंप दिया। इस घटना के बाद वहां मौजूद लोग और भी भावुक हो गए।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस ने चार मार्च की घटना के बाद ही सख्त कार्रवाई की होती तो बाद में फायरिंग की नौबत नहीं आती।
उनका आरोप है कि पुलिस ने दबाव में आकर एकतरफा कार्रवाई की है और उनके लोगों को ही पकड़ लिया गया है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
अधिकारियों ने शुरू की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अविनाश पांडेय ने तुरंत मामले की जांच के आदेश दे दिए। उन्होंने एसपी देहात अभिजीत कुमार और सीओ भावनपुर को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी।
इसके बाद दोनों अधिकारी भावनपुर थाने पहुंचे और वहां करीब दो घंटे तक रुककर मामले की जानकारी जुटाई। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और दोनों पक्षों के लोगों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की।
दोनों पक्षों के लोगों पर कार्रवाई
पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों के 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें राजपाल, उनका बेटा विक्रांत, सौरभ, विकास, अर्जुन और मन्नू के अलावा दूसरे पक्ष के मोनू, रिंकू, विनय, मनीष, प्रवेश, संतरपाल और प्रशांत शामिल हैं।
इन सभी के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की गई है ताकि गांव में दोबारा कोई विवाद न हो।
फायरिंग मामले में जांच जारी
फायरिंग की घटना को लेकर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गोली किस पक्ष की ओर से चलाई गई थी।
पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
गांव में बढ़ाई गई पुलिस निगरानी
घटना के बाद राली चौहान गांव में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस लगातार इलाके में गश्त कर रही है ताकि किसी भी तरह की नई घटना को रोका जा सके।
प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच के आधार पर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।



