
बारिश-ओलों ने बदला हरियाणा का मौसम, फसलों को भारी नुकसान
हरियाणा में मौसम ने अचानक करवट लेते हुए लोगों और किसानों दोनों को हैरान कर दिया। एनसीआर और दिल्ली के साथ-साथ पूरे प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के असर से तेज हवाएं, बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिली। इस बदलाव ने न सिर्फ तापमान को गिराया, बल्कि खेतों और मंडियों में रखी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया।

मंगलवार रात से ही तेज हवाओं और अंधड़ के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया था। कई जिलों में देर रात तक तेज बारिश होती रही, जबकि बुधवार सुबह भी बादल छाए रहे और रुक-रुक कर वर्षा जारी रही। मौसम के इस बदले रुख ने गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ा दी।
प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि ने हालात और खराब कर दिए। महेंद्रगढ़, जींद, कैथल, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र और चरखी दादरी में ओले गिरने से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा। कई किसानों की फसल कटाई के लिए तैयार थी, ऐसे में इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।
वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दो दिनों में सबसे ज्यादा बारिश चंडीगढ़ में 38 मिलीमीटर दर्ज की गई। इसके अलावा अंबाला में 19 मिलीमीटर और यमुनानगर में 18 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। अन्य जिलों में भी अच्छी-खासी वर्षा दर्ज की गई, जिससे वातावरण में ठंडक बढ़ गई।
महेंद्रगढ़ में 15.5 मिलीमीटर, कनीना में 17.5 मिलीमीटर और फतेहाबाद में 10 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वहीं हिसार में 2.4 मिलीमीटर बारिश हुई। भले ही यहां बारिश कम हुई, लेकिन इसका असर मंडियों में साफ दिखाई दिया।
दरअसल, हिसार की नई अनाज मंडी में खुले में रखा गेहूं बारिश के कारण भीग गया। कई जगह पानी भर गया, जिससे अनाज की गुणवत्ता खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों को डर है कि भीगा हुआ गेहूं उन्हें कम दाम पर बेचना पड़ेगा, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 6 अप्रैल को उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण यह बदलाव आया है। इस सिस्टम के प्रभाव से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हुई, जबकि मैदानी क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसी वजह से हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली के मौसम में अचानक गिरावट दर्ज की गई।
तापमान की बात करें तो दिन और रात दोनों में कमी आई है। महेंद्रगढ़ में न्यूनतम तापमान 14.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि भिवानी में अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस रहा। इस गिरावट से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली है।
हालांकि आम जनता के लिए यह मौसम सुखद हो सकता है, लेकिन किसानों के लिए यह चिंता का कारण बन गया है। गेहूं की फसल कटाई के समय इस तरह की बारिश और ओलावृष्टि से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है। इससे किसानों की आय पर भी सीधा असर पड़ सकता है।
प्रशासन और कृषि विभाग की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नुकसान का आकलन किया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जा सके। वहीं किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें और मौसम के अपडेट पर नजर बनाए रखें।
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बीच-बीच में बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में किसानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, हरियाणा में अचानक बदले मौसम ने एक ओर जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया है। बारिश और ओलावृष्टि का यह दौर किसानों के लिए मुश्किलें लेकर आया है और अब सभी की नजरें आने वाले मौसम और सरकार की राहत योजनाओं पर टिकी

