
फतेहाबाद के निजी स्कूल में छेड़छाड़ के आरोप से मचा बवाल: अभिभावकों का प्रदर्शन, जांच के घेरे में शिक्षक और प्रबंधन
हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव फूलां स्थित एक निजी स्कूल में छात्राओं के साथ कथित छेड़छाड़ के आरोप सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। जैसे ही बच्चियों ने अपने परिजनों को स्कूल में हो रही आपत्तिजनक हरकतों के बारे में बताया, परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते स्कूल परिसर के बाहर अभिभावकों की भीड़ जमा हो गई और जमकर हंगामा हुआ। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।

तीन महीनों से चल रहा था कथित उत्पीड़न
परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटियां पिछले करीब तीन महीनों से मानसिक दबाव में थीं। बच्चियों के अनुसार, कुछ शिक्षक उन्हें अनुचित तरीके से छूते थे और आपत्तिजनक व्यवहार करते थे। शुरुआत में बच्चियां डर के कारण चुप रहीं, लेकिन जब मामला बढ़ने लगा तो उन्होंने घर पर सच्चाई बताई।
अभिभावकों का कहना है कि यह केवल एक-दो छात्राओं का मामला नहीं है, बल्कि कई बच्चियों ने समान शिकायतें की हैं। इसी वजह से अभिभावकों ने सामूहिक रूप से स्कूल पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
प्रिंसिपल को दी थी जानकारी, पर कार्रवाई नहीं?
परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चियों ने स्कूल की प्रिंसिपल को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया था। लेकिन कथित तौर पर उन्हें चुप रहने की सलाह दी गई। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत स्तर की गलती नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही का भी मामला बन सकता है।
कुछ अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला शिक्षिकाओं को शिकायत की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्कूल बंद कराने की मांग
घटना के बाद गुस्साए अभिभावकों ने स्कूल को बंद कराने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती।
अस्पताल के बाहर भी परिजनों ने प्रदर्शन किया, जहां कुछ छात्राओं का मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस ने भीड़ को शांत कराया और भरोसा दिलाया कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी।
पुलिस और महिला थाना की सक्रियता
हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय सदर थाना पुलिस और महिला पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बच्चियों और उनके परिजनों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई गई, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट सहित सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा।
जांच में मेडिकल रिपोर्ट, छात्राओं के बयान और स्कूल स्टाफ से पूछताछ अहम भूमिका निभाएंगे। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले में पारदर्शिता बरती जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
स्कूल प्रबंधन की सफाई
स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि संस्था में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अनुचित हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रबंधन ने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई शिक्षक दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने अपील की कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचा जाए।
बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास का आधार भी होते हैं। ऐसे में यदि स्कूल परिसर में ही बच्चियां असुरक्षित महसूस करें, तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हर स्कूल में आंतरिक शिकायत समिति, सीसीटीवी निगरानी, नियमित काउंसलिंग और बच्चों के लिए जागरूकता सत्र अनिवार्य होने चाहिए। साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति से पहले उनके पृष्ठभूमि सत्यापन की प्रक्रिया सख्त होनी चाहिए।
परिजनों की भावनाएं
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य के लिए स्कूल भेजते हैं। यदि वहीं उनके साथ गलत व्यवहार हो, तो यह भरोसे को तोड़ने जैसा है। कई अभिभावकों की आंखों में आंसू थे और वे प्रशासन से जल्द न्याय की मांग कर रहे थे।
कुछ परिजनों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक आरोपी शिक्षकों को निलंबित किया जाए और स्कूल प्रशासन की भूमिका की भी जांच हो।
आगे की राह
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस द्वारा दर्ज बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषियों को कड़ी सजा मिल सकती है।
साथ ही यदि जांच में कोई लापरवाही या साक्ष्य छिपाने की कोशिश सामने आती है, तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।
निष्कर्ष
फतेहाबाद के इस निजी स्कूल में सामने आया मामला बेहद संवेदनशील है। एक ओर बच्चियों की सुरक्षा और न्याय की मांग है, तो दूसरी ओर स्कूल अपनी सफाई दे रहा है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष और त्वरित जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
समाज, प्रशासन और शिक्षा संस्थानों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले। यह घटना एक चेतावनी भी है कि बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और हर स्तर पर सुरक्षा तंत्र मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

