
प्रतापगढ़ में 5 साल की बच्ची की हत्या, मां-बाप का खौफनाक सच उजागर
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों पर भरोसा करने वालों को भी झकझोर कर रख दिया है। पांच साल की मासूम आयशा की हत्या के मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस वारदात की परतें खुलती चली गईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस पिता के कंधों पर बच्ची की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही अपनी दूसरी पत्नी के साथ मिलकर इस जघन्य अपराध में शामिल निकला।

यह मामला नगर कोतवाली क्षेत्र के दहिलामऊ से जुड़ा है, जहां आयशा अपनी सगी मां आसमा बानो के साथ रहती थी। पुलिस के अनुसार, करीब 10 से 12 दिन पहले बच्ची का पिता नियाजुद्दीन उसे अपने साथ यह कहकर ले गया कि वह आयशा को उसके दादा-दादी से मिलवाने के लिए मांधाता के शोभीपुर गांव ले जा रहा है। मां ने भी भरोसा करते हुए बच्ची को पिता के साथ भेज दिया, लेकिन उसे क्या पता था कि यह सफर उसकी बेटी की जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
पुलिस जांच में सामने आया कि नियाजुद्दीन की दूसरी पत्नी साबिया बानो को आयशा की मौजूदगी खटक रही थी। उसे यह डर सता रहा था कि अगर बच्ची घर में रही, तो भविष्य में नियाजुद्दीन अपनी पहली पत्नी आसमा को भी वापस घर ला सकता है। इसी आशंका और असुरक्षा की भावना ने उसके मन में इतनी गहरी जगह बना ली कि उसने मासूम को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।
बताया जा रहा है कि साबिया ने अपने पति नियाजुद्दीन को भी इस साजिश में शामिल कर लिया। दोनों ने मिलकर ठंडे दिमाग से हत्या की योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक, दो दिन पहले आयशा का शव घर की छत पर संदिग्ध हालत में मिला था। शुरुआत में परिवार ने बच्ची के लापता होने की बात कहकर आसपास तलाश का नाटक भी किया, ताकि किसी को उन पर शक न हो।
मामले ने उस वक्त नया मोड़ लिया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बच्ची की मौत दम घुटने यानी एस्फिक्सिया से हुई है। यह कोई हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। इसके बाद पुलिस ने शक के आधार पर परिवार के लोगों से सख्ती से पूछताछ शुरू की।
पूछताछ के दौरान सौतेली मां साबिया बानो टूट गई और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने आयशा का मुंह और नाक इतनी जोर से दबाया कि उसकी सांसें बंद हो गईं। मासूम ने छटपटाते हुए दम तोड़ दिया। हत्या के बाद साबिया ने शव को घर की छत पर ले जाकर लिटा दिया और फिर खुद ही बच्ची को ढूंढने का नाटक करने लगी, ताकि मामला सामान्य लगे और किसी को उस पर शक न हो।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पिता नियाजुद्दीन को पहले से थी। इतना ही नहीं, उसने हत्या के बाद सबूत छिपाने और कहानी गढ़ने में भी अपनी पत्नी का साथ दिया। यही वजह रही कि जांच का दायरा बढ़ने पर दोनों की भूमिका संदिग्ध होती चली गई।
मृतका की सगी मां आसमा बानो को जब बेटी की मौत की खबर मिली तो वह बदहवास हो गई। उसने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और अपनी बेटी की हत्या की आशंका जताई। मां की तहरीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश तेज कर दी।
अपर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र लाल ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर नियाजुद्दीन और साबिया बानो को परसरामपुर स्थित एक मदरसे के पास से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।
इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। गांव और आसपास के लोग इस बात से स्तब्ध हैं कि कोई पिता अपनी ही बेटी के साथ ऐसा कर सकता है। मासूम आयशा की मौत ने एक बार फिर घरेलू रिश्तों के भीतर छिपे खतरनाक पहलुओं को उजागर कर दिया है।
पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और यदि कोई अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस हृदयविदारक घटना ने पूरे प्रतापगढ़ जिले को शोक और आक्रोश से भर दिया है। पांच साल की मासूम, जो अभी ठीक से दुनिया को समझ भी नहीं पाई थी, अपनों की साजिश का शिकार बन गई — और यही इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक सच है।



