
प्यार से शुरू हुआ रिश्ता, बरेली जंक्शन पर टूटा भरोसा—पत्नी को छोड़ चार माह के बेटे संग फरार हुआ पति
बरेली: रिश्तों में भरोसे की डोर जब टूटती है तो उसके असर सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे परिवार को झकझोर देते हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली से सामने आया एक मामला इसी कड़वी सच्चाई को बयां करता है। यहां एक युवक अपनी पत्नी को रेलवे स्टेशन पर अकेला छोड़कर चार महीने के मासूम बेटे को लेकर फरार हो गया। घटना ने न केवल महिला को असहाय बना दिया, बल्कि एक मासूम बच्चे के भविष्य को भी अनिश्चितता में डाल दिया है।

दो साल पहले प्यार से बंधे थे रिश्ते
मामले की शुरुआत करीब दो साल पहले हुई थी, जब मऊ जिले के सराय लखनवी थाना क्षेत्र के सलाहाबाद गांव की रहने वाली फातिमा की मुलाकात बरेली के नवाबगंज क्षेत्र के सरदार नगर निवासी आशीष से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह कर लिया।
बताया जाता है कि शादी के बाद आशीष ने अपना नाम बदलकर रहमान रख लिया और दोनों ने साथ मिलकर नई जिंदगी शुरू की। शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य रहा और दोनों सरदार नगर इलाके में साथ रहते थे।
रिश्ते में आई दरार
समय बीतने के साथ दोनों के रिश्ते में तनाव आने लगा। पारिवारिक परिस्थितियों और आपसी मतभेदों के चलते फातिमा अपने मायके लौट गई। वह पिछले पांच महीनों से वहीं रह रही थी। इसी दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया, जिससे परिवार को उम्मीद थी कि अब दोनों के रिश्ते में सुधार आएगा।
सुलह का वादा और सफर
20 अप्रैल को आशीष अपने एक दोस्त कपिल के साथ फातिमा के मायके पहुंचा। उसने पत्नी को भरोसा दिलाया कि वह उसे और बच्चे को अपने साथ वापस घर ले जाना चाहता है। उसने यह भी कहा कि वह नई शुरुआत करना चाहता है और पुरानी गलतियों को सुधारना चाहता है।
पति की बातों पर भरोसा करते हुए फातिमा उसके साथ चलने को तैयार हो गई। तीनों ट्रेन से बरेली के लिए रवाना हुए। रास्ते भर सब कुछ सामान्य लग रहा था, जिससे महिला को किसी धोखे का अंदेशा नहीं हुआ।
स्टेशन पर अचानक बदला मंजर
जब वे बरेली जंक्शन पहुंचे, तब घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। आरोप है कि आशीष ने पत्नी से कहा कि वह बच्चे के लिए कुछ जरूरी सामान लेने जा रहा है और जल्द ही लौट आएगा।
फातिमा ने स्टेशन पर उसका इंतजार करना शुरू किया। कुछ मिनटों का इंतजार धीरे-धीरे घंटों में बदल गया, लेकिन वह वापस नहीं लौटा। तब उसे एहसास हुआ कि उसके साथ बड़ा धोखा हुआ है। उसका पति चार महीने के बेटे को लेकर गायब हो चुका था।
ससुराल में भी नहीं मिला सहारा
घबराई और परेशान फातिमा किसी तरह अपने ससुराल सरदार नगर पहुंची, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली। आरोप है कि ससुरालवालों ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया और घर से बाहर निकाल दिया।
इस घटना ने उसकी स्थिति और भी दयनीय बना दी, क्योंकि अब उसके पास न तो पति का साथ था और न ही ससुराल का सहारा।
पुलिस के दरवाजे पर उम्मीद
पीड़िता ने नवाबगंज थाने में पहुंचकर अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उसका कहना है कि वह पिछले तीन दिनों से थाने के चक्कर काट रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
उसके पिता ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, ताकि प्रशासन इस पर तुरंत ध्यान दे और कार्रवाई सुनिश्चित करे।
बच्चे को बेचने की धमकी
मामले को और गंभीर बनाते हुए फातिमा ने आरोप लगाया है कि उसका पति बच्चे को बेचने की धमकी दे रहा है। इस आरोप ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है और बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पुलिस जांच जारी
नवाबगंज थाना पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वह फिलहाल अपने घर पर मौजूद नहीं है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक पहलू भी अहम
यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि समाज में बदलते रिश्तों की सच्चाई को भी उजागर करती है। प्रेम विवाह जैसे फैसले अक्सर भावनाओं के आधार पर लिए जाते हैं, लेकिन जब जिम्मेदारियां सामने आती हैं, तो कई रिश्ते टूटने लगते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार का सहयोग और समझदारी बेहद जरूरी होती है। जल्दबाजी में लिए गए फैसले और रिश्तों में पारदर्शिता की कमी कई बार गंभीर परिणाम पैदा कर देती है।
महिला की मौजूदा स्थिति
फातिमा इस समय मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में है। एक तरफ उसका पति उसे छोड़कर चला गया, दूसरी तरफ उसका बच्चा उससे छिन गया। ऐसे में उसे न केवल कानूनी सहायता की जरूरत है, बल्कि सामाजिक और मानसिक सहयोग की भी आवश्यकता है।
प्रशासन से उम्मीद
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ी उम्मीद प्रशासन से है। पीड़िता चाहती है कि उसका बच्चा सुरक्षित वापस मिले और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही, उसे न्याय दिलाने के लिए पुलिस को तेजी से कदम उठाने की जरूरत है।
निष्कर्ष
बरेली की यह घटना रिश्तों में भरोसे के टूटने की एक दर्दनाक मिसाल है। एक महिला, जिसने प्यार के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया, आज खुद को अकेला और असहाय महसूस कर रही है।
यह मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि रिश्तों में सिर्फ भावनाएं ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, भरोसा और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। अब यह देखना बाकी है कि कानून और प्रशासन इस पीड़िता को कितना और कितनी जल्दी न्याय दिला पाते हैं।



