
पुलिस बनकर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा, 8 आरोपी गिरफ्तार
महाराष्ट्र के कल्याण शहर में पुलिस का रूप धारण कर लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। कोलसेवाडी पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लाखों रुपये की नकदी, दो स्कॉर्पियो गाड़ियां और कई मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस कार्रवाई के बाद इलाके में सक्रिय ऐसे गिरोहों को लेकर पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला करीब पांच लाख रुपये की ठगी से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक व्यक्ति को पैसों का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और फिर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उससे नकदी लेकर फरार हो गए। हालांकि पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच की मदद से सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता दीपक शिंदे पुणे के वाघोली इलाके के निवासी हैं। कुछ लोगों ने उनसे संपर्क कर एक आकर्षक प्रस्ताव दिया। आरोपियों ने दीपक को बताया कि उनके पास छोटे नोटों की बड़ी मात्रा है और यदि वह पांच लाख रुपये देंगे तो बदले में उन्हें सात लाख रुपये दिए जाएंगे। यह रकम दस, पचास और सौ रुपये के नोटों में देने की बात कही गई थी।
लालच में आकर दीपक शिंदे इस सौदे के लिए तैयार हो गए। आरोपियों ने उन्हें कल्याण पूर्व क्षेत्र में बुलाया और तय समय पर विठ्ठलवाडी रेलवे स्टेशन के पास मिलने के लिए कहा। तय योजना के अनुसार दीपक शिंदे पांच लाख रुपये लेकर वहां पहुंचे। उनके साथ एक अन्य व्यक्ति भी था जो पैसों के लेन-देन में मदद करने वाला बताया गया।
जैसे ही वे वहां पहुंचे, आरोपियों ने उन्हें सुट्टे पैसे देने का बहाना बनाया। इसी दौरान अचानक एक स्कॉर्पियो गाड़ी वहां आकर रुकी। गाड़ी से तीन से चार लोग उतरे और खुद को पुलिस अधिकारी बताने लगे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू कर दी और माहौल ऐसा बना दिया जैसे कोई बड़ी जांच चल रही हो।
आरोपियों ने पुलिस की वर्दी और रौब का इस्तेमाल करते हुए दीपक शिंदे और उनके साथ आए व्यक्ति को डराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यहां अवैध तरीके से पैसों का लेन-देन हो रहा है और इसके लिए उन्हें पूछताछ के लिए थाने चलना होगा। इसी बहाने उन्होंने पैसे बदलने वाले व्यक्ति को अपनी गाड़ी में बैठा लिया।
इसी बीच आरोपियों ने चालाकी से दीपक शिंदे के हाथ में मौजूद बैग छीन लिया, जिसमें पांच लाख रुपये रखे हुए थे। इसके बाद आरोपी स्कॉर्पियो में बैठकर तेजी से वहां से फरार हो गए। कुछ ही पलों में पूरी घटना को अंजाम देकर आरोपी मौके से गायब हो गए।
घटना के बाद पीड़ित दीपक शिंदे ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और पूरी घटना की जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोलसेवाडी पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इस मामले में क्राइम नंबर 103/2026 के तहत ठगी और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने मामले की जांच के लिए तकनीकी साधनों का सहारा लिया। मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी एक स्कॉर्पियो गाड़ी में पुराने पुणे हाईवे की ओर भाग रहे हैं।
जैसे ही यह जानकारी मिली, पुलिस ने तुरंत आसपास के थानों को अलर्ट कर दिया। तलेगांव दाभाडे पुलिस को भी सूचना दी गई। इसके बाद सोमाटणे फाटा टोल नाके पर नाकाबंदी की गई और संदिग्ध स्कॉर्पियो गाड़ी को रोकने की तैयारी की गई।
कुछ ही देर बाद पुलिस को वही स्कॉर्पियो गाड़ी दिखाई दी, जिसका नंबर एमएच-04-जीडी-7823 था। पुलिस ने तुरंत गाड़ी को घेर लिया और उसमें सवार चार आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। गाड़ी की तलाशी लेने पर नकदी और अन्य सामान भी बरामद हुआ।
उधर गिरोह के बाकी सदस्य दूसरी दिशा में भागने की कोशिश कर रहे थे। जांच के दौरान पता चला कि वे आलांदी मार्ग से होते हुए अहिल्यानगर यानी अहमदनगर की ओर जा रहे हैं। इस सूचना के आधार पर राहुरी पुलिस थाने को सतर्क किया गया और वहां भी नाकाबंदी कर दी गई।
राहुरी पुलिस की मदद से बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया गया। इस तरह पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरोह के सभी आठ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से दो लाख छत्तीस हजार रुपये नकद, अपराध में इस्तेमाल की गई दो स्कॉर्पियो गाड़ियां और नौ मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में संजय नागोजीराव भोसले, गौसपाक गुलाम हुसैन शेख, सोमीनाथ तुळशीराम गायकवाड, अरविंद नागनाथ जॉजट, उमाशंकर हनुमान प्रसाद पांडे उर्फ पप्पू, शरद कुमार मोहन, नरेश फट्टू शर्मा और लक्ष्मण उर्फ प्रदीप विश्वनाथ धनवे शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह काफी समय से इस तरह की ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था। आरोपी पहले लोगों को पैसे बदलने या ज्यादा रकम देने का लालच देते थे। इसके बाद मौके पर पहुंचकर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराने-धमकाने का नाटक करते थे और इसी बहाने लोगों से नकदी लेकर फरार हो जाते थे।
इस पूरे ऑपरेशन को पुलिस उपायुक्त अतुल झेंडे, सहायक पुलिस आयुक्त कल्याणजी घेटे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हेमंत गुरख और पुलिस निरीक्षक गणेश न्हायदे के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। कोलसेवाडी पुलिस की टीम ने लगातार तकनीकी जांच और सतर्कता के जरिए आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य संभावित साथियों और उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने पहले किन-किन जगहों पर इस तरह की वारदात को अंजाम दिया है।
फिलहाल सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे भी कई अहम खुलासे हो सकते हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि इस तरह के लालच या संदिग्ध सौदों से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
