
निकिता मौत मामला: परिजनों की गुहार पर सख्ती, आरोपी पुलिसकर्मी पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की तैयारी
हरियाणा के अंबाला में 25 वर्षीय युवती निकिता की सड़क दुर्घटना में हुई मौत अब कानूनी मोड़ ले चुकी है। इस मामले में कथित रूप से लापरवाही से वाहन चलाने वाले आरोपी हेड कांस्टेबल के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धारा लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह निर्णय तब सामने आया जब मृतका के परिजन राज्य के वरिष्ठ मंत्री अनिल विज से मिले और न्याय की मांग की।

जानकारी के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब एक तेज रफ्तार कार ने ई-रिक्शा को टक्कर मार दी, जिसमें निकिता सवार थीं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया।
परिवार का आरोप है कि वाहन चला रहा हेड कांस्टेबल नशे की हालत में था और उसने लापरवाही से गाड़ी चलाई। उनका कहना है कि यदि चालक ने सावधानी बरती होती तो उनकी बेटी आज जीवित होती। परिजनों ने शुरुआत में पुलिस कार्रवाई धीमी होने की भी शिकायत की और आशंका जताई कि आरोपी पुलिसकर्मी होने के कारण मामले को दबाया जा सकता है।
इसी चिंता को लेकर परिवार ने मंत्री अनिल विज से मुलाकात की। उन्होंने मंत्री को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार, मंत्री के हस्तक्षेप के बाद मामले में तेजी आई और अधिकारियों ने आरोपी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धारा जोड़ने का निर्णय लिया।
अब पुलिस इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के समय चालक की स्थिति, मेडिकल जांच रिपोर्ट, वाहन की गति और ब्रेकिंग दूरी जैसे तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों की फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। यदि शराब पीकर वाहन चलाने की पुष्टि होती है, तो आरोपी के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।
इस मामले ने सड़क सुरक्षा और जिम्मेदारी के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नशे में ड्राइविंग देश में सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है। जब नियमों का पालन कराने वाले ही नियम तोड़ते हैं, तो समाज में गलत संदेश जाता है। ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई जरूरी होती है, ताकि कानून का भरोसा बना रहे।
निकिता के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी मेहनती और सपने देखने वाली युवती थी। उसकी असमय मौत ने परिवार को झकझोर दिया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में कराई जाए और दोषी को जल्द सजा दिलाई जाए। परिवार का कहना है कि उन्हें केवल न्याय चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न सहनी पड़े।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि शहर में तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग के मामले बढ़ रहे हैं। कई लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा नियमों के सख्त पालन और नियमित जांच अभियान चलाने की मांग की है। उनका मानना है कि यदि नियमों का पालन कड़ाई से कराया जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी पारदर्शिता से की जाएगी। उन्होंने कहा कि आरोपी का पद या पहचान जांच को प्रभावित नहीं करेगी और कानून सभी के लिए समान है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
इस बीच, सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। कई संगठनों ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है, खासकर तब जब चालक सरकारी कर्मचारी हो। उनका कहना है कि सख्त कार्रवाई से ही व्यवस्था में भरोसा कायम रहेगा।
फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है। परिजन उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन और न्याय व्यवस्था मिलकर दोषी को सजा दिलाएंगे। मंत्री स्तर पर हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई तेज होने से परिवार को कुछ उम्मीद जरूर जगी है।
अब पूरे मामले पर नजर पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और अदालत की आगामी प्रक्रिया पर टिकी है। यदि सभी साक्ष्य परिवार के आरोपों की पुष्टि करते हैं, तो यह मामला सड़क सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर एक मिसाल बन सकता है।

