
नासिक IT कंपनी केस: चार साल तक अंदर ही अंदर चलता रहा उत्पीड़न का नेटवर्क, 6 गिरफ्तार; SIT हर एंगल से कर रही जांच
महाराष्ट्र के नासिक में एक प्रमुख आईटी कंपनी से जुड़ा मामला सामने आने के बाद कॉर्पोरेट दुनिया में हलचल मच गई है। आरोप है कि कंपनी के भीतर पिछले चार वर्षों से यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसी घटनाएं होती रहीं, लेकिन यह सब लंबे समय तक सामने नहीं आ सका। अब जब मामला उजागर हुआ है, तो नासिक पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, यह घटनाएं 2022 से 2026 के बीच अलग-अलग समय पर हुईं। अब तक कुल आठ महिला कर्मचारियों और एक पुरुष कर्मचारी ने आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इन शिकायतों के आधार पर 9 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पीड़ितों में 6 अविवाहित और 2 विवाहित महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार और दबाव का सामना करने की बात कही है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और आसिफ अंसारी शामिल हैं। सभी की उम्र 22 से 30 वर्ष के बीच है और इनमें से अधिकांश कंपनी में टीम लीडर जैसे पदों पर कार्यरत थे। पुलिस का कहना है कि इन पदों का इस्तेमाल करते हुए आरोपियों ने अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों पर दबाव बनाया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए देवेंद्र फडणवीस ने विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के आदेश दिए हैं। यह टीम सहायक पुलिस आयुक्त (क्राइम) संदीप मिटके के नेतृत्व में काम कर रही है। SIT को निर्देश दिया गया है कि वह मामले के हर पहलू की गहराई से जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित आईटी कंपनी में लगभग 300 कर्मचारी कार्यरत हैं। इतने बड़े कार्यबल के बावजूद, यदि इस तरह की घटनाएं लंबे समय तक बिना उजागर हुए चलती रहीं, तो यह कंपनी के आंतरिक सिस्टम और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठाता है। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या कंपनी प्रबंधन को इन घटनाओं की जानकारी थी या नहीं।
इस मामले का एक संवेदनशील पहलू यह भी है कि एक पुरुष कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि उसे जबरन नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। इस शिकायत ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है, क्योंकि इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन शामिल है। पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि यह एक अलग घटना थी या किसी बड़े पैटर्न का हिस्सा।
राज्य के मंत्री नितेश राणे ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क या बाहरी समर्थन मौजूद है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी बड़े षड्यंत्र की पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा और नैतिकता से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। किसी भी कॉर्पोरेट संस्था में कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना जरूरी होता है। इसके लिए कंपनियों में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और सख्त नीतियां लागू की जाती हैं, लेकिन अगर इनका सही तरीके से पालन न हो, तो इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।
इस घटना के बाद कंपनी के अन्य कर्मचारियों में भी डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। कई लोग अब खुलकर सामने आकर अपनी बात रखने की सोच रहे हैं। इससे जांच एजेंसियों को और अधिक जानकारी मिलने की संभावना है, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। उनके मोबाइल फोन, ईमेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है। साथ ही, यह भी जांचा जा रहा है कि क्या इस पूरे मामले में किसी प्रकार की बाहरी फंडिंग या समर्थन शामिल था।
इस केस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कार्यस्थल पर होने वाले उत्पीड़न के मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कंपनियों को अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
अंत में, नासिक का यह मामला एक चेतावनी के रूप में सामने आया है। यह दिखाता है कि अगर समय रहते गलत गतिविधियों पर रोक न लगाई जाए, तो वे गंभीर रूप ले सकती हैं। अब सभी की नजर SIT की जांच पर टिकी है, जिससे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे होंगे और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।
