
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सख्त फैसला: रेवाड़ी कोर्ट ने जीजा को सुनाई 20 साल कैद, भारी जुर्माना भी लगाया
हरियाणा के रेवाड़ी जिले में नाबालिग के साथ यौन शोषण के एक गंभीर मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी जीजा को दोषी करार दिया है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और उस पर 2 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा न करने की स्थिति में उसे दो वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अदालत का सख्त संदेश
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश लोकेश गुप्ता ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं और ऐसे मामलों में सख्त दंड आवश्यक है ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और समाज में डर का माहौल बने।
कैसे शुरू हुआ मामला
एसपी कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 14 जून 2023 को जिले के एक गांव की रहने वाली नाबालिग ने पुलिस को शिकायत दी थी। उसने बताया कि उसकी दो बहनों की शादी वर्ष 2015 में हो चुकी थी। जब वह नौवीं कक्षा में पढ़ रही थी और छुट्टियों में बहन के घर गई थी, तब पहली बार उसके जीजा ने उसके साथ जबरदस्ती की।
उस समय बहन घर पर नहीं थी और आरोपी ने मौके का फायदा उठाया। घटना के बाद उसने पीड़िता को धमकाया कि यदि उसने किसी को बताया तो वह उसकी बहन को छोड़ देगा और उसके पिता व भाई को नुकसान पहुंचाएगा। डर के कारण पीड़िता चुप रही।
लगातार दबाव और धमकियां
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि घटना के बाद आरोपी कई बार स्कूल के बाहर उसका पीछा करता और संबंध बनाने का दबाव डालता। जब वह 12वीं कक्षा में थी, तब 1 जनवरी 2023 को स्कूल से लौटते समय आरोपी ने उसे जबरदस्ती बाइक पर बैठाया और रेवाड़ी के एक होटल में ले गया। वहां उसने फिर से अपराध किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
हरिद्वार यात्रा से लौटते समय भी वारदात
पीड़िता के बयान के अनुसार, 4 जून 2023 को वह अपनी बहन और आरोपी के साथ हरिद्वार गई थी। लौटते समय वे सोनीपत में एक किराये के मकान में रुके। रात के समय आरोपी ने फिर धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
इस घटना के बाद पीड़िता मानसिक रूप से परेशान रहने लगी। घरवालों ने जब उसके व्यवहार में बदलाव देखा तो कारण पूछा। तब उसने अपनी मां को पूरी बात बताई।
पुलिस कार्रवाई और जांच
पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और धमकी देने की धाराओं में मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। महिला थाना पुलिस ने जांच के दौरान पीड़िता का बयान दर्ज किया, मेडिकल रिपोर्ट जुटाई और अन्य साक्ष्य एकत्र किए।
जांच पूरी होने के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता सहित कई गवाह पेश किए और अदालत के सामने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए।
साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ आरोप साबित होते हैं। अदालत ने कहा कि पीड़िता का बयान विश्वसनीय है और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य अपराध की पुष्टि करते हैं। इसके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई गई।
पीड़िता के लिए न्याय का संदेश
यह फैसला न केवल पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज के लिए भी संदेश है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालतों द्वारा ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और सख्त सजा से पीड़ित परिवारों को भरोसा मिलता है।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पॉक्सो कानून के तहत सख्त सजा का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को सामने आने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें सुरक्षा देना बेहद जरूरी है।
समाज के लिए सीख
यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि परिवार के भीतर होने वाले अपराध अक्सर लंबे समय तक छिपे रहते हैं क्योंकि पीड़ित डर और सामाजिक दबाव में रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को खुलकर बात करने का माहौल देना और स्कूलों व परिवारों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

