
डेरा ब्यास प्रमुख और मजीठिया की जेल मुलाकात पर सियासी घमासान तेज
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। डेरा ब्यास प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जेल में हुई मुलाकात को लेकर अब आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के बाद अब आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता और मजीठा से उम्मीदवार तलबीर सिंह गिल ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान देकर सियासी बहस को और हवा दे दी है।

तलबीर सिंह गिल ने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि डेरा ब्यास प्रमुख और बिक्रम मजीठिया के बीच जेल में हुई मुलाकात कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक साजिश छिपी हुई है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका संदिग्ध है और BJP ने ही यह सब “मैनेज” करवाया है। गिल ने कहा कि पंजाब की जनता सब कुछ समझती है और सभी को पता है कि बाबा जी आखिर जेल में क्यों गए थे।
आप नेता ने दावा किया कि आने वाले दिनों में इस मुलाकात से जुड़े कई और खुलासे सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि जब इतनी गोपनीयता के साथ जेल में किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मुलाकात होती है, तो यह मान लेना गलत नहीं होगा कि इसके पीछे कोई न कोई राजनीतिक सौदेबाजी जरूर है। तलबीर गिल ने कहा, “दोनों के बीच जो बातचीत हुई है, वह धीरे-धीरे सामने आएगी। यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी।”
तलबीर सिंह गिल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस ट्वीट का भी समर्थन किया, जिसमें मान ने इस मुलाकात पर सवाल खड़े किए थे। गिल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में कुछ भी गलत नहीं कहा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बिक्रम मजीठिया दोषी हैं या नहीं, इसका फैसला अदालत करेगी, न कि कोई धार्मिक या आध्यात्मिक गुरु। गिल ने कहा, “न्यायपालिका ही तय करेगी कि मजीठिया पर लगे आरोप सही हैं या नहीं। बाबा जी किसी के दोषी या निर्दोष होने का प्रमाणपत्र नहीं दे सकते।”
दरअसल, यह पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब हाल ही में बिक्रम सिंह मजीठिया को जेल से जमानत पर रिहा किया गया। मजीठिया पर ड्रग्स मामले से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे और वे काफी समय तक न्यायिक हिरासत में रहे। जेल से रिहा होने के बाद मजीठिया ने पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की गई और उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया।
मजीठिया की रिहाई से ठीक एक दिन पहले डेरा ब्यास प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों उनसे जेल में मिलने पहुंचे थे। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए। विपक्ष ने इसे सामान्य मुलाकात बताया, जबकि आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा करार दिया।
जेल से बाहर आते ही बिक्रम मजीठिया ने एक और सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि जब बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों उनसे मिलने जेल आए थे, उस दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था से समझौता किया गया। मजीठिया का आरोप है कि बाबा जी की सिक्योरिटी को जेल के अंदर उनके साथ जाने की अनुमति नहीं दी गई, जो सुरक्षा मानकों के खिलाफ है। उन्होंने इसे गंभीर चूक बताते हुए कहा कि इससे उनकी और बाबा जी दोनों की सुरक्षा को खतरा हो सकता था।
मजीठिया ने आरोप लगाया कि यह सब जानबूझकर किया गया, ताकि इस मुलाकात को लेकर कोई सवाल न उठे और सारी प्रक्रिया को पर्दे के पीछे रखा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार इस पूरे मामले पर सच छिपाने की कोशिश कर रही है।
वहीं आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि मजीठिया अब जेल से बाहर आने के बाद खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। तलबीर सिंह गिल ने कहा कि मजीठिया अपनी रिहाई को राजनीतिक जीत के तौर पर पेश कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि मामला अभी अदालत में है और कानून अपना काम करेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डेरा ब्यास का पंजाब की राजनीति में हमेशा से प्रभाव रहा है। ऐसे में डेरा प्रमुख की किसी बड़े राजनीतिक नेता से जेल में मुलाकात होना स्वाभाविक रूप से विवाद को जन्म देता है। खासकर तब, जब यह मुलाकात ऐसे समय में हो, जब राज्य में राजनीतिक तापमान पहले से ही काफी गर्म हो।
आम आदमी पार्टी का आरोप है कि विपक्षी दल और केंद्र की राजनीति पंजाब की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। वहीं अकाली दल और भाजपा का कहना है कि आम आदमी पार्टी बेवजह धार्मिक संस्थाओं को राजनीति में घसीट रही है।
फिलहाल, डेरा ब्यास प्रमुख और बिक्रम मजीठिया की जेल मुलाकात को लेकर सियासी बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। एक ओर आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक स्टंट बता रहा है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे नए खुलासे होंगे, यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि इस कथित मुलाकात से जुड़े कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और इसका पंजाब की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।


