
डंकी रूट का जाल: बेटे को अमेरिका भेजने के नाम पर परिवार से 57 लाख ठगे, 24 देशों में भटकाने के बाद मैक्सिको में छोड़ा
हरियाणा के अंबाला जिले में विदेश भेजने के नाम पर बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। बेहतर भविष्य की उम्मीद में एक पिता ने अपनी जमीन और मकान तक बेच दिए, लेकिन एजेंटों ने बेटे को अमेरिका पहुंचाने के बजाय उसे महीनों तक अलग-अलग देशों में भटकाया और अंत में मैक्सिको में छोड़ दिया।

करीब छह महीने तक खतरनाक रास्तों से गुजरते हुए युवक को 24 देशों में घुमाया गया। रास्ते में उसे कई बार मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। अंत में जब वह अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था, तब वहां की एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया और अगस्त 2025 में भारत वापस भेज दिया।
पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने दो एजेंटों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
विदेश भेजने का सपना बना मुसीबत
जानकारी के अनुसार पंजाब के पटियाला जिले के मोलगढ़ गांव निवासी जगीर सिंह अपने बेटे गुरजिंद्र सिंह को विदेश भेजना चाहते थे। गांव में कई युवाओं के विदेश जाकर काम करने के बाद उनका भी सपना था कि उनका बेटा अमेरिका जाकर अच्छी कमाई करेगा और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
इसी दौरान उनकी मुलाकात जनसूआ गांव निवासी अजीत सिंह से हुई। अजीत सिंह ने उन्हें कुछ एजेंटों के बारे में बताया जो युवाओं को विदेश भेजने का काम करते थे।
एजेंटों से हुई मुलाकात
अजीत सिंह के माध्यम से जगीर सिंह की मुलाकात पिहोवा निवासी जसविंदर सिंह और जनसूआ गांव निवासी मनदीप सिंह से कराई गई। दोनों ने दावा किया कि वे उनके बेटे को सुरक्षित तरीके से अमेरिका पहुंचा सकते हैं।
एजेंटों ने इसके लिए 45 लाख रुपये की मांग की। इतनी बड़ी रकम सुनकर परिवार हैरान रह गया। जब जगीर सिंह ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं, तो एजेंटों ने उन्हें जमीन बेचने की सलाह दी।
जमीन बेचने को किया मजबूर
परिवार के पास करीब एक किला छह कनाल और 12 मरले जमीन थी। एजेंटों ने कहा कि अगर वे जमीन बेच दें तो बेटे को विदेश भेजना आसान हो जाएगा।
बेटे के भविष्य को देखते हुए जगीर सिंह ने भारी मन से जमीन बेचने का फैसला किया। आरोप है कि एजेंटों ने पहले जमीन का बयाना करवाया और बाद में उसे किसी दूसरी महिला के नाम रजिस्ट्री करवा दी।
मकान का भी कराया बयाना
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जमीन बेचने के बाद भी एजेंटों की मांग खत्म नहीं हुई। उन्होंने परिवार से और पैसे मांगे।
इसके बाद परिवार के मकान का भी बयाना लिखवा लिया गया। कुछ पैसे नकद लिए गए और कुछ रकम बैंक खातों में डलवाई गई। इस तरह कुल मिलाकर परिवार से करीब 57 लाख रुपये वसूल लिए गए।
अगस्त 2024 में भेजा विदेश
जगीर सिंह के अनुसार 2 अगस्त 2024 को उन्हें पिहोवा स्थित कार्यालय में बुलाया गया। वहां एजेंटों ने कागजी औपचारिकताएं पूरी करवाईं।
इसके बाद उनके बेटे गुरजिंद्र सिंह को 21 अगस्त 2024 को विदेश भेज दिया गया। एजेंटों ने बताया कि उसे अमेरिका पहुंचाने की पूरी व्यवस्था कर दी गई है।
नीदरलैंड एयरपोर्ट पर रोका
विदेश पहुंचने के बाद गुरजिंद्र सिंह को सबसे पहले नीदरलैंड ले जाया गया। वहां उसे दो दिन तक एयरपोर्ट पर ही रोककर रखा गया।
इस दौरान एजेंटों ने परिवार पर जमीन की रजिस्ट्री जल्दी करवाने का दबाव बनाया। परिवार को डर था कि कहीं उनके बेटे को बीच रास्ते में छोड़ न दिया जाए, इसलिए उन्होंने रजिस्ट्री करवा दी।
खतरनाक सफर की शुरुआत
इसके बाद युवक का असली संघर्ष शुरू हुआ। आरोप है कि एजेंटों ने उसे हवाई यात्रा के बजाय अलग-अलग देशों की सीमाओं से होकर आगे बढ़ाया।
कभी उसे छोटी नावों में बैठाकर समुद्र पार कराया गया, तो कभी टैक्सी और अन्य वाहनों से सीमा पार करवाई गई।
इस तरह युवक को लगभग 24 देशों में घुमाया गया। पूरा सफर बेहद कठिन और जोखिम भरा था।
विरोध करने पर मारपीट
गुरजिंद्र सिंह ने कई बार इस खतरनाक यात्रा का विरोध किया। लेकिन एजेंटों के लोगों ने उसे धमकाया और कई बार मारपीट भी की।
उसे कहा गया कि अगर वह सहयोग नहीं करेगा तो उसे रास्ते में ही छोड़ दिया जाएगा।
करीब छह महीने तक वह अलग-अलग देशों में भटकता रहा।
मैक्सिको में बिताए नौ महीने
लंबे सफर के बाद युवक को मैक्सिको पहुंचाया गया। वहां भी उसकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं।
परिवार का आरोप है कि वहां भी उसके साथ मारपीट की गई और उसे एक कैंप में रहने के लिए मजबूर किया गया।
गुरजिंद्र सिंह करीब नौ महीने तक उस कैंप में रहा और लगातार अमेरिका पहुंचने की कोशिश करता रहा।
अमेरिका में पकड़ा गया युवक
आखिरकार जब उसने अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश की तो वहां की एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया।
जांच के बाद उसे अवैध तरीके से प्रवेश करने का दोषी पाया गया और हिरासत में ले लिया गया।
बाद में 28 अगस्त 2025 को उसे भारत वापस भेज दिया गया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
भारत लौटने के बाद गुरजिंद्र सिंह ने अपने परिवार को पूरी कहानी बताई। इसके बाद जगीर सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
नग्गल थाना पुलिस ने पिहोवा निवासी जसविंदर सिंह और जनसूआ गांव निवासी मनदीप सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
कई धाराओं में केस
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ इमीग्रेशन एक्ट के साथ-साथ आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
बढ़ता जा रहा डंकी रूट का खतरा
यह मामला उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो अवैध रास्तों से विदेश जाने का सपना देखते हैं।
डंकी रूट के जरिए विदेश भेजने वाले एजेंट अक्सर लोगों से भारी रकम वसूलते हैं और उन्हें खतरनाक रास्तों से ले जाते हैं।
कई बार ऐसे मामलों में लोग महीनों तक दूसरे देशों में फंसे रहते हैं और अंत में उन्हें वापस भेज दिया जाता है।
टूट गया परिवार का सपना
अंबाला के इस परिवार ने अपने बेटे के भविष्य के लिए अपनी पूरी संपत्ति दांव पर लगा दी थी।
लेकिन एजेंटों की धोखाधड़ी ने उनका सपना चकनाचूर कर दिया। अब परिवार न्याय की उम्मीद में पुलिस जांच का इंतजार कर रहा है।

