
घाट पर रोज़ी-रोटी की जंग बनी हिंसा—नाविकों के टकराव में पथराव, आधे घंटे तक दहशत
धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी Varanasi के घाटों पर एक बार फिर तनाव और हिंसा का नज़ारा देखने को मिला, जब नाव पर सवारी बैठाने को लेकर दो गुटों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि पथराव तक की नौबत आ गई। यह घटना न केवल स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी, बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी डर का कारण बन गई।

यह मामला आदमपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत Teliyanala Ghat का है, जो Prahlad Ghat के समीप स्थित है। शुक्रवार शाम घाट पर सामान्य चहल-पहल थी। नाविक अपनी-अपनी नावों के जरिए सवारियां बैठाने में जुटे थे, तभी अचानक दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में विवाद मामूली था, लेकिन कुछ ही देर में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल गरमा गया और देखते ही देखते पत्थर चलने लगे। घाट पर मौजूद लोग अचानक हुए इस घटनाक्रम से घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
करीब आधे घंटे तक तेलियानाला घाट से सक्काघाट तक का इलाका पूरी तरह से अराजकता की चपेट में रहा। इस दौरान न केवल पथराव हुआ, बल्कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई भी हुई। कुछ लोगों को हल्की चोटें भी आईं, हालांकि कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ।
सूचना मिलते ही Adampur Police Station की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दोनों गुटों को वहां से हटाया और इलाके में शांति बहाल कराई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ा हादसा टल गया।
घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। एक पक्ष की ओर से संगीता देवी ने आरोप लगाया कि उनके परिवार के सदस्य घाट पर अपनी नावों में सवारियां बैठा रहे थे, तभी दूसरे पक्ष के लोग वहां आए और विवाद करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष ने अचानक पथराव शुरू कर दिया, जिससे वहां अफरातफरी मच गई।
वहीं, दूसरे पक्ष के गोपी साहनी का कहना है कि यह विवाद एकतरफा नहीं था। उनका आरोप है कि घाट पर कुछ लोगों ने अपना दबदबा बना रखा है और वे अन्य नाविकों को काम करने से रोकते हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने अपनी नाव लगाने की कोशिश की, तो विवाद शुरू हुआ और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पथराव किसने शुरू किया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस घाट पर इस तरह की घटना हुई हो। इससे पहले भी कई बार नाविकों के बीच झगड़े, मारपीट और पथराव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। खासतौर पर सवारी बैठाने और नाव खड़ी करने को लेकर विवाद अक्सर होता रहता है।
कुछ नाविकों का कहना है कि घाट पर कुछ परिवारों का वर्चस्व है, जिनकी कई नावें यहां चलती हैं। वे नहीं चाहते कि कोई नया नाविक यहां काम करे। यदि कोई ऐसा करने की कोशिश करता है, तो उसे विरोध का सामना करना पड़ता है, जो कई बार हिंसा में बदल जाता है।
यह स्थिति प्रशासन के लिए भी चुनौती बनती जा रही है। Varanasi Ghats देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल शहर की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि पर्यटन उद्योग पर भी असर डाल सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है। इसके लिए घाटों पर नाव संचालन को लेकर स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए। साथ ही, नाविकों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए किसी समिति या संगठन की भी आवश्यकता है, जो विवादों को शांतिपूर्वक सुलझा सके।
पुलिस और प्रशासन ने भी इस दिशा में कदम उठाने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील घाटों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। साथ ही, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। दोनों पक्षों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे भविष्य में इस तरह के विवाद से बचें और कानून का पालन करें।
कुल मिलाकर, यह घटना केवल दो गुटों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह उस गहरी समस्या का संकेत है, जो घाटों पर लंबे समय से पनप रही है। रोज़गार की प्रतिस्पर्धा और आपसी मतभेद अब हिंसा का रूप लेने लगे हैं, जिसे समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
यदि प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर इस समस्या का समाधान नहीं निकालते, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। जरूरत है समझदारी, संवाद और सख्त नियमों की, ताकि घाटों पर शांति बनी रहे और शहर की गरिमा सुरक्षित रह सके।



