
खुले टैंक में डूबकर मासूम की मौत, दो अधिकारी सस्पेंड
हरियाणा के पलवल जिले में 11 वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरा दी है। कैलाश नगर स्थित बूस्टिंग स्टेशन के खुले पानी के टैंक में गिरने से शिवम नाम के बच्चे की मौत हो गई थी। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने तुरंत एक्शन लेते हुए एसडीओ और जेई को निलंबित करने के निर्देश दिए।

मंत्री के आदेश के बाद विभाग ने एसडीओ प्रीति और जेई रामबीर सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया, जबकि संबंधित एक्सईएन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। घटना ने स्थानीय लोगों में गहरा रोष पैदा कर दिया है और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खेलते-खेलते हादसे का शिकार हुआ शिवम
जानकारी के अनुसार, 26 फरवरी की शाम करीब साढ़े पांच बजे 11 वर्षीय शिवम घर से खेलने के लिए निकला था। वह कैलाश नगर में बन रहे गोविंद नगर बूस्टर परिसर के आसपास खेल रहा था। इसी दौरान वह बूस्टिंग स्टेशन के अंदर बने पानी के टैंक के पास पहुंच गया।
जांच में सामने आया कि टैंक पूरी तरह खुला हुआ था। उस पर न तो ढक्कन लगा था और न ही कोई सुरक्षा जाली लगाई गई थी। खेलते समय संतुलन बिगड़ने से शिवम सीधे पानी से भरे टैंक में गिर गया। आसपास कोई सुरक्षाकर्मी या चेतावनी व्यवस्था न होने के कारण बच्चे को समय पर बाहर नहीं निकाला जा सका और उसकी डूबने से मौत हो गई।
घटना की खबर मिलते ही इलाके में मातम छा गया। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों ने भी इस हादसे को घोर लापरवाही का परिणाम बताया।
मंत्री ने लिया सख्त संज्ञान
घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री रणबीर गंगवा ने मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक ढांचों की सुरक्षा व्यवस्था विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मंत्री ने कहा कि इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यभर के सभी बूस्टिंग स्टेशनों, वाटर टैंकों और संबंधित परिसरों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और जहां भी सुरक्षा में कमी हो, उसे तुरंत दूर किया जाए।
विभागीय कार्रवाई तेज
मंत्री के निर्देशों के बाद विभाग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए संबंधित एसडीओ प्रीति और जेई रामबीर सिंह को सस्पेंड कर दिया। अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है, जिसमें यह देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।
साथ ही एक्सईएन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।
निर्माण कंपनियों पर भी केस दर्ज
इस मामले में केवल विभागीय अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य कर रही कंपनियों पर भी शिकंजा कसा गया है। कैंप थाना पुलिस ने मृतक शिवम की मां रीना की शिकायत पर दो कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जिन कंपनियों पर केस दर्ज हुआ है, उनमें हरिओम इंजीनियर मैसर्ज होरिकाम इंजीनियर्स और सिल्पा होरिकाम जेवी हैदराबाद शामिल हैं। ये दोनों एजेंसियां संबंधित बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण कार्य कर रही थीं।
पुलिस जांच में प्राथमिक तौर पर सामने आया है कि निर्माण स्थल पर बुनियादी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। न तो टैंक को ढका गया था और न ही आसपास चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग की गई थी। इसी लापरवाही के कारण मासूम की जान चली गई।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि निर्माण स्थलों पर अक्सर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे जल टैंकों के ऊपर मजबूत ढक्कन, लोहे की जाली, चारदीवारी और चेतावनी बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाने चाहिए। यदि ये बुनियादी उपाय किए गए होते, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
पूरे प्रदेश में निरीक्षण के निर्देश
मंत्री रणबीर गंगवा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्यभर में विशेष अभियान चलाया जाए। सभी बूस्टिंग स्टेशनों और जल संरचनाओं की सुरक्षा ऑडिट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहां भी लापरवाही पाई जाएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
परिवार को न्याय दिलाने की मांग
मासूम शिवम की मौत के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और संबंधित पक्षों से पूछताछ जारी है।
फिलहाल यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस सख्त कार्रवाई के बाद सार्वजनिक निर्माण स्थलों पर सुरक्षा को लेकर विभाग और एजेंसियां अधिक सतर्क रहेंगी, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान इस तरह की लापरवाही की भेंट न चढ़े।

