
खुला नाला बना मौत का जाल: ढाई साल की मासूम की दर्दनाक मौत, ग्रामीणों ने लापरवाही पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के धौलाना तहसील क्षेत्र के गांव सपनावत से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। यहां एक खुला नाला ढाई साल की मासूम बच्ची की जान ले बैठा। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और अनदेखी का ऐसा मामला बन गया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मासूम बच्ची सिद्धि अपने घर के सामने खेल रही थी, लेकिन कुछ ही देर में वह हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़कर चली गई। परिवार का कहना है कि अगर समय रहते नाले को ढक दिया गया होता, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती।
खेलते-खेलते मौत के मुंह में समा गई मासूम
गांव निवासी गौरव कुमार के घर के सामने एक पुराना और खुला नाला बना हुआ है। यह नाला लंबे समय से बिना ढके पड़ा था, जिससे आसपास के लोगों को लगातार खतरा बना रहता था।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार की शाम करीब सात बजे गौरव कुमार की ढाई साल की बेटी सिद्धि पड़ोस के बच्चों के साथ घर के बाहर खेल रही थी। खेलते-खेलते बच्चे नाले के आसपास पहुंच गए। इसी दौरान अचानक सिद्धि का पैर फिसल गया और वह सीधे नाले में जा गिरी।
बच्ची के गिरने की घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद बच्चों या किसी अन्य व्यक्ति को इसकी भनक तक नहीं लगी। कुछ देर बाद जब परिवार वालों ने बच्ची को घर के आसपास नहीं देखा तो उन्होंने उसे ढूंढना शुरू किया।
घंटों तलाश के बाद मिली बच्ची
जब काफी देर तक सिद्धि का कहीं पता नहीं चला, तो परिजन घबरा गए और आसपास के लोगों की मदद से बच्ची की तलाश शुरू कर दी। घर के आसपास, गलियों और पड़ोस में काफी देर तक खोजबीन की गई, लेकिन कहीं से भी कोई सुराग नहीं मिला।
काफी देर बाद किसी की नजर घर के सामने बह रहे नाले की ओर गई। जब लोग नाले के पास पहुंचे और अंदर देखा, तो वहां बच्ची पानी में दिखाई दी। यह दृश्य देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए।
गांव के कई लोग तुरंत नाले में उतर गए और किसी तरह बच्ची को बाहर निकाला। हालांकि जब तक बच्ची को बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्ची की सांसें थम चुकी थीं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बेटी की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां काजल का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वह अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर बार-बार यही कहती रही कि अगर नाला ढका होता तो उसकी बेटी आज जिंदा होती।
बच्ची के दादा रामअवतार, दादी गुड्डी देवी, बड़े भाई कपिल और भाभी कोमल सहित पूरे परिवार का दुख शब्दों में बयां करना मुश्किल था। घर में हर तरफ मातम का माहौल छा गया।
गांव के लोग भी इस घटना से बेहद आहत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है।
पहले भी की गई थी शिकायत
बच्ची के पिता गौरव कुमार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से इस खुले नाले को ढकने की मांग की थी।
उनका कहना है कि नाला लंबे समय से खुला पड़ा था और बच्चों के लिए हमेशा खतरा बना रहता था। कई बार शिकायत करने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
गौरव कुमार का कहना है कि अगर उनकी बात को गंभीरता से लिया गया होता और नाले को समय रहते ढक दिया गया होता, तो आज उनकी बेटी की जान बच सकती थी।
ग्रामीणों में गुस्सा
इस घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत और प्रशासन की अनदेखी के कारण एक मासूम की जान चली गई।
गांव के लोगों ने बताया कि नाला काफी पुराना है और कई सालों से खुला पड़ा हुआ है। बरसात के मौसम में इसमें पानी का बहाव तेज हो जाता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने भी कई बार नाले की मरम्मत और उसे ढकने की मांग की थी, लेकिन उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया।
मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
बेटी को खोने के बाद पिता गौरव कुमार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि गांव में मौजूद खुले नालों को जल्द से जल्द ढका जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े।
ग्राम प्रधान का बयान
इस मामले में ग्राम प्रधान राहुल राणा का कहना है कि नाला करीब दस साल पुराना है और समय-समय पर इसकी सफाई कराई जाती रहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बच्ची की मौत की जानकारी अभी तक नहीं मिली थी। यदि ऐसी कोई घटना हुई है तो इसकी जानकारी लेकर उचित कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासन के लिए चेतावनी
यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और स्थानीय निकायों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है।
गांवों और कस्बों में खुले नाले, टूटी सड़कें और अधूरी व्यवस्थाएं अक्सर हादसों की वजह बनती हैं। लेकिन जब तक कोई बड़ी घटना नहीं हो जाती, तब तक जिम्मेदार विभागों की नींद नहीं खुलती।
सपनावत गांव की यह दर्दनाक घटना इस बात का उदाहरण है कि छोटी-सी लापरवाही किस तरह एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन सकती है।
सवाल अभी भी बाकी
मासूम सिद्धि की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या प्रशासन अब इस घटना से सबक लेगा? क्या गांव के खुले नालों को ढकने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे?
फिलहाल इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं, लेकिन एक बात तय है कि इस हादसे ने पूरे गांव को गहरे दुख और गुस्से में डुबो दिया है।
मासूम सिद्धि अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत शायद प्रशासन को यह याद दिलाने के लिए काफी है कि छोटी-सी लापरवाही भी कभी-कभी किसी की जिंदगी छीन सकती है।



