
एसआईआर में बड़ी चूक? 40 साल से रह रहे मतदाताओं के नाम कटे, फॉर्म भरने के बाद भी वोटर लिस्ट से बाहर
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मतदाता सूची में सामने आ रही गड़बड़ियों ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के कई जिलों से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें लंबे समय से एक ही पते पर रह रहे मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया गया है। गाजियाबाद और गोरखपुर के मामलों ने इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गाजियाबाद की साहिबाबाद विधानसभा सीट के पोलिंग बूथ संख्या 126 पर रहने वाले कई परिवारों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। खास बात यह है कि ये लोग वर्ष 1986 से उसी मकान में स्थायी रूप से रह रहे हैं और हर चुनाव में मतदान करते आए हैं। एसआईआर के तहत इन्होंने गणना प्रपत्र भी समय पर भर दिया था, इसके बावजूद उन्हें “अनुपस्थित” और “स्थानांतरित” दिखाकर वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया।
नाम कटने वालों में राम दुलार यादव, फूलमती यादव, धीरेंद्र यादव, अंजू यादव, सरोज और सुनीता यादव शामिल हैं। पीड़ितों का कहना है कि दशकों से एक ही पते पर रहने और सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनका नाम हटाया जाना समझ से परे है। इस गलती के चलते वे अपने मतदान अधिकार को लेकर असमंजस में हैं।
इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने चुनाव अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी का आरोप है कि एसआईआर के नाम पर वास्तविक मतदाताओं को सूची से हटाया जा रहा है। सपा ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए।
उधर, गोरखपुर जिले से भी मतदाता सूची में गंभीर अनियमितता की शिकायत सामने आई है। वार्ड नंबर 16 में एक ही मकान के पते पर 233 मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति पूरी तरह असामान्य है और इससे मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल उठते हैं। उनका आरोप है कि ऐसी गलतियां या तो भारी लापरवाही का नतीजा हैं या फिर जानबूझकर की गई गड़बड़ी।
इसके अलावा कन्नौज सदर विधानसभा सीट को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। सपा का कहना है कि कुछ पोलिंग बूथ नियमों के खिलाफ मंदिर परिसर में बनाए गए हैं, जो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। पार्टी ने इस पर तत्काल संज्ञान लेकर बदलाव की मांग की है।
प्रदेशभर से आ रही इन शिकायतों ने यह संकेत दिया है कि एसआईआर प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए किया जाता है, लेकिन यदि इसमें पारदर्शिता और सतर्कता नहीं बरती गई, तो मतदाताओं का भरोसा कमजोर हो सकता है। प्रशासन के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वह इन मामलों की निष्पक्ष जांच करे और समय रहते त्रुटियों को दूर करे।



