
एलपीजी संकट से जूझ रही दिल्ली, बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहे सिलेंडर, बढ़ी कालाबाजारी
राजधानी दिल्ली में इन दिनों रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। हालात यह हैं कि उपभोक्ता समय पर गैस बुकिंग कराने के बावजूद कई दिनों तक सिलेंडर के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं। इस समस्या ने न केवल घरेलू कामकाज को प्रभावित किया है, बल्कि लोगों के बजट पर भी गहरा असर डाला है।

पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों—शाहदरा, सीलमपुर, विवेक विहार, आनंद विहार, यमुनाविहार और खजूरी—से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि गैस एजेंसियों पर जाने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। एजेंसी संचालक सप्लाई की कमी का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
उपभोक्ताओं के अनुसार, समस्या सिर्फ सप्लाई में कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ रही है। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ डिलीवरी कर्मचारी और बिचौलिये अतिरिक्त पैसे लेकर तुरंत सिलेंडर उपलब्ध करा रहे हैं। जिनके पास अतिरिक्त पैसे हैं, उन्हें गैस आसानी से मिल रही है, जबकि सामान्य उपभोक्ता को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ मामलों में 500 से 700 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करने पर तुरंत सिलेंडर मिल जाता है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं सप्लाई को जानबूझकर धीमा तो नहीं किया जा रहा, ताकि अवैध कमाई की जा सके।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर निम्न आय वर्ग और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। ये लोग पहले ही महंगाई की मार झेल रहे हैं, ऐसे में गैस की अनियमित सप्लाई ने उनकी परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है। कई परिवारों को मजबूरी में बाहर का खाना मंगवाना पड़ रहा है, जिससे उनका खर्च और बढ़ गया है।
विश्वास नगर स्थित एक गैस एजेंसी पर पहुंची महिलाओं ने बताया कि वे कई दिनों से सिलेंडर के लिए चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है। एक महिला ने कहा, “रसोई में गैस खत्म हो चुकी है और हमें समझ नहीं आ रहा कि खाना कैसे बनाएंगे। एजेंसी पर जाते हैं तो सिर्फ इंतजार करने को कहा जाता है।”
विवेक विहार के एक उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने समय पर गैस बुकिंग कराई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी डिलीवरी नहीं हुई। जब उन्होंने एजेंसी से संपर्क किया, तो उन्हें सप्लाई में कमी का हवाला देकर टाल दिया गया।
दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि उनके लिए यह स्थिति बेहद कठिन है। एक मजदूर ने बताया, “हम रोज कमाकर खाते हैं। गैस नहीं मिलने से खाना बनाना मुश्किल हो गया है। बाहर का खाना लेना महंगा पड़ता है, लेकिन मजबूरी में लेना पड़ रहा है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति सप्लाई चेन में गड़बड़ी या निगरानी की कमी के कारण उत्पन्न होती है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो समस्या और गंभीर हो सकती है।
उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि गैस सप्लाई को जल्द से जल्द सुचारु किया जाए और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि इस तरह की स्थिति बनी रही, तो आम लोगों का जीवन और कठिन हो जाएगा।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि डिजिटल बुकिंग सिस्टम होने के बावजूद यदि समय पर डिलीवरी नहीं हो रही है, तो यह व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। सरकार और संबंधित विभागों को इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
फिलहाल, दिल्ली के कई हिस्सों में लोग गैस सिलेंडर के इंतजार में परेशान हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी और उन्हें राहत मिलेगी। जब तक यह समस्या बनी रहती है, तब तक लोगों को इसी तरह कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
यह स्थिति इस बात का संकेत है कि बुनियादी जरूरतों की आपूर्ति में थोड़ी सी भी बाधा आम लोगों की जिंदगी पर कितना बड़ा असर डाल सकती है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करें।



