
एनओसी के बदले 1.25 लाख की मांग, रोहतक में प्रदूषण बोर्ड के SDO को ACB ने दबोचा
हरियाणा के रोहतक में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की टीम ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में तैनात एक एसडीओ को 1.25 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी की पहचान मंजीत सिंह, निवासी झज्जर, के रूप में हुई है। उस पर आरोप है कि उसने एक फैक्ट्री को एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी करने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

मामले की शुरुआत तब हुई जब दिल्ली के एक कंपनी मालिक ने एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी कंपनी झज्जर जिले में एक फैक्ट्री स्थापित करना चाहती है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी जरूरी थी। आरोप है कि संबंधित फाइल को आगे बढ़ाने और अनुमति जारी करने के नाम पर एसडीओ मंजीत सिंह ने 1.25 लाख रुपये की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने पहले इसकी प्रारंभिक जांच की। जांच के दौरान आरोप prima facie सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। शिकायतकर्ता को पूरी प्रक्रिया समझाई गई और तय रणनीति के अनुसार आगे बढ़ने को कहा गया।
योजना के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने तय स्थान पर आरोपी अधिकारी से संपर्क किया और मांगी गई रिश्वत की रकम उसे सौंपी। जैसे ही रकम का लेन-देन हुआ, पहले से घात लगाए बैठी विजिलेंस टीम ने मौके पर छापा मार दिया। टीम ने आरोपी को रिश्वत की राशि सहित रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। मौके पर ही आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं और बरामद रकम को साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया गया।
इस कार्रवाई की खबर फैलते ही विभाग में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी पर पहले भी उद्योगों और फैक्ट्री मालिकों पर दबाव बनाकर अवैध वसूली करने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि यदि आगे की जांच में अन्य मामलों में संलिप्तता सामने आती है तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालन की अनुमति देने में महत्वपूर्ण होती है। किसी भी फैक्ट्री या उद्योग को शुरू करने से पहले बोर्ड से एनओसी लेना अनिवार्य होता है। ऐसे में यदि अनुमति प्रक्रिया को भ्रष्टाचार का माध्यम बना लिया जाए तो इसका सीधा असर उद्योगों और निवेश के माहौल पर पड़ता है।
विजिलेंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत मांगता है या लेता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में भी आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या वह अकेले इस काम में शामिल था या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था। इसके अलावा, उसके पिछले कार्यकाल की फाइलों की भी समीक्षा की जा सकती है, ताकि यह जांचा जा सके कि कहीं और भी एनओसी या अन्य अनुमति के बदले अवैध वसूली तो नहीं की गई।
उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि एनओसी की प्रक्रिया पहले ही काफी जटिल और समय लेने वाली होती है। ऐसे में यदि अधिकारी रिश्वत मांगने लगें तो छोटे और मध्यम उद्यमियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। इस तरह की कार्रवाइयों से उम्मीद की जा रही है कि व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और ईमानदार उद्यमियों को राहत मिलेगी।
वहीं, प्रशासन ने आम लोगों और उद्योगपतियों से अपील की है कि यदि कोई अधिकारी उनसे अवैध धन की मांग करता है तो वे तुरंत विजिलेंस या एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचना दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और कानून के तहत पूरी सुरक्षा दी जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई अब केवल औपचारिकता नहीं रह गई है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सख्ती से अमल किया जा रहा है। रोहतक में हुई यह कार्रवाई राज्य भर के अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
फिलहाल आरोपी एसडीओ को अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है। अदालत से रिमांड लेकर उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में और भी तथ्य सामने आते हैं, तो मामले का दायरा बढ़ सकता है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

