
एनआईटी में आत्महत्याओं पर बड़ा खुलासा—कर्ज और सट्टेबाजी के जाल में फंसे छात्र, जांच तेज
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में बीते दो महीनों के भीतर हुई आत्महत्या की घटनाओं ने अब एक गंभीर और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। मामले की जांच के लिए मंगलवार को संस्थान पहुंचीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने कई अहम तथ्य सामने रखे, जिनसे यह संकेत मिलता है कि इन घटनाओं के पीछे केवल मानसिक दबाव ही नहीं, बल्कि आर्थिक बोझ और सट्टेबाजी जैसे कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।

रेणु भाटिया ने करीब साढ़े चार घंटे तक एनआईटी परिसर में रहकर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने न केवल हाल की घटनाओं की समीक्षा की, बल्कि छात्रों की परिस्थितियों और संस्थान के अंदर चल रही गतिविधियों को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं और तत्काल सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
जांच में सामने आया है कि कई छात्र क्रेडिट कार्ड के जरिए लिए गए कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। इन कर्जों पर करीब 36 प्रतिशत तक की ऊंची ब्याज दर लगाई जा रही है, जिससे छात्रों की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो रही है। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि छात्र पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज ले रहे हैं, जिससे वे एक खतरनाक चक्र में फंसते जा रहे हैं।
भाटिया ने बताया कि यह स्थिति अचानक नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित व्यवस्था की आशंका भी नजर आती है। उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र किया, जो क्रेडिट कार्ड बनवाने से जुड़ा हुआ था और करीब 3500 छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप से संपर्क में था। यह सवाल खड़ा होता है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों तक उसकी पहुंच कैसे बनी और बिना अभिभावकों की जानकारी या संस्थान की अनुमति के क्रेडिट कार्ड कैसे जारी कर दिए गए।
इस मामले में संबंधित व्यक्ति को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया, लेकिन वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद महिला आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस को निर्देश दिए कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता और हर पहलू की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
संस्थान प्रशासन ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कार्यवाहक निदेशक ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि 9 अप्रैल को एक छात्र की आत्महत्या के बाद ही उन्होंने संबंधित बैंक को पत्र लिखकर कैंपस में क्रेडिट कार्ड बनाने की प्रक्रिया को रोकने के निर्देश दिए थे। साथ ही अन्य बैंकों और कंपनियों को भी स्पष्ट कर दिया गया कि वे संस्थान परिसर में इस तरह की गतिविधियां न करें।
इस पूरे मामले में पहले भी कर्ज का मुद्दा सामने आ चुका है। 31 मार्च को एनआईटी के एक छात्र पवन कुमार ने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली थी। उसके परिजनों ने आरोप लगाया था कि वह क्रेडिट कार्ड के कर्ज में फंसा हुआ था। पिता के अनुसार, उन्होंने बेटे को कर्ज चुकाने के लिए हजारों रुपये दिए थे, लेकिन इसके बावजूद वह मानसिक तनाव से बाहर नहीं निकल सका।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने हाल ही में हुई सभी आत्महत्या की घटनाओं का पूरा विवरण भी मांगा है। उन्होंने विशेष रूप से छात्रा दीक्षा दुबे की आत्महत्या और एक अन्य छात्रा द्वारा आत्महत्या के प्रयास के मामलों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन घटनाओं के पीछे के कारणों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इसके अलावा उन्होंने यह भी जांचा कि किन परिस्थितियों में छात्रों से हॉस्टल खाली करवाया गया और इसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा। छात्रों से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने प्रशासन के साथ कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की और सुधार के सुझाव भी दिए।
रेणु भाटिया ने पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद करने की पहल भी की है। उन्होंने कहा कि वे खुद परिजनों से बात करेंगी, ताकि उनकी समस्याओं और भावनाओं को समझा जा सके। उन्होंने उस छात्रा से भी बात की, जिसने आत्महत्या का प्रयास किया था। फिलहाल वह मानसिक रूप से आघात में है और अपने परिवार के साथ नहीं रहना चाहती। भाटिया ने आश्वासन दिया कि वह उसके साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर उसकी मदद करने की कोशिश करेंगी।
बीते दो महीनों में एनआईटी में चार छात्रों द्वारा आत्महत्या और एक छात्रा द्वारा प्रयास की घटनाओं ने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं के बाद संस्थान में अनिश्चितकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और छात्रों को समय दिया जा सके।
इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है और संस्थान प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। अब इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई 19 मई को निर्धारित की गई है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही जांच में और स्पष्टता आएगी।
कुल मिलाकर, एनआईटी का यह मामला केवल आत्महत्या की घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक दबाव और संस्थागत जिम्मेदारी जैसे कई गंभीर पहलुओं को उजागर कर रहा है। अब यह आवश्यक हो गया है कि संबंधित एजेंसियां मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और छात्रों को सुरक्षित व सहयोगपूर्ण वातावरण मिल सके।

